कुसुंभा कांड के आरोपी भीम राम के गले में बीजेपी का गमछा, JMM बोली- बीजेपी तो 'रक्तपिपासु' निकली
हजारीबाग के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र के कुसुंभा गांव का मामला अब सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि सियासत का हाई-वोल्टेज अखाड़ा बन चुका है. वायरल तस्वीरों ने राजनीतिक नैरेटिव को झकझोर दिया है, जहां एक तरफ BJP खुद को बचाने में जुटी है, वहीं JMM हमलावर मोड में है.

Hazaribagh: हजारीबाग के विष्णुगढ़ थाना क्षेत्र के कुसुंभा गांव का मामला अब सिर्फ एक हत्या नहीं, बल्कि सियासत का हाई-वोल्टेज अखाड़ा बन चुका है. वायरल तस्वीरों ने राजनीतिक नैरेटिव को झकझोर दिया है, जहां एक तरफ BJP खुद को बचाने में जुटी है, वहीं JMM हमलावर मोड में है. आरोपी भीम राम की बीजेपी नेताओं के साथ तस्वीरें सामने आने के बाद सवालों की आंधी चल पड़ी है. “रक्तपिपासु भाजपा” जैसे तीखे आरोपों ने माहौल और गर्म कर दिया है. बंद, प्रदर्शन, बयानबाज़ी और पलटवार—सब कुछ इस केस को राजनीतिक युद्ध में बदल चुका है. अब असली लड़ाई सिर्फ सच की नहीं, बल्कि धारणा की भी है—और यही तय करेगा कि जनता किस पर भरोसा करती है.
सियासत का ब्लास्ट: ‘रक्तपिपासु भाजपा’ तक पहुंचा हमला
झारखंड की राजनीति में इस केस ने विस्फोट कर दिया है. JMM ने सीधे BJP पर निशाना साधते हुए “रक्तपिपासु पार्टी” तक कह दिया. पार्टी के आधिकारिक हैंडल से आरोप लगाया गया कि BJP आरोपी को बचाने और पूरे मामले को दबाने की साजिश रच रही है.
वायरल फोटो: जिसने पूरा गेम पलट दिया
मामले में सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बना एक वायरल फोटो. इस तस्वीर में आरोपी भीम राम BJP के बड़े नेताओं—Aditya Sahu, Manish Jaiswal, Nagendra Mahto और Pradeep Prasad—के साथ नजर आ रहा है. सबसे ज्यादा चर्चा उस फोटो की है जिसमें आरोपी के गले में BJP का पट्टा साफ दिखाई देता है. यही तस्वीर अब पूरे विवाद का “सेंटर ऑफ ग्रैविटी” बन चुकी है.
BJP का बचाव: आरोपी से कोई रिश्ता नहीं’
विवाद बढ़ने के बाद Aditya Sahu सामने आए और प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सफाई दी. उन्होंने कहा—आरोपी का BJP से कोई लेना-देना नहीं है. साथ ही मीडिया पर भी आरोप लगाया गया कि झूठी खबरों के जरिए पार्टी को बदनाम किया जा रहा है. यह बयान अब उसी फोटो के सामने खड़ा है—और यहीं से सवाल तेज हो गए हैं.
बयान vs सबूत: किस पर भरोसा करे जनता?
अब पूरा मामला “कौन सच बोल रहा है?” पर टिक गया है. एक तरफ BJP का दावा—कोई कनेक्शन नहीं. दूसरी तरफ वायरल फोटो—जो कुछ और कहानी कहती दिख रही है. राजनीति में तस्वीरें हमेशा रिश्ते की गारंटी नहीं होतीं, लेकिन जब मामला हत्या जैसा गंभीर हो, तो हर फ्रेम सवाल बन जाता है.
लोकल केस से नेशनल नैरेटिव
इस पूरे विवाद को JMM ने असम चुनाव से भी जोड़ दिया है. Hemant Soren ने चाय बागान और आदिवासी मुद्दों को उठाते हुए इशारों में कहा कि अगर झारखंड में न्याय नहीं मिलेगा, तो इसका असर दूसरे राज्यों के वोट बैंक पर भी पड़ेगा. यानी एक लोकल केस अब नेशनल पॉलिटिकल नैरेटिव में फिट किया जा रहा है.
आख़िरी सच: क्या हुआ था कुसुंभा में?
24 मार्च की रात, रामनवमी के दिन जुलूस देखने गई 13 वर्षीय सीता की हत्या कर दी गई. पुलिस जांच में सामने आया कि मां रेशमी देवी ने अपने प्रेमी भीम राम और एक तांत्रिक के साथ मिलकर “बलि” के नाम पर बच्ची की हत्या करवाई. पत्थर से सिर कुचलकर हत्या की गई और खून का इस्तेमाल कथित तौर पर रिचुअल में हुआ. पुलिस ने तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है—लेकिन इस क्रूर सच्चाई के ऊपर अब सियासत की परत चढ़ चुकी है. कुसुंभा कांड में अब सवाल सिर्फ एक हत्या का नहीं—बल्कि सियासत, नैरेटिव और भरोसे की लड़ाई का है. सच कोर्ट में तय होगा… लेकिन फैसला जनता पहले ही बना लेती है.

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