PoK में प्रदर्शन, ब्लैकआउट और मौतों पर भारत की दो टूक, कहा- पाकिस्तान जवाबदेही से नहीं बच सकता
PoK में प्रदर्शनकारियों पर कार्रवाई और 90 से ज्यादा मौतों के दावे के बीच भारत ने पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठाए हैं. विदेश मंत्रालय ने कहा कि लोगों के असंतोष का जवाब गोलियों, ब्लैकआउट और दमन से दिया गया.

New Delhi: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर यानी PoK में कई हफ्तों से चल रहे विरोध प्रदर्शन अब पाकिस्तान के लिए सिर्फ कानून-व्यवस्था का मामला नहीं रह गए हैं. मामला इतना बिगड़ा कि क्षेत्र में चुनावी प्रक्रिया तक प्रभावित हो गई. सुरक्षा कारणों से अंतिम चरण के मतदान को कुछ सीटों पर टालना पड़ा है. इसी बीच भारत ने पाकिस्तान पर वहां के लोगों की आवाज दबाने के लिए बल प्रयोग और ब्लैकआउट का सहारा लेने का आरोप लगाया है. विदेश मंत्रालय ने कहा कि लोगों के असंतोष का जवाब गोलियों, बिजली और इंटरनेट बंद करने, दमन और उत्पीड़न से दिया गया. भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान को मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जवाबदेह ठहराने की अपील भी की है.
PoK में आखिर क्यों भड़का आंदोलन?
PoK में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व Joint Awami Action Committee यानी JAAC से जुड़े समूह कर रहे हैं. आंदोलन की शुरुआत आर्थिक और राजनीतिक मांगों से हुई, लेकिन बाद में विवाद का बड़ा मुद्दा विधानसभा की 12 आरक्षित सीटें बन गईं. ये सीटें पाकिस्तान में रह रहे उन कश्मीरी शरणार्थियों के लिए हैं, जो भारतीय हिस्से से विस्थापित हुए हैं. JAAC का आरोप है कि इन सीटों का इस्तेमाल इस्लामाबाद PoK की राजनीति को प्रभावित करने के लिए करता है. प्रदर्शनकारी इन सीटों की व्यवस्था में बदलाव के साथ-साथ राजनीतिक प्रतिनिधित्व और स्थानीय अधिकारों से जुड़े मुद्दे उठा रहे हैं. पाकिस्तान की अदालत पहले ही इन सीटों की संवैधानिक स्थिति बरकरार रख चुकी है और कहा है कि इसमें बदलाव के लिए संवैधानिक प्रक्रिया जरूरी होगी.
विरोध से हिंसा तक पहुंचा मामला, दर्जनों लोगों की मौत
जून से ही PoK में प्रदर्शन और सुरक्षा बलों के बीच टकराव की कई घटनाएं सामने आई हैं. शुरुआती दौर में ही रावलाकोट और दूसरे इलाकों में हिंसा में लोगों की मौत हुई. रॉयटर्स की जून की रिपोर्ट के मुताबिक दो हफ्तों के आंदोलन में कम से कम 24 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें नागरिक और पुलिसकर्मी शामिल थे. इंटरनेट बंद करने, रास्ते रोकने और बड़ी संख्या में लोगों को हिरासत में लेने की भी खबरें सामने आई थीं. इसके बाद जुलाई में भी हिंसा जारी रही. 27 जुलाई को चुनाव के दौरान JAAC के लंबे मार्च और सुरक्षा बलों के बीच झड़पों में कई लोगों के मारे जाने की खबर आई. JAAC ने सुरक्षा बलों पर गोली चलाने का आरोप लगाया, जबकि अधिकारियों ने कुछ दावों की पुष्टि नहीं की. भारत के विदेश मंत्रालय ने अब कहा है कि पिछले कुछ महीनों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए और 90 से अधिक लोग मारे गए तथा कई अन्य घायल हुए. यह आंकड़ा भारत की ओर से दिया गया है और इसमें प्रदर्शनकारियों, सुरक्षाकर्मियों तथा आम नागरिकों की मौतों को लेकर अलग-अलग रिपोर्टें मौजूद हैं.
चुनाव के बीच बढ़ा संकट, कुछ सीटों पर मतदान टला
PoK का संकट अब चुनाव तक पहुंच गया है. क्षेत्र में विधानसभा चुनाव कई चरणों में कराए जा रहे हैं. पहले चरणों में पाकिस्तान की सत्तारूढ़ PML-N ने 34 में से 24 सीटें जीत ली थीं. अंतिम चरण में बाकी सीटों के लिए मतदान होना था, लेकिन सुरक्षा हालात के कारण कुछ निर्वाचन क्षेत्रों में मतदान स्थगित करना पड़ा. यह घटनाक्रम पाकिस्तान के लिए इसलिए अहम है क्योंकि वह PoK में चुनावी प्रक्रिया को राजनीतिक प्रतिनिधित्व के तौर पर पेश करता रहा है. लेकिन हिंसा, प्रदर्शन और सुरक्षा संकट के बीच मतदान का टलना उसी प्रक्रिया पर सवाल खड़े करता है. JAAC ने चुनाव के बहिष्कार का आह्वान भी किया है. पाकिस्तान सरकार का आरोप है कि प्रतिबंधित संगठन के आंदोलन में हिंसक और हथियारबंद तत्व शामिल हो गए हैं. अधिकारियों ने कुछ हमलों के पीछे पाकिस्तानी तालिबान से जुड़े तत्वों के शामिल होने के आरोप भी लगाए हैं. दूसरी तरफ प्रदर्शनकारी अपनी राजनीतिक और आर्थिक मांगों को लेकर आंदोलन जारी रखने की बात कर रहे हैं.
भारत ने कहा- असंतोष का जवाब गोलियों और ब्लैकआउट से दिया
इसी पूरे घटनाक्रम के बीच भारत के विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान पर सीधा हमला बोला है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि PoK में लोगों के असंतोष का जवाब पाकिस्तान के अधिकारियों ने गोलियों और ब्लैकआउट से दिया. भारत ने कहा कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर और पाकिस्तान के दूसरे हिस्सों में मानवाधिकार उल्लंघनों पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ध्यान देना चाहिए. नई दिल्ली ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से पाकिस्तान को उसके कथित गलत कामों, ज्यादतियों और मानवाधिकार उल्लंघनों के लिए जवाबदेह ठहराने की अपील की है.
भारत का यह बयान ऐसे समय आया है जब PoK में विरोध, हिंसा और चुनावी अस्थिरता एक साथ दिखाई दे रही है. यानी पाकिस्तान के सामने अब सिर्फ प्रदर्शन रोकने की चुनौती नहीं है. उसे यह भी दिखाना होगा कि जिस क्षेत्र को वह लोकतांत्रिक प्रतिनिधित्व वाला बताता है, वहां लोगों की राजनीतिक नाराजगी का समाधान बातचीत से क्यों नहीं हो पा रहा है.
PoK में आंदोलन का मुद्दा अब स्थानीय मांगों से आगे निकलकर पाकिस्तान की शासन व्यवस्था, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और मानवाधिकारों पर सवाल बन चुका है. भारत ने इसी बिंदु को अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठाते हुए पाकिस्तान को घेरा है. आने वाले दिनों में यह देखना अहम होगा कि इस्लामाबाद आंदोलनकारियों से बातचीत का रास्ता अपनाता है या सुरक्षा बलों के सहारे स्थिति नियंत्रित करने की कोशिश जारी रखता है.

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