Jyeshtha Adhik Purnima 2026: 30 या 31 मई? अधिक मास की पूर्णिमा को लेकर दूर करें भ्रम, जानें व्रत, दान-स्नान की सही तारीख
अधिक मास की ज्येष्ठ पूर्णिमा को लेकर लोगों के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है. पूर्णिमा तिथि 30 और 31 मई दोनों दिन पड़ रही है. जानिए पूर्णिमा व्रत की सही तारीख, दान-स्नान का शुभ मुहूर्त, शिव योग और सिद्धि योग का महत्व.


ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 2026 को लेकर श्रद्धालुओं के बीच इस बार काफी असमंजस की स्थिति बनी हुई है. अधिक मास के चलते पूर्णिमा तिथि दो दिनों तक रहने वाली है, जिससे लोग जानना चाहते हैं कि व्रत 30 मई को रखा जाए या 31 मई को. हिंदू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष धार्मिक महत्व होता है, और जब यह अधिक मास में आती है, तो इसका महत्व कई गुना बढ़ जाता है. इस दिन भगवान विष्णु के सत्यनारायण स्वरूप और माता लक्ष्मी की पूजा-अर्चना की जाती है. इसके साथ ही दान, स्नान, जप-तप और धार्मिक अनुष्ठानों का भी खास महत्व बताया गया है.
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अधिक मास भगवान विष्णु का प्रिय मास माना जाता है. इसलिए इस दौरान आने वाली पूर्णिमा को अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है. मान्यता है कि इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से किया गया व्रत व्यक्ति को सुख, समृद्धि और आध्यात्मिक उन्नति प्रदान करता है.
30 मई या 31 मई? जानिए पूर्णिमा व्रत की सही तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार, व्रत और त्योहारों की तिथियां सूर्योदय के आधार पर तय की जाती हैं. पंचांग की गणना के अनुसार, ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा तिथि 30 मई 2026, शनिवार को सुबह 11 बजकर 58 मिनट से शुरू होगी और यह 31 मई 2026, रविवार को दोपहर 3 बजकर 15 मिनट तक चलेगी. चूंकि पूर्णिमा तिथि 31 मई को सूर्योदय के समय मौजूद रहेगी, इसलिए पूर्णिमा व्रत, दान और स्नान का मुख्य पर्व 31 मई 2026 को मनाया जाएगा। धार्मिक नियमों के अनुसार, जिस दिन सूर्योदय के समय पूर्णिमा तिथि होती है, उसी दिन पूर्णिमा व्रत रखा जाता है. इसीलिए श्रद्धालुओं को 31 मई को व्रत, पूजा और दान-पुण्य करना चाहिए.
पूर्णिमा के दिन भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और चंद्र देव की पूजा का विशेष महत्व होता है. इस दिन सत्यनारायण कथा का आयोजन भी शुभ माना जाता है. मान्यता है कि ऐसा करने से घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है.
अधिक मास की पूर्णिमा क्यों मानी जाती है बेहद शुभ?
अधिक मास में आने वाली पूर्णिमा को सामान्य पूर्णिमा की तुलना में अधिक फलदायी माना जाता है. धार्मिक ग्रंथों के अनुसार, इस दिन किए गए दान-पुण्य और पूजा-पाठ का फल कई गुना बढ़ जाता है. इसलिए, श्रद्धालु इस दिन विशेष रूप से व्रत रखते हैं और भगवान विष्णु की आराधना करते हैं. कहा जाता है कि अधिक ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है और व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है. इसके साथ ही, पितरों की शांति के लिए भी यह दिन बहुत शुभ माना जाता है. इस अवसर पर जरूरतमंद लोगों को अन्न, वस्त्र, जल और धन का दान करना भी पुण्यदायी माना जाता है.
धार्मिक दृष्टि से, यह दिन आत्मशुद्धि, ईश्वर भक्ति और पुण्य संचय का एक खास अवसर है. यही वजह है कि श्रद्धालु पूरे वर्ष अधिक मास की पूर्णिमा का इंतजार करते हैं.
शिव योग और सिद्धि योग बढ़ाएंगे दिन का महत्व
इस बार ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा के मौके पर दो खास शुभ योग बन रहे हैं, जिससे इस पर्व का महत्व और भी बढ़ गया है. 30 मई को शिव योग का निर्माण हो रहा है, जिसे ज्योतिष शास्त्र में बेहद शुभ माना जाता है. इस दिन भगवान शिव के साथ लक्ष्मी-नारायण की पूजा करने से जीवन में सुख, समृद्धि और शुभ फल की प्राप्ति की मान्यता है. वहीं, 31 मई को पूर्णिमा तिथि के दौरान सिद्धि योग का निर्माण हो रहा है। वैदिक ज्योतिष में सिद्धि योग को सफलता, पुण्य और शुभ कार्यों के लिए बहुत ही मंगलकारी माना गया है.
कहा जाता है कि इस योग में किए गए दान-पुण्य, जप, तप और पूजा-पाठ का विशेष लाभ मिलता है. ऐसे में ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा 2026 केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि ज्योतिषीय दृष्टि से भी बेहद खास मानी जा रही है. श्रद्धालु 31 मई को व्रत, स्नान, दान और भगवान विष्णु-माता लक्ष्मी की पूजा करके इस पावन दिन का पूरा लाभ उठा सकते हैं.

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