किसान मोर्चा ने विधायक निशात आलम को सौंपा 20 सूत्री मांगों का ज्ञापन, MSP की कानूनी गारंटी की मांग
पाकुड़ विधायक निशात आलम को संयुक्त किसान मोर्चा ने 20 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा. इसमें सभी फसलों के लिए MSP की कानूनी गारंटी, किसानों की कर्जमाफी, मनरेगा में रोजगार बढ़ाने, सिंचाई सुविधा और साहिबगंज-पाकुड़ की स्थानीय समस्याओं के समाधान की मांग की गई.

साहिबगंज-पाकुड़ क्षेत्र में किसानों और मजदूरों से जुड़े मुद्दों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा ने रविवार को पाकुड़ विधायक निशात आलम को 20 सूत्री मांगों का ज्ञापन सौंपा. कामरेड असगर आलम के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल ने विधायक से किसानों, कृषि मजदूरों और स्थानीय लोगों की समस्याओं को विधानसभा में उठाने की अपील की. ज्ञापन में सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) की कानूनी गारंटी, किसानों की कर्जमाफी, सिंचाई व्यवस्था और मनरेगा में रोजगार व मजदूरी बढ़ाने जैसी मांगें शामिल हैं. मोर्चा ने केंद्र सरकार से किसान आंदोलन के दौरान किए गए कथित वादों को लागू करने की मांग भी उठाई. इसके अलावा सड़क, भूमि अधिग्रहण, मुआवजा, बाढ़-कटाव, राशन, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी स्थानीय समस्याओं को भी ज्ञापन में जगह दी गई.
MSP की कानूनी गारंटी और कर्जमाफी की मांग
किसान मोर्चा ने सभी फसलों के लिए C2+50 प्रतिशत फार्मूले के आधार पर MSP की कानूनी गारंटी और सरकारी खरीद सुनिश्चित करने की मांग रखी. किसानों और कृषि मजदूरों की कर्जमाफी के साथ किसान आत्महत्या से प्रभावित परिवारों को 25 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग भी की गई.
मनरेगा और श्रमिकों के मुद्दे उठाए
प्रतिनिधिमंडल ने चार श्रम संहिताओं को वापस लेने और न्यूनतम मजदूरी बढ़ाकर 31 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग की. मनरेगा में सालाना 200 दिनों के रोजगार और 700 रुपये प्रतिदिन मजदूरी की गारंटी की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही. सामाजिक सुरक्षा पेंशन को बढ़ाकर 10 हजार रुपये प्रतिमाह करने की मांग उठाई गई.
कृषि और सिंचाई व्यवस्था में सुधार की मांग
मोर्चा ने भारतीय खाद्य निगम (FCI) को मजबूत करने और खाद्य भंडारण व्यवस्था में निजी कंपनियों के कथित प्रभाव को खत्म करने की मांग की. कृषि व खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में एफडीआई पर रोक, सार्वजनिक फसल एवं पशुधन बीमा व्यवस्था और सभी खेतों तक सिंचाई सुविधा पहुंचाने की मांग भी रखी गई. बाढ़ और सूखे से प्रभावित किसानों को प्रभावी राहत देने की बात कही गई.
भूमि अधिकार और प्रस्तावित कानूनों पर आपत्ति
ज्ञापन में बिजली निजीकरण विधेयक, बीज विधेयक और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम में प्रस्तावित संशोधनों को वापस लेने की मांग की गई. प्रतिनिधिमंडल ने जबरन भूमि अधिग्रहण रोकने तथा किसानों, आदिवासियों और वनवासियों के भूमि अधिकारों की रक्षा की मांग उठाई. सहकारी समितियों को कॉरपोरेट नियंत्रण से बचाने की बात भी कही गई.
सड़क, मुआवजा और स्थानीय समस्याओं पर जोर
पाकुड़-बरहरवा मुख्य सड़क के विभिन्न हिस्सों के चौड़ीकरण और मजबूतीकरण की मांग की गई. श्रीकुंड से शिवपहाड़ तक प्रस्तावित सड़क के लिए तीन फसली जमीन के अधिग्रहण पर भी आपत्ति जताई गई. साहिबगंज में फोरलेन निर्माण से प्रभावित रैयतों को उचित मुआवजा, गोपालपुर दियारा के बाढ़-कटाव प्रभावित भूमिहीनों को जमीन और आवास देने की मांग रखी गई. इसके अलावा दाखिल-खारिज में तेजी, राशन वितरण की व्यवस्था सुधारने, खासमहल जमीन पर मालिकाना हक, अनसर्वे जमीन का सर्वे और सरकारी स्कूलों में शिक्षकों के रिक्त पद भरने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही.

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