बिना पानी उद्घाटन, टलते ऑपरेशन… ‘क्यों किया उद्घाटन?’—एक ही सवाल पर अड़े सरयू, स्पीकर की तल्खी से गरमा गया सदन
जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल की नई ओपीडी बिल्डिंग में पानी की किल्लत को लेकर झारखंड विधानसभा में शुक्रवार को जोरदार हंगामा हुआ। वरिष्ठ विधायक सरयू राय ने बार-बार सवाल उठाया कि “जब पानी की व्यवस्था नहीं थी तो उद्घाटन क्यों किया गया?

रांची: बिना पानी के उद्घाटन, रोज टलते ऑपरेशन और एक ही सवाल पर अड़े विधायक—आज झारखंड विधानसभा में यही तीन शब्द पूरे हंगामे की वजह बने। जमशेदपुर के एमजीएम अस्पताल की नई ओपीडी बिल्डिंग में पानी की किल्लत को लेकर वरिष्ठ विधायक सरयू राय ने ऐसा मुद्दा उठाया कि सदन में माहौल कई बार तल्ख हो गया। बार-बार एक ही सवाल—“जब पानी नहीं था, तो उद्घाटन क्यों किया?”—और इसी सवाल पर उनकी जिद ने पूरी कार्यवाही को बहस के केंद्र में ला दिया।
सरयू राय ने सदन में कहा कि एमजीएम की नई ओपीडी बिल्डिंग का उद्घाटन चुनाव से पहले जल्दबाजी में कर दिया गया, जबकि उस वक्त पानी की कोई व्यवस्था ही नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि आज हालत यह है कि पानी के अभाव में रोजाना कई ऑपरेशन टालने पड़ रहे हैं, मरीज परेशान हैं और डॉक्टरों के सामने भी संकट खड़ा हो गया है। उनका सीधा आरोप था—“जनता की जरूरत नहीं, उद्घाटन की जल्दबाजी देखी गई।”
सरकार की ओर से जवाब देने खड़े हुए स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने सफाई दी कि अस्पताल की बिल्डिंग ऊंचाई पर होने के कारण पानी की सप्लाई में तकनीकी दिक्कत आ रही है। कई बार बोरिंग की कोशिश की गई, लेकिन सफलता नहीं मिली। उन्होंने कहा कि फिलहाल वैकल्पिक इंतजाम से पानी दिया जा रहा है और स्थायी समाधान के लिए काम जारी है। उन्होंने यह भी बताया कि टाटा स्टील की पाइपलाइन पास से गुजरती है, उससे पानी लेने के लिए बातचीत चल रही है और छह महीने में पूरी व्यवस्था दुरुस्त करने का भरोसा दिया।
लेकिन सरयू राय अपने सवाल से टस से मस नहीं हुए। उन्होंने कहा कि नगर निगम से रोजाना लगभग 1020 लीटर पानी मिल रहा है, जो अस्पताल के लिए नाकाफी है। उन्होंने चेतावनी दी कि गर्मी आते ही संकट और गहरा जाएगा—“तब मरीजों का क्या होगा?”
इसी बीच विधायक पूर्णिमा दास साहू ने भी अस्पताल में अव्यवस्था का मुद्दा उठाया और आरोप लगाया कि प्रसव कराने आई महिलाओं को बेड तक नहीं मिलते, उन्हें जमीन पर इलाज कराना पड़ता है। इसपर मंत्री ने कहा कि यह सदन को गुमराह करने की कोशिश है।
बहस का ताप तब और बढ़ गया जब सरयू राय बार-बार उसी मूल सवाल पर लौटते रहे—उद्घाटन क्यों किया गया? आखिरकार स्पीकर रवींद्रनाथ महतो ने खीजकर बीच में हस्तक्षेप किया और तल्ख लहजे में कहा—
“अब छोड़ दीजिए सरयू बाबू… आपका मूल प्रश्न हम समझ रहे हैं। आपको पानी से मतलब नहीं है, आपको मतलब है कि उद्घाटन क्यों हुआ।”
स्पीकर की इस टिप्पणी के बाद सदन में कुछ देर के लिए सन्नाटा और फिर शोर—और यही सवाल अब सदन से निकलकर जनता के बीच भी गूंज रहा है—क्या बिना बुनियादी व्यवस्था के उद्घाटन सही था?

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