असम चुनाव में जेएमएम की बड़ी सेंध, कल्पना सोरेन प्रचार के लिए रवाना – 18 सीटों पर लड़ाई, कल्पना सबसे ताकतवर महिला स्टार प्रचारक
असम चुनाव 2026 में JMM ने 18 सीटों पर चुनाव लड़ते हुए बड़ा दांव खेला है. गांडेय विधायक कल्पना सोरेन स्टार प्रचारक के रूप में मैदान में उतर चुकी हैं और आदिवासी व चाय जनजाति वोट बैंक पर फोकस कर रही हैं.


Deoghar: JMM की गांडेय विधायक कल्पना सोरेन मंगलवार को असम विधानसभा चुनाव 2026 के प्रचार अभियान के लिए देवघर एयरपोर्ट से रवाना हुईं. जेएमएम की इस यात्रा का मकसद पूर्वोत्तर में पार्टी का विस्तार है. कल्पना सोरेन जेएमएम की 4 महिला स्टार प्रचारकों में सबसे मजबूत चेहरा हैं. वे चाय बागान मजदूरों, आदिवासी अधिकार और एसटी स्टेटस जैसे मुद्दों पर जोरदार प्रचार करेंगी. पार्टी ने असम की 126 सीटों में से 21 पर उम्मीदवार उतारे हैं (3 नामांकन रद्द होने के बाद 18 पर लड़ाई). कांग्रेस के साथ सीट शेयरिंग की बातचीत फेल होने के बाद जेएमएम अब स्वतंत्र रूप से मैदान में है, हालांकि स्थानीय छोटे दलों के साथ तालमेल की गुंजाइश बरकरार है. कल्पना सोरेन का यह प्रचार जेएमएम को असम की आदिवासी और चाय जनजाति बेल्ट में मजबूत जगह दिलाने की कोशिश का हिस्सा है.
जेएमएम की असम में विस्तार की नई कहानी
जेएमएम असम चुनाव में पहली बार बड़े पैमाने पर उतर रही है. पार्टी ने 21 सीटों पर उम्मीदवार घोषित किए, जिनमें चाय बागान प्रभावित क्षेत्र जैसे गौसाईगांव, सोनारी, डिगबोई, डुलियाजान आदि शामिल हैं. तीन नामांकन रद्द होने के बाद भी 18 सीटों पर लड़ाई जारी है. यह जेएमएम की राष्ट्रीय स्तर पर आदिवासी राजनीति का विस्तार है. झारखंड से आकर असम में बसे चाय जनजाति समुदाय को एसटी स्टेटस दिलाने का वादा पार्टी का मुख्य मुद्दा है. कल्पना सोरेन अब हेमंत सोरेन के साथ मिलकर इन इलाकों में रैलियां करेंगी. यह अभियान जेएमएम को जम्मू-कश्मीर से लेकर पूर्वोत्तर तक आदिवासी आवाज बनाने की रणनीति का अगला पड़ाव है.
कल्पना सोरेन – 4 महिला स्टार प्रचारकों में सबसे ताकतवर
जेएमएम ने असम चुनाव के लिए 20 स्टार प्रचारकों की सूची चुनाव आयोग को सौंपी है. इसमें 4 महिला स्टार प्रचारक शामिल हैं, जिनमें कल्पना सोरेन सबसे मजबूत और प्रभावी चेहरा हैं. गांडेय उपचुनाव में जबरदस्त जीत दर्ज करने के बाद कल्पना आदिवासी महिलाओं की आवाज बन चुकी हैं. उनकी रैलियों में महिलाएं और युवा बड़ी संख्या में जुड़ते हैं. असम में वे चाय मजदूर महिलाओं के बीच ‘मैया सम्मान’ और ‘जल-जंगल-जमीन’ के मुद्दे उठाएंगी. हेमंत सोरेन के साथ उनकी जोड़ी असम के आदिवासी वोट बैंक को जेएमएम की ओर खींचने का सबसे बड़ा हथियार है. कल्पना का प्रचार कौशल और जनसंपर्क उन्हें पार्टी की सबसे भरोसेमंद स्टार प्रचारक बनाता है.
असम चुनाव समीकरण और जेएमएम की रणनीति
कांग्रेस के साथ सीट शेयरिंग की बातें टूटने के बाद जेएमएम स्वतंत्र रूप से 18 सीटों पर लड़ रही है. पार्टी ने जय भारत पार्टी जैसे स्थानीय दलों के साथ तालमेल की तैयारी रखी है. मुख्य लक्ष्य चाय बागान बेल्ट और आदिवासी बहुल क्षेत्रों में वोट काटना है. कल्पना सोरेन का प्रचार अभियान इसी समीकरण को बदलने का प्रयास है. वे जहां जाएंगी, वहां स्थानीय मुद्दों पर फोकस करेंगी – लंबे समय से लंबित एसटी स्टेटस, मजदूरों की सुविधाएं और विकास. यह प्रचार जेएमएम को असम में नई पहचान दिलाने की कहानी लिख रहा है. अगर सफल हुआ तो 2026 के बाद पूर्वोत्तर में जेएमएम की मौजूदगी मजबूत हो जाएगी.

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