क्या मेडाल और हेल्थमैप खा गये रिम्स निदेशक डॉ राजकुमार की नौकरी... बाबूलाल तो यही बता रहे हैं
Ranchi : रिम्स निदेशक डॉ राजकुमार को बर्खास्त करने के मामले पर राजनीति गर्म है. कल जेडीयू विधायक सरयू राय ने इसे लेकर नाराजगी जताई थी, वहीं आज बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया है. मरांडी ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर गंभीर आरोप लगा...


Ranchi : रिम्स निदेशक डॉ राजकुमार को बर्खास्त करने के मामले पर राजनीति गर्म है. कल जेडीयू विधायक सरयू राय ने इसे लेकर नाराजगी जताई थी, वहीं आज बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार को कटघरे में खड़ा किया है. मरांडी ने सीधे तौर पर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर गंभीर आरोप लगाए हैं और CBI जांच की मांग की है. उन्होंने कहा कि डॉ. राजकुमार पर हेल्थमैप और मेडाल जैसी एजेंसियों को अनुचित भुगतान करने के लिए मौखिक दबाव डाला जा रहा था, जबकि AG की ऑडिट रिपोर्ट में पहले ही इस पर आपत्ति जताई जा चुकी थी. उन्होंने दावा किया कि एक दलित समुदाय से आने वाले ईमानदार और प्रतिभाशाली अधिकारी को न सिर्फ अपमानित किया गया, बल्कि बिना स्पष्टीकरण और जवाब का मौका दिए हटाया गया, जो पूरी प्रक्रिया पर सवाल खड़ा करता है.
हेमंत में हिम्मत है तो CBI जांच का आदेश दें
बाबूलाल मरांडी ने एक्स पर लिखा : “रिम्स निदेशक के हवाले से आयी खबरों से पता चल रहा है कि जीबी की बैठक में उनपर हेल्थमैप और मेडाल को अनुचित भुगतान करने का मौखिक दवाब बनाया जा रहा था जबकि एजी की ऑडिट में इसपर आबजेक्शन किया जा चुका है. दलित समुदाय से आने वाले इस प्रतिभावान रिम्स निदेशक को अपमानित एवं प्रताड़ित कर बिना कारण पूछे एवं अपना पक्ष रखने का मौका दिये बगैर अकस्मात् हटाने की यह बड़ी वजह बनी. मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन में अगर हिम्मत है तो इस मामले की जांच सीबीआई से कराने का आदेश देकर सच्चाई को सामने आने दें.”
काली कमाई का हिस्सा उपर तक जाता है
बाबूलाल ने आगे लिखा : “चाहे पथ निर्माण विभाग हो या भवन निर्माण विभाग. ग्रामीण विकास विभाग हो या पेयजल विभाग. इन जैसे सारे “कामकाजी विभागों” में कहने के लिये तो ठेके-पट्टे देने एवं भुगतान करने के लिये विभागीय कमेटियां बनी हुई हैं, लेकिन हेमंत सोरेन के कार्यकाल में ऐसे सारे “कामकाजी कमाऊ” विभागों में ठेकेदारों का चयन, कार्य आवंटन, भुगतान से लेकर कार्य आवंटन के बाद अतिरिक्त काम के नाम पर एकरारनामा की राशि बढ़ाकर बढ़ी हुई राशि का बंदर बॉंट कराने का काम सत्ताधारियों की मिलीभगत से विभागीय सचिवों के मौखिक निर्देश एवं दवाब पर ही संचालित एवं नियंत्रित किया जाता रहा है. और इससे जो काली कमाई होती है उसका हिस्सा “उपर” तक जाता है.“
गलत नहीं करने वालों को बाहर कर दिया जाता है
उन्होंने कहा कि “इस गोरखधंधे में पकड़े जाने पर बेचारे नीचे के पदाधिकारी दंडित हो जाते हैं. जो अधिकारी सचिवों के कहने पर ग़लत काम करने से आनाकानी करते हैं उन्हें रिम्स निदेशक राजकुमार जी की तरह बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है. हेमंत सोरेन जी, ठेके-पट्टे आवंटन और भुगतान में इस संगठित एवं सुनियोजित लूट के गोरखधंधे को बंद कराने के लिये सख्त कदम उठाइये.“

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