JPSC-JSSC परीक्षा विवाद में बड़ा अपडेट, 2800 अभ्यर्थी जांच के घेरे में; विशेष अदालत में होगी सुनवाई
झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ी से जुड़े मामलों की सुनवाई अब रांची सिविल कोर्ट की विशेष अदालत में होगी. इसी बीच कंप्यूटर आधारित परीक्षा में करीब 2,800 अभ्यर्थियों के सिस्टम में बाहरी हस्तक्षेप के संकेत मिलने की जानकारी सामने आई है.

रांची: झारखंड में प्रतियोगी भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी कथित अनियमितताओं के मामलों में अब सुनवाई के लिए एक अलग न्यायिक व्यवस्था लागू की गई है. रांची सिविल कोर्ट में गठित विशेष अदालत राज्यभर में भर्ती परीक्षाओं के दौरान अनुचित साधनों के इस्तेमाल से जुड़े मामलों की सुनवाई करेगी. इसका मतलब है कि मामला रांची में दर्ज हो या राज्य के किसी दूसरे जिले में, यदि वह प्रतियोगी परीक्षा में गड़बड़ी से संबंधित है तो उसे इसी विशेष अदालत में सुना जा सकेगा. यह व्यवस्था झारखंड प्रतियोगी परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों के नियंत्रण और रोकथाम के उपाय) अधिनियम, 2023 के तहत की गई है. इसी बीच एक कंप्यूटर आधारित परीक्षा से जुड़ी जांच में करीब 2,800 अभ्यर्थियों के सिस्टम में बाहरी हस्तक्षेप के संकेत मिलने की जानकारी सामने आई है. करीब 25 हजार अभ्यर्थियों वाली इस परीक्षा को लेकर अब तकनीकी जांच और कानूनी प्रक्रिया दोनों पर नजर है.
भर्ती परीक्षा से जुड़े मामलों के लिए अलग अदालत
झारखंड में प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता से जुड़े मामलों की सुनवाई के लिए रांची सिविल कोर्ट में विशेष अदालत बनाई गई है. हाईकोर्ट के निर्देश और राज्य सरकार के विधि विभाग के आदेश के बाद इस व्यवस्था को लागू किया गया.
विशेष अदालत का अधिकार क्षेत्र सिर्फ रांची जिले तक सीमित नहीं होगा. राज्य के किसी भी हिस्से में दर्ज भर्ती परीक्षा से जुड़े अनुचित साधनों के मामलों को यहां सुनवाई के लिए लाया जा सकेगा.
पेपर लीक और नकल जैसे मामले भी शामिल
विशेष अदालत में प्रतियोगी परीक्षाओं के दौरान होने वाली विभिन्न प्रकार की गड़बड़ियों से जुड़े मामलों की सुनवाई होगी. इनमें प्रश्नपत्र लीक होने, परीक्षा में नकल, प्रश्नपत्र से छेड़छाड़ और परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए अनुचित तकनीकी या अन्य साधनों के इस्तेमाल से जुड़े मामले शामिल हैं.
इस व्यवस्था का उद्देश्य ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई को अधिक व्यवस्थित करना और सुनवाई की प्रक्रिया को गति देना है.
25 हजार अभ्यर्थियों ने दी थी कंप्यूटर आधारित परीक्षा
मामले की सुनवाई के दौरान JSSC की ओर से परीक्षा से संबंधित जानकारी दी गई. आयोग के मुताबिक, 27 जून से शुरू हुई कंप्यूटर आधारित परीक्षा में लगभग 25 हजार अभ्यर्थी शामिल हुए थे.
परीक्षा के दौरान कंप्यूटर सिस्टम के साथ किसी बाहरी हस्तक्षेप की पहचान करने के लिए विशेष तकनीकी व्यवस्था की गई थी. बाद में जांच में कुछ अभ्यर्थियों के सिस्टम में संदिग्ध गतिविधि के संकेत मिलने की बात सामने आई.
2800 अभ्यर्थियों की आंसर-की हुई लॉक
जांच के दौरान करीब 2,800 अभ्यर्थियों के कंप्यूटर में बाहरी प्रभाव के संकेत मिले. इसके बाद आयोग ने संबंधित अभ्यर्थियों की आंसर-की लॉक कर दी.
आयोग की ओर से इन अभ्यर्थियों को नोटिस जारी कर उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया कि सिस्टम में मिले बाहरी प्रभाव में उनकी कोई भूमिका थी या नहीं. संबंधित अभ्यर्थियों से इस संबंध में शपथपत्र भी लिए गए.
दोबारा परीक्षा और आगे की कानूनी प्रक्रिया
आयोग ने संबंधित अभ्यर्थियों को दोबारा परीक्षा में शामिल होने को लेकर भी नोटिस जारी किया है. अब मामले से जुड़े तकनीकी पहलुओं, अभ्यर्थियों के जवाब और अन्य तथ्यों की जांच की जा रही है.
वहीं, राज्यभर में भर्ती परीक्षाओं से जुड़ी गड़बड़ियों के मामलों की सुनवाई एक विशेष अदालत में होने से इनके निपटारे में तेजी आने की उम्मीद है. हालांकि, जिन अभ्यर्थियों के सिस्टम में बाहरी हस्तक्षेप के संकेत मिले हैं, उनकी भूमिका को लेकर अंतिम स्थिति जांच और कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी.

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