JPSC-JSSC छात्र आंदोलन: NSUI और JCM से मिले मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू, 14वीं JPSC रद्द करने समेत कई मांगें
JPSC-JSSC छात्र आंदोलन के बीच सरकार ने NSUI और JCM प्रतिनिधियों से बातचीत कर छात्रों की मांगों और सुझावों को सुना. बैठक में 14वीं JPSC और 2023-25 बैकलॉग परीक्षाओं को रद्द करने, निष्पक्ष जांच, परीक्षा कैलेंडर और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता की मांग प्रमुख रही.

Ranchi: झारखंड में JPSC और JSSC परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर छात्र आंदोलन जारी है. इस बीच सरकार की ओर से आंदोलन से जुड़े अलग-अलग छात्र संगठनों और हितधारकों से बातचीत का सिलसिला शुरू किया गया है. इसी क्रम में मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने NSUI प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर छात्रों की मांगों और सुझावों की जानकारी ली. बैठक में 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करने, भर्ती परीक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करने समेत कई मुद्दों पर चर्चा हुई. सरकार की ओर से कहा गया कि सभी स्टेकहोल्डर्स से बातचीत कर उनकी राय ली जा रही है. वहीं, छात्र प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों को मांग पत्र के रूप में सरकार के सामने रखा है. छात्रों का कहना है कि उनकी मांग केवल किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरी भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना जरूरी है.
NSUI प्रतिनिधियों से मिले मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू
मंत्री सुदिव्य कुमार सोनू ने NSUI प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर JPSC और JSSC परीक्षाओं से जुड़े मुद्दों पर चर्चा की. बैठक के बाद मंत्री ने कहा कि छात्र आंदोलन से जुड़े सभी स्टेकहोल्डर्स से बातचीत की जा रही है. इसी क्रम में NSUI के प्रतिनिधियों के साथ भी बैठक की गई और उनकी मांगों तथा सुझावों को सुना गया. मंत्री के अनुसार, NSUI प्रतिनिधियों की ओर से रखी गई मांगें जायज हैं और इन मुद्दों को सरकार के स्तर पर गंभीरता से देखा जा रहा है. उन्होंने उम्मीद जताई कि मुख्यमंत्री की ओर से भी छात्रों की मांगों को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया सामने आएगी. सरकार का कहना है कि अलग-अलग छात्र संगठनों से बातचीत के बाद सभी पक्षों की राय को समझने और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई करने की कोशिश की जा रही है. इस प्रक्रिया के जरिए सरकार और आंदोलनरत छात्रों के बीच संवाद का रास्ता बनाए रखने पर जोर दिया जा रहा है.
14वीं JPSC परीक्षा रद्द करने की मांग
छात्र प्रतिनिधि कुमार राजा ने बताया कि छात्रों से बातचीत के बाद उनकी मांगों को एक मांग पत्र के रूप में तैयार कर सरकार के समक्ष रखा गया है. उन्होंने कहा कि छात्रों की प्रमुख मांगों में 14वीं JPSC परीक्षा को रद्द करना शामिल है. छात्रों की ओर से परीक्षा प्रक्रिया को लेकर उठाए जा रहे सवालों के बीच इस मांग को प्रमुखता से सरकार के सामने रखा गया है. कुमार राजा के अनुसार, छात्रों की मांग किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं है. उनका कहना है कि राज्य की पूरी भर्ती परीक्षा व्यवस्था में सुधार और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की जरूरत है. छात्रों का आरोप है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी कई समस्याओं की एक बड़ी वजह आउटसोर्सिंग व्यवस्था है. इसलिए इस व्यवस्था को समाप्त कर अधिक पारदर्शी और जवाबदेह सिस्टम लागू करने की मांग की जा रही है. छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता आने से अभ्यर्थियों का भरोसा बढ़ेगा और मेधावी छात्रों के साथ न्याय सुनिश्चित किया जा सकेगा.
JCM प्रतिनिधियों के साथ भी हुई बैठक
JMM की छात्र इकाई झारखंड छात्र मोर्चा यानी JCM के प्रतिनिधियों के साथ भी सरकार की ओर से बैठक की गई. इस दौरान 14वीं JPSC परीक्षा में कथित अनियमितताओं और छात्रों की विभिन्न मांगों पर विस्तार से चर्चा हुई. छात्रों की ओर से परीक्षा रद्द करने, मामले की निष्पक्ष जांच कराने और भर्ती प्रक्रिया को समयबद्ध तरीके से पूरा करने की मांग रखी गई. बैठक में छात्रों ने 14वीं JPSC परीक्षा के साथ 2023-25 बैकलॉग परीक्षाओं को भी रद्द करने की मांग सामने रखी. इसके अलावा परीक्षाओं के आयोजन और परिणाम जारी करने के लिए स्पष्ट एवं निष्पक्ष परीक्षा कैलेंडर जारी करने की मांग की गई. छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं में देरी और अनिश्चितता के कारण अभ्यर्थियों को लंबे समय तक इंतजार करना पड़ता है. ऐसे में परीक्षा और परिणाम से जुड़ा स्पष्ट कैलेंडर जरूरी है, ताकि छात्रों को अपनी तैयारी और भविष्य की योजना बनाने में परेशानी न हो.
पेपर लीक मामले में 19 गिरफ्तारियों की जानकारी
बैठक के दौरान सरकार की ओर से पेपर लीक और नियुक्ति नियमावली से जुड़े मामलों की कार्रवाई की जानकारी भी दी गई. सरकार की ओर से बताया गया कि इन मामलों में अब तक 19 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है. छात्रों की ओर से जहां परीक्षा प्रक्रिया की निष्पक्षता और पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं, वहीं सरकार ने कार्रवाई किए जाने की बात कही है. JCM की ओर से कहा गया कि राज्य सरकार के पास पूरे मामले की जांच कराने का अधिकार है और सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से देख रही है. छात्रों की मांग है कि जिन परीक्षाओं को लेकर सवाल उठ रहे हैं, उनकी निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाए. वहीं, सरकार का रुख बातचीत के जरिए छात्रों की चिंताओं को समझने और संबंधित मामलों पर आवश्यक कार्रवाई करने का है. अब छात्रों की नजर इस बात पर है कि सरकार उनकी मांगों पर आगे क्या कदम उठाती है.
JSSC CGL मामला हाईकोर्ट में, सरकार ने बताई स्थिति
बैठक के दौरान JSSC CGL परीक्षा से जुड़े मामले पर भी चर्चा हुई. सरकार की ओर से बताया गया कि JSSC CGL में नियुक्तियां हो चुकी हैं और मामला फिलहाल हाईकोर्ट में विचाराधीन है. ऐसे में इस मामले में सरकार की ओर से सीधे हस्तक्षेप करना संभव नहीं है. JSSC CGL को लेकर छात्रों और अभ्यर्थियों के बीच लंबे समय से विभिन्न सवाल उठते रहे हैं. बैठक में इस मुद्दे को भी छात्रों की चिंताओं के हिस्से के तौर पर रखा गया. सरकार की ओर से न्यायिक प्रक्रिया का हवाला देते हुए अपनी स्थिति स्पष्ट की गई. वहीं, छात्र संगठनों की ओर से भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और अभ्यर्थियों के हितों को प्राथमिकता देने की मांग जारी है. इस मामले में अब आगे की स्थिति अदालत में होने वाली सुनवाई और संबंधित फैसलों पर निर्भर करेगी. छात्रों का कहना है कि भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों में अभ्यर्थियों के भविष्य और उनके हितों का ध्यान रखा जाना चाहिए.
आंदोलन का राजनीतिकरण नहीं करने की अपील
JCM प्रतिनिधियों की ओर से छात्रों को भरोसा दिलाया गया कि JPSC-JSSC से जुड़े आंदोलन और छात्रों की मांगों का राजनीतिकरण नहीं किया जाएगा. प्रतिनिधियों ने कहा कि मेधावी छात्रों के साथ न्याय सुनिश्चित करना प्राथमिकता होनी चाहिए. बैठक के दौरान आंदोलन कर रहे छात्रों से बातचीत जारी रखने और धरना समाप्त करने की अपील भी की गई. JCM प्रतिनिधि ने यह भी कहा कि JPSC की स्थापना से लेकर 13वीं JPSC तक किसी JMM नेता या कार्यकर्ता के परिवार के सदस्य की नियुक्ति नहीं हुई है. यह बयान उन राजनीतिक आरोपों के संदर्भ में दिया गया, जिनमें भर्ती प्रक्रिया को लेकर राजनीतिक प्रभाव के सवाल उठाए जाते रहे हैं. छात्र आंदोलन के बीच सरकार की ओर से लगातार अलग-अलग संगठनों से बातचीत की जा रही है. ऐसे में आने वाले दिनों में इन बैठकों का क्या परिणाम निकलता है और छात्रों की मांगों पर सरकार क्या फैसला लेती है, इस पर सभी की नजर बनी हुई है.
सरकार से सकारात्मक पहल की उम्मीद
JPSC-JSSC छात्र आंदोलन के बीच सरकार और विभिन्न छात्र संगठनों के बीच हो रही बैठकों का मुख्य फोकस भर्ती परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता और छात्रों के भविष्य को सुरक्षित करने पर है. छात्र संगठनों की ओर से संदिग्ध परीक्षाओं को रद्द करने, निष्पक्ष जांच कराने और समयबद्ध भर्ती प्रक्रिया सुनिश्चित करने की मांग की जा रही है. दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि वह आंदोलन से जुड़े सभी स्टेकहोल्डर्स से बातचीत कर उनकी मांगों और सुझावों को समझ रही है. NSUI और JCM प्रतिनिधियों के साथ हुई बैठकों के बाद अब छात्रों को सरकार की ओर से सकारात्मक पहल की उम्मीद है. 14वीं JPSC परीक्षा, बैकलॉग परीक्षाओं, परीक्षा कैलेंडर, कथित अनियमितताओं और भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता जैसे मुद्दे फिलहाल आंदोलन के केंद्र में हैं. अब आगे होने वाली बैठकों और सरकार के निर्णय से यह स्पष्ट होगा कि छात्रों की मांगों पर क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं.

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