JPSC-JSSC: 12 दिन बाद भी रिफॉर्म्स कमेटी और निगरानी प्रकोष्ठ का गठन नहीं, अटकी प्रक्रिया पर उठे सवाल
JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में सुधार और निगरानी के लिए झारखंड सरकार ने 18 अगस्त को कमेटी बनाने का फैसला लिया था. 12 दिन बाद भी रिफॉर्म्स कमेटी और निगरानी प्रकोष्ठ का गठन नहीं हो सका है.

रांची: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं को पारदर्शी और विवादों से मुक्त बनाने के लिए सरकार की ओर से घोषित सुधार अब तक जमीन पर पूरी तरह नहीं उतर पाए हैं. JPSC और JSSC की परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी, अनियमितता और भ्रष्टाचार की शिकायतों के बाद राज्य मंत्रिपरिषद ने 18 अगस्त को परीक्षा सुधार समिति और आंतरिक निगरानी प्रकोष्ठ गठित करने का निर्णय लिया था. इसी दिन कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग ने इससे संबंधित अधिसूचना भी जारी की थी. हालांकि, फैसले के 12 दिन बीत जाने के बाद भी दोनों समितियों का औपचारिक गठन नहीं हो सका है.सरकार ने परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा के लिए IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में समिति बनाने और उसे दो महीने के भीतर रिपोर्ट देने की बात कही थी. ऐसे में गठन में हो रही देरी को लेकर सवाल उठ रहे हैं. वहीं, भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों की त्वरित सुनवाई के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन की दिशा में हुई प्रगति भी अब तक स्पष्ट नहीं है.
कैबिनेट के फैसले के बाद जारी हुई थी अधिसूचना
राज्य सरकार ने 18 अगस्त को हुई कैबिनेट बैठक में JPSC और JSSC की भर्ती परीक्षाओं में सुधार से जुड़े कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए थे. इसका उद्देश्य परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ाना और भविष्य में गड़बड़ी की शिकायतों को रोकना था.
कार्मिक एवं प्रशासनिक सुधार विभाग के सचिव प्रवीण टोप्पो की ओर से उसी दिन जारी अधिसूचना में सरकार के फैसलों की जानकारी दी गई थी. इसके बावजूद अब तक संबंधित समितियों के गठन की प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है.
अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में बननी है रिफॉर्म्स कमेटी
सरकार ने परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार के लिए IAS अधिकारी अमिताभ कौशल की अध्यक्षता में परीक्षा सुधार समिति बनाने का निर्णय लिया है. समिति को JPSC और JSSC की मौजूदा परीक्षा प्रणाली की समीक्षा करनी है.
इसके बाद समिति को सुधार के लिए जरूरी सुझावों के साथ अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपनी होगी. इसके लिए दो महीने की समयसीमा तय की गई है. ऐसे में समिति के गठन में शुरुआती स्तर पर ही देरी होने से तय समय में रिपोर्ट तैयार करने को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं.
निगरानी प्रकोष्ठ का काम परीक्षा प्रक्रिया पर नजर रखना
सरकार ने दोनों भर्ती आयोगों की परीक्षा प्रक्रिया पर लगातार निगरानी रखने के लिए आंतरिक निगरानी प्रकोष्ठ बनाने का भी फैसला किया था. इसका उद्देश्य परीक्षा से जुड़ी संभावित अनियमितताओं की समय रहते पहचान करना और शिकायतों पर प्रभावी तरीके से नजर रखना है.
हालांकि, 12 दिन बाद भी इस प्रकोष्ठ के गठन की प्रक्रिया पूरी नहीं होने से सरकार की घोषित निगरानी व्यवस्था फिलहाल कागजों तक सीमित दिखाई दे रही है.
कमेटी में अधिकारियों और विशेषज्ञों को शामिल करने की तैयारी
सूत्रों के अनुसार परीक्षा सुधार समिति में अमिताभ कौशल के अलावा कई अन्य अधिकारियों और प्रतिष्ठित संस्थानों के निदेशकों को शामिल करने पर विचार किया जा रहा है. समिति के सदस्यों को लेकर शीर्ष स्तर पर सहमति बनने में समय लग रहा है.
बताया जा रहा है कि इसी वजह से समिति के गठन की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ पा रही है. हालांकि, सरकार की ओर से इस देरी के कारणों को लेकर अब तक कोई विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है.
फास्ट ट्रैक कोर्ट को लेकर भी स्थिति स्पष्ट नहीं
भर्ती परीक्षाओं से जुड़े मामलों की जल्द सुनवाई के लिए सरकार ने फास्ट ट्रैक कोर्ट की मांग करने का निर्णय भी लिया था. इसके लिए हाईकोर्ट से आग्रह किए जाने की बात सामने आई थी, लेकिन इस दिशा में अब तक क्या कार्रवाई हुई, इसकी स्थिति स्पष्ट नहीं है.
JPSC और JSSC की परीक्षाओं को लेकर पहले से विवादों और अभ्यर्थियों की चिंताओं के बीच सुधार समितियों का गठन महत्वपूर्ण माना जा रहा है. अब निगाह इस बात पर है कि सरकार इन समितियों का गठन कब तक करती है और तय समयसीमा में परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए ठोस सिफारिशें कब सामने आती हैं.

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