पहले बयान फिर माफी, विवादों के ‘सीरियल स्टेटमेंट’ में नया नाम— फिर सुर्खियों में निशिकांत दुबे
बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे एक बार फिर अपने विवादित बयानों को लेकर सियासी घेराबंदी में हैं. इस बार मामला ओडिशा के दिग्गज नेता बीजू पटनायक से जुड़ा है, जिन पर टिप्पणी कर उन्होंने बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया. विवाद बढ़ते ही दुबे ने सफाई देते हुए माफी मांग ली

Ranchi: बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे एक बार फिर अपने विवादित बयानों को लेकर सियासी घेराबंदी में हैं. इस बार मामला ओडिशा के दिग्गज नेता बीजू पटनायक से जुड़ा है, जिन पर टिप्पणी कर उन्होंने बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा कर दिया. विवाद बढ़ते ही दुबे ने सफाई देते हुए माफी मांग ली, लेकिन मामला यहीं थमता नजर नहीं आ रहा. बीजेडी, कांग्रेस और खुद बीजेपी के भीतर भी इस बयान को लेकर असहजता दिख रही है. खास बात यह है कि यह पहली बार नहीं है जब दुबे अपने बयानों को लेकर घिरे हैं—इससे पहले भी वे न्यायपालिका, चुनाव आयोग और पूर्व प्रधानमंत्रियों तक पर गंभीर आरोप लगा चुके हैं.
क्या था पूरा विवाद?
27 मार्च को दिए गए बयान में निशिकांत दुबे ने 1960 के दशक की राजनीति और खासकर जवाहरलाल नेहरू की नीतियों पर सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि 1962 के भारत-चीन युद्ध के दौरान नेहरू के अमेरिका और उसकी खुफिया एजेंसी CIA से संबंध थे. इसी क्रम में उन्होंने यह भी कहा कि बीजू पटनायक अमेरिका, CIA और नेहरू के बीच ‘मध्यस्थ’ की भूमिका निभा रहे थे और उन्हें रक्षा से जुड़ी संवेदनशील जिम्मेदारियां दी गई थीं. यही बयान ओडिशा में बड़ा मुद्दा बन गया, क्योंकि बीजू पटनायक को वहां एक सम्मानित और ऐतिहासिक नेता के तौर पर देखा जाता है.

माफी में क्या बोले दुबे?
विवाद बढ़ने के बाद दुबे ने X (पूर्व ट्विटर) पर सफाई देते हुए कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया. उन्होंने लिखा- “पिछले हफ़्ते मीडिया से बात करते हुए मैने नेहरु गांधी परिवार के कारनामों के क्रम में पूर्व मुख्यमंत्री भारत के अग्रणी नेताओं में स्थान रखने वाले आदरणीय श्री बीजू पटनायक जी के संदर्भ में मेरी बातों से ग़लत अर्थ निकाला गया . पहले तो यह वक्तव्य मेरा व्यक्तिगत है. नेहरु जी के उपर मेरे विचार को बीजू बाबू के उपर समझा गया. बीजू बाबू हमारे लिए हमेशा ऊंचे कद के Statesman रहे है और रहेंगे. मेरे वक्तव्य से यदि भावनाएं आहत हुई हैं तो मैं बेशर्त क्षमा चाहता हूं.”
ओडिशा में सियासी भूचाल
इस बयान के बाद नवीन पटनायक समेत बीजेडी नेताओं ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. बीजेडी सांसद सस्मित पात्रा ने संसदीय समिति से इस्तीफा दे दिया. वहीं नवीन पटनायक ने बयान को अपमानजनक बताते हुए कहा कि इस तरह की टिप्पणी अस्वीकार्य है. ओडिशा सरकार के कानून मंत्री ने भी साफ किया कि यह दुबे की निजी राय है और सरकार इससे सहमत नहीं है.
पुराने विवाद भी बने बोझ
निशिकांत दुबे का विवादों से पुराना नाता रहा है. अप्रैल 2025 में इन्होंने सीधे CJI पर हमला कर दिया था. कह दिया “CJI देश में धार्मिक युद्ध और सिविल वॉर के लिए जिम्मेदार हैं.” सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें इररेस्पॉन्सिबल और स्कैंडलस कहा. अवमानना की कार्रवाई की मांग हुई. फिर उसी महीने उन्होंने पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी को “मुस्लिम कमिश्नर” कहा. बोले — “आप चुनाव आयुक्त नहीं, मुस्लिम कमिश्नर थे.” इसके बाद पूर्व प्रधानमंत्री स्व राजीव गांधी पर भी आरोप लगाये. कहा राजीव गांधी ने 1977 में बोइंग डील में कमीशन लिया.
बयान या पैटर्न?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि निशिकांत दुबे के बयान अब एक पैटर्न बन चुके हैं. एक तरफ बीजेपी आधिकारिक तौर पर संतुलित बयानबाजी की कोशिश करती है, वहीं दुबे जैसे नेता बार-बार ऐसी टिप्पणियां कर देते हैं, जिससे विवाद खड़ा हो जाता है. बीजू पटनायक जैसे सम्मानित नेता पर आरोप लगाना न सिर्फ क्षेत्रीय भावनाओं को आहत करता है, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी असर डालता है. माफी के बावजूद निशिकांत दुबे का यह विवाद उनके पुराने बयानों की याद दिलाता है. यह मामला साफ संकेत देता है कि उनकी बयानबाज़ी अब सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि एक लगातार बनता राजनीतिक ट्रेंड है—जो हर बार नया विवाद खड़ा कर देता है.

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