Dhanbad: धनबाद रिंग रोड भूमि घोटाला मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने करीब 10 साल बाद बड़ी कार्रवाई करते हुए एक दर्जन अधिकारियों को गिरफ्तार किया है. वर्ष 2015 में रमेश राही द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर के आधार पर यह कार्रवाई की गई है. एसीबी की इस कार्रवाई से लंबे समय से लंबित मामले में नया मोड़ आया है.
आरोप है कि धनबाद रिंग रोड निर्माण के लिए अधिग्रहित की गई भूमि में जमीन अधिग्रहण, नामांतरण और मुआवजा भुगतान की प्रक्रिया में भारी गड़बड़ी की गई. इन अनियमितताओं के जरिए करोड़ों रुपये के घोटाले को अंजाम दिया गया. अनुमान के मुताबिक मुआवजा भुगतान में लगभग 300 करोड़ रुपये तक की गड़बड़ी हुई है.
इस घोटाले को लेकर स्थानीय लोगों ने कई बार आंदोलन भी किया था, लेकिन लंबे समय तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी. एसीबी ने जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की अनुमति मांगी थी. अनुमति मिलने के बाद ही एसीबी ने यह बड़ी कार्रवाई करते हुए अधिकारियों की गिरफ्तारी की है.
एफआईआर दर्ज कराने वाले रमेश राही ने आरोप लगाया था कि धनबाद जिले में भूमि से जुड़े अभिलेखों में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हैं. अंचल, बंदोबस्त और निबंधन कार्यालयों की कार्यशैली के कारण रैयत परेशान हैं, जबकि कुछ लोग अवैध रूप से लाभान्वित हो रहे हैं. राजस्व, निबंधन और भूमि सुधार विभाग से जुड़े अधिकारियों पर लगातार गंभीर आरोप सामने आते रहे हैं.
गौरतलब है कि वर्ष 2014 में मामला उजागर होने के बाद राज्य सरकार ने इसकी जांच पहले निगरानी ब्यूरो और बाद में एसीबी को सौंपी थी. प्रारंभिक जांच में गड़बड़ियों की पुष्टि भी हुई थी. तत्कालीन जिला भू-अर्जन पदाधिकारी उदयकांत पाठक, लाल मोहन नायक समेत कई अधिकारियों को निलंबित किया गया था. निलंबन अवधि के दौरान ही लाल मोहन नायक सेवानिवृत्त हो चुके हैं.
हालांकि, एफआईआर दर्ज करने से पहले कार्रवाई की अनुमति नहीं मिलने के कारण मामला लंबे समय तक अटका रहा. अब अनुमति मिलने के बाद एसीबी ने इस बहुचर्चित भूमि घोटाले में सख्त कदम उठाते हुए गिरफ्तारी की है. मामले में आगे की जांच जारी है और और भी गिरफ्तारियां संभव बताई जा रही हैं.

