नंदीग्राम में भाजपा का रिकॉर्ड, रेजिनगर में भी भगवा लहर, बंगाल की राजनीति में बड़ा उलटफेर
पश्चिम बंगाल उपचुनाव 2026 में भाजपा ने नंदीग्राम और रेजिनगर दोनों सीटों पर शानदार जीत दर्ज कर सियासी हलचल तेज कर दी है. नंदीग्राम में हसीरानी रथ ने 1,22,753 वोटों के अंतर से जीत हासिल की, जबकि रेजिनगर में भी भाजपा की जीत ने राजनीतिक समीकरणों पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

West Bengal By-election: पश्चिम बंगाल के उपचुनाव नतीजों ने राज्य की राजनीति में नई हलचल पैदा कर दी है. भाजपा ने नंदीग्राम और रेजिनगर दोनों सीटों पर शानदार जीत दर्ज कर विरोधियों को बड़ा झटका दिया है. नंदीग्राम में भाजपा उम्मीदवार हसीरानी रथ ने कांग्रेस प्रत्याशी मिलन प्रधान को 1,22,753 वोटों के अंतर से हराया. वहीं, रेजिनगर में भी भाजपा उम्मीदवार शंखारभ सरकार की जीत चर्चा का विषय बनी हुई है. इन नतीजों ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस और कांग्रेस, दोनों के सामने राजनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है. खास बात यह है कि रेजिनगर मुस्लिम बहुल सीट मानी जाती है, जहां भाजपा की जीत ने चुनावी समीकरणों पर नई बहस छेड़ दी है.
नंदीग्राम में भाजपा की रिकॉर्ड जीत, हसीरानी रथ ने कांग्रेस को हराया
पश्चिम बंगाल की नंदीग्राम विधानसभा सीट पर भाजपा उम्मीदवार हसीरानी रथ ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की. उपलब्ध नतीजों के मुताबिक, हसीरानी रथ को कुल 1,64,427 वोट मिले, जबकि कांग्रेस उम्मीदवार मिलन प्रधान को 41,674 वोट हासिल हुए. इस तरह भाजपा उम्मीदवार ने 1,22,753 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की. यह परिणाम नंदीग्राम में भाजपा की मजबूत चुनावी स्थिति को दर्शाता है. हसीरानी रथ, पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के दिवंगत निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की मां हैं. इस जीत के साथ भाजपा ने नंदीग्राम में अपनी राजनीतिक पकड़ को मजबूती देने का दावा किया है. नतीजों ने राज्य में विपक्षी दलों की रणनीति पर भी सवाल खड़े किए हैं.
रेजिनगर में भाजपा की जीत, मुस्लिम बहुल सीट पर बदला चुनावी समीकरण
रेजिनगर विधानसभा सीट के उपचुनाव में भाजपा उम्मीदवार शंखारभ सरकार की जीत ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है. उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, भाजपा ने इस सीट पर 72,710 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की. कुछ शुरुआती रिपोर्टों में जीत का अंतर करीब 75 हजार वोट बताया गया था. रेजिनगर में मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी हिस्सेदारी होने के कारण यह परिणाम खास महत्व रखता है. नतीजों के मुताबिक, हुमायूं कबीर के समर्थन वाले उम्मीदवार दूसरे स्थान पर रहे, जबकि तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार रबीउल तीसरे स्थान पर खिसक गए. कांग्रेस से भी पीछे रहने के टीएमसी के प्रदर्शन ने राज्य में विपक्षी राजनीति और मतदाताओं के रुझान को लेकर नई बहस शुरू कर दी है.
हुमायूं कबीर के इस्तीफे के बाद हुआ उपचुनाव
रेजिनगर सीट पर उपचुनाव की पृष्ठभूमि भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण रही. विधानसभा चुनाव में हुमायूं कबीर ने नउदा और रेजिनगर, दोनों सीटों से चुनाव लड़ा था और दोनों जगह जीत हासिल की थी. इसके बाद उन्होंने रेजिनगर विधानसभा सीट से इस्तीफा दे दिया, जिसके कारण यहां उपचुनाव कराना पड़ा. हुमायूं कबीर पश्चिम बंगाल की राजनीति में अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहे हैं. विधानसभा चुनाव से पहले मुर्शिदाबाद में बाबरी मस्जिद बनाने की घोषणा ने भी राज्य की राजनीति में विवाद खड़ा किया था. ऐसे राजनीतिक माहौल में रेजिनगर के उपचुनाव नतीजे काफी अहम माने जा रहे हैं. भाजपा की जीत ने यह सवाल खड़ा किया है कि क्या राज्य में पारंपरिक मतदाता समीकरण बदल रहे हैं.
नंदीग्राम में पिछले रिकॉर्ड पीछे, भाजपा की जीत बनी चर्चा का विषय
नंदीग्राम में भाजपा की जीत का अंतर भी राजनीतिक विश्लेषण का केंद्र बन गया है. उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के अनुसार, हसीरानी रथ ने 1,22,753 वोटों से जीत हासिल की, जिसे राज्य के बड़े चुनावी अंतर में गिना जा रहा है. रिपोर्टों में इस जीत की तुलना फलता में दर्ज लगभग 1.09 लाख वोटों के अंतर और सुवेंदु अधिकारी की 2016 की करीब 82 हजार वोटों की जीत से की गई है. इन आंकड़ों के आधार पर नंदीग्राम का परिणाम भाजपा के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है. हालांकि, किसी भी रिकॉर्ड की आधिकारिक पुष्टि के लिए चुनाव आयोग के अंतिम आंकड़ों और संबंधित चुनावों के तुलनात्मक विवरण को देखना जरूरी है. फिलहाल इस नतीजे ने राज्य की राजनीतिक चर्चा को नई दिशा दी है.
ममता बनर्जी की टीएमसी को झटका, विपक्ष की रणनीति पर सवाल
नंदीग्राम और रेजिनगर में भाजपा की जीत से पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस के सामने नई राजनीतिक चुनौती खड़ी होती दिख रही है. रेजिनगर में टीएमसी उम्मीदवार का तीसरे स्थान पर रहना खास तौर पर चर्चा में है, क्योंकि इस सीट पर मुस्लिम मतदाताओं की बड़ी आबादी है. वहीं, नंदीग्राम में कांग्रेस उम्मीदवार को भाजपा प्रत्याशी के मुकाबले काफी कम वोट मिले. इन नतीजों से विपक्षी दलों के बीच तालमेल, उम्मीदवार चयन और स्थानीय मुद्दों पर आधारित चुनावी रणनीति को लेकर सवाल उठ सकते हैं. हालांकि, दो सीटों के नतीजों से पूरे राज्य के मतदाताओं के रुझान पर अंतिम निष्कर्ष निकालना जल्दबाजी होगी. आने वाले समय में राजनीतिक दल इन परिणामों का विश्लेषण कर अपनी रणनीति में बदलाव कर सकते हैं.
भाजपा की डबल जीत से बंगाल की राजनीति में नई बहस
नंदीग्राम और रेजिनगर में भाजपा की जीत को राज्य की राजनीति में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम के रूप में देखा जा रहा है. दोनों सीटों के नतीजों ने भाजपा कार्यकर्ताओं में उत्साह बढ़ाया है, वहीं तृणमूल कांग्रेस, कांग्रेस और वामदलों के प्रदर्शन पर चर्चा तेज कर दी है. रेजिनगर में भाजपा की सफलता विशेष रूप से इसलिए ध्यान खींच रही है, क्योंकि इसे मुस्लिम बहुल क्षेत्र बताया जाता है. दूसरी ओर, नंदीग्राम में बड़े अंतर से मिली जीत भाजपा के लिए राजनीतिक संदेश के तौर पर पेश की जा रही है. फिर भी, इन नतीजों का व्यापक प्रभाव समझने के लिए मतदान प्रतिशत, बूथवार आंकड़ों और पिछले चुनावों से तुलना करना जरूरी होगा. फिलहाल बंगाल की राजनीति में इन दोनों सीटों की जीत ने नई बहस छेड़ दी है.

