प्रधानमंत्री के जवाब के बिना लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पास, 2004 के बाद पहली बार...
बजट सत्र के दौरान लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री के जवाब के बिना पारित हो गया. 2004 के बाद यह पहली बार हुआ. वहीं, राज्यसभा में राहुल गांधी के मुद्दे पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली.

New Delhi: बजट सत्र के सातवें दिन संसद के इतिहास में एक असामान्य स्थिति देखने को मिली, जब लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव प्रधानमंत्री के जवाब के बिना ही पारित हो गया. वर्ष 2004 के बाद यह पहला मौका है, जब प्रधानमंत्री धन्यवाद प्रस्ताव पर अपनी बात नहीं रख सके. विपक्षी हंगामे के कारण लोकसभा की कार्यवाही बार-बार स्थगित करनी पड़ी, जिससे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संबोधन टल गया. इसी मुद्दे को लेकर राज्यसभा में भी जोरदार हंगामा हुआ. कांग्रेस ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को बोलने की अनुमति न मिलने का आरोप लगाया, जबकि सरकार ने नियमों के उल्लंघन का हवाला दिया. राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा और विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच तीखी नोक-झोंक देखने को मिली. हालात इतने बिगड़े कि विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा से वॉकआउट कर दिया.
PM का जवाब बहस का अहम हिस्सा होता है
लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव उस समय पारित किया गया, जब सदन में लगातार हंगामा जारी था. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस प्रस्ताव पर जवाब देने के लिए सदन में मौजूद थे, लेकिन विपक्षी सांसदों की नारेबाजी और तख्तियों के प्रदर्शन के कारण कार्यवाही नहीं चल सकी. स्पीकर ओम बिरला ने पहले 65 सेकंड के भीतर और बाद में पांच मिनट के अंदर कार्यवाही स्थगित की. दोपहर 12 बजे जब सदन दोबारा शुरू हुआ, तब भी स्थिति नहीं सुधरी. विपक्षी सांसदों के शोर-शराबे के बीच धन्यवाद प्रस्ताव को पारित कर दिया गया. इसके बाद लोकसभा को दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दिया गया. संसदीय परंपरा के अनुसार प्रधानमंत्री का जवाब इस बहस का अहम हिस्सा होता है, लेकिन परिस्थितियों के चलते यह संभव नहीं हो सका.
2004 के बाद पहली बार बिना पीएम भाषण के प्रस्ताव पास
संसदीय रिकॉर्ड के मुताबिक, इससे पहले 10 जून 2004 को तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह धन्यवाद प्रस्ताव पर जवाब नहीं दे पाए थे. उस समय भी विपक्षी हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही बाधित हुई थी. करीब 22 साल बाद एक बार फिर ऐसा हुआ है कि प्रधानमंत्री का भाषण हुए बिना ही यह प्रस्ताव पारित हुआ. सरकार की ओर से यह कहा गया कि प्रधानमंत्री चर्चा के लिए पूरी तरह तैयार थे, लेकिन विपक्ष ने सदन चलने नहीं दिया. वहीं विपक्ष ने इसे लोकतांत्रिक परंपराओं के खिलाफ बताया. इस घटनाक्रम ने संसद की कार्यप्रणाली और सदन में व्यवधान के मुद्दे को एक बार फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है.
लोकसभा में महिला सांसदों का विरोध, पीएम की कुर्सी घेरने का मामला
बुधवार शाम करीब 5 बजे जब लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, तब विपक्ष की महिला सांसदों ने सत्ताधारी दल के नेताओं की सीटों के पास विरोध प्रदर्शन किया. इस दौरान प्रधानमंत्री की कुर्सी के आसपास भी प्रदर्शन हुआ. महिला सांसदों के हाथों में बड़े बैनर थे, जिन पर “जो सही है, वो करो” जैसे नारे लिखे थे. इस विरोध के कारण सदन की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी और स्पीकर को लोकसभा स्थगित करनी पड़ी. इसी वजह से प्रधानमंत्री का संबोधन भी टल गया. गुरुवार को इस घटना का जिक्र करते हुए स्पीकर ओम बिरला ने कहा कि पिछले दिन जो हुआ, वह सदन की गरिमा के अनुरूप नहीं था.
राज्यसभा में राहुल गांधी के मुद्दे पर हंगामा
राज्यसभा में विपक्ष ने लोकसभा में राहुल गांधी को बोलने की अनुमति न मिलने का मुद्दा उठाया. विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि राहुल गांधी पूर्व सेना प्रमुख एमएम नरवणे की अप्रकाशित किताब से जुड़े मुद्दे पर बोलना चाहते थे, लेकिन उन्हें रोका गया. उपसभापति ने इस पर आपत्ति जताते हुए कहा कि राज्यसभा में लोकसभा के विषय पर चर्चा नहीं की जा सकती. इसके बाद सदन में हंगामा तेज हो गया. कांग्रेस सांसदों ने आरोप लगाया कि विपक्ष की आवाज दबाई जा रही है, जबकि सरकार ने इसे नियमों का मामला बताया.
जेपी नड्डा और खड़गे के बीच तीखी बहस
राज्यसभा में नेता सदन जेपी नड्डा और मल्लिकार्जुन खड़गे के बीच तीखी बहस देखने को मिली. नड्डा ने राहुल गांधी का नाम लिए बिना कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी को “अबोध बालक” का बंधक नहीं बनाना चाहिए. उन्होंने कहा कि सरकार हर विषय पर चर्चा के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष कार्यवाही बाधित कर रहा है. इस पर खड़गे ने पलटवार करते हुए कहा कि सत्ता पक्ष अहंकार में है और लोकतंत्र को कुचलने की कोशिश कर रहा है. उन्होंने कहा कि संसद लोकसभा और राज्यसभा दोनों से मिलकर बनती है और एक सदन में जो होता है, उसका असर दूसरे सदन पर भी पड़ता है.
रिजिजू का आरोप: विपक्ष नियमों का उल्लंघन कर रहा
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष को बोलने का पर्याप्त समय दिया गया था, लेकिन उन्होंने स्पीकर की रूलिंग का पालन नहीं किया. रिजिजू के अनुसार, राहुल गांधी को निर्धारित समय से अधिक समय दिया गया, लेकिन उन्होंने ऐसे विषय उठाए जिनकी अनुमति नहीं थी. उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष जानबूझकर सदन की कार्यवाही रोक रहा है. रिजिजू ने आरोप लगाया कि विपक्ष सदन को गुमराह कर रहा है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया में बाधा डाल रहा है.
विपक्ष का वॉकआउट और आगे की स्थिति
लगातार हंगामे के बाद विपक्षी सांसदों ने राज्यसभा से वॉकआउट कर दिया. इसके बावजूद सदन की कार्यवाही कुछ समय तक जारी रही और बाद में दोपहर 2 बजे तक के लिए स्थगित कर दी गई. रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शाम को राज्यसभा में संबोधन कर सकते हैं. हालांकि, लोकसभा में धन्यवाद प्रस्ताव पर उनका जवाब न हो पाना बजट सत्र की सबसे बड़ी घटनाओं में से एक बन गया है. संसद के दोनों सदनों में जारी गतिरोध के चलते आने वाले दिनों में कार्यवाही सुचारु रूप से चल पाएगी या नहीं, इस पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.

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