अवैध कोयला खनन: उरीमारी में चाल धंसने से दो मजदूरों की मौत, फिर उठे माफिया और प्रशासन पर सवाल
रामगढ़ के उरीमारी थाना क्षेत्र में अवैध कोयला खनन के दौरान चाल धंसने से दो मजदूरों की मौत हो गई. लगातार हो रहे ऐसे हादसों के बावजूद अवैध खनन पर रोक नहीं लग पा रही है. घटना के बाद एक बार फिर प्रशासन की कार्रवाई और कोयला माफियाओं की भूमिका पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.

Ramgarh: झारखंड के रामगढ़ जिले के उरीमारी थाना क्षेत्र स्थित सीसीएल बरका-सयाल परियोजना के लुरूंगा इलाके में अवैध कोयला खनन के दौरान बड़ा हादसा हो गया. चाल (खनन सुरंग) धंसने से दो मजदूरों की मौत हो गई. घटना के बाद पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई. स्थानीय लोगों का आरोप है कि क्षेत्र में लंबे समय से अवैध खनन का कारोबार खुलेआम चल रहा है, लेकिन प्रशासन और संबंधित विभाग प्रभावी कार्रवाई नहीं कर रहे हैं. लगातार हो रहे हादसों के बावजूद न अवैध खदानें बंद हो रही हैं और न ही इस धंधे के असली सरगनाओं पर शिकंजा कस रहा है, जिससे मजदूरों की जान लगातार जोखिम में पड़ रही है.
बिना सुरक्षा के मौत की खदानों में उतर रहे मजदूर
स्थानीय लोगों के अनुसार, लुरूंगा क्षेत्र में लंबे समय से अवैध कोयला खनन कराया जा रहा है. मजदूरों को बिना किसी सुरक्षा व्यवस्था के खदानों के अंदर उतार दिया जाता है. उनके पास न हेलमेट होता है, न सुरक्षा उपकरण और न ही खनन के दौरान किसी प्रकार की तकनीकी निगरानी की व्यवस्था रहती है. ऐसे हालात में मजदूर अपनी जान जोखिम में डालकर कोयला निकालते हैं, जबकि इस कारोबार से मोटी कमाई करने वाले लोग सुरक्षित बैठे रहते हैं. हादसा होने पर सबसे पहले गरीब मजदूर ही इसकी कीमत अपनी जान देकर चुकाते हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि चाल धंसने जैसी घटनाएं नई नहीं हैं, लेकिन हर बार कुछ दिनों तक हलचल रहती है और फिर पूरा मामला ठंडे बस्ते में चला जाता है.
लगातार हादसों के बावजूद नहीं थम रहा अवैध खनन
यह पहली घटना नहीं है. इससे पहले राउतपारा में चाल धंसने से एक मजदूर की मौत हुई थी, जबकि चानो इलाके में दो अलग-अलग हादसों में तीन मजदूरों ने अपनी जान गंवाई थी. इसके बावजूद अवैध खनन का नेटवर्क लगातार सक्रिय है. स्थानीय लोगों का आरोप है कि दिन-रात कोयले की निकासी होती है और ट्रैक्टर समेत अन्य वाहनों से उसकी ढुलाई भी खुलेआम होती है, लेकिन जिम्मेदार विभागों की ओर से कोई ठोस कार्रवाई नहीं की जाती. लोगों का सवाल है कि आखिर यह अवैध कारोबार किसके संरक्षण में चल रहा है? उनका कहना है कि यदि समय रहते अवैध खदानों को सील किया जाता, पूरे नेटवर्क पर सख्ती से कार्रवाई होती और माफियाओं के खिलाफ प्रभावी अभियान चलाया जाता, तो आज दो और परिवारों को अपने कमाने वाले सदस्य नहीं खोने पड़ते. हर हादसे में गरीब मजदूर की जान जाती है, जबकि अवैध कमाई करने वाले लोग अक्सर कानून की पकड़ से बाहर रह जाते हैं.

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