फर्जी पहचान के सहारे रह रहे थे बांग्लादेशी, अहमदाबाद में 300 संदिग्ध हिरासत में
गुजरात के अहमदाबाद में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ चलाए गए अभियान में बड़ा खुलासा हुआ है. अहमदाबाद क्राइम ब्रांच और अन्य जांच एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई में अब तक 166 बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान की जा चुकी है.

Gujrat: गुजरात के अहमदाबाद में अवैध रूप से रह रहे बांग्लादेशी नागरिकों के खिलाफ चलाए गए अभियान में बड़ा खुलासा हुआ है. अहमदाबाद क्राइम ब्रांच और अन्य जांच एजेंसियों की संयुक्त कार्रवाई में अब तक 166 बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान की जा चुकी है. इसके अलावा 130 से अधिक संदिग्ध लोगों से पूछताछ जारी है. अधिकारियों के अनुसार, शहर के विभिन्न इलाकों में छापेमारी कर करीब 300 संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है. शुरुआती जांच में सामने आया है कि कई लोग मजदूरी के बहाने भारत आए और बाद में फर्जी दस्तावेज तैयार कर शहर में बस गए. मामले में अवैध घुसपैठ, फर्जी पहचान पत्र, वित्तीय लेन-देन और संगठित नेटवर्क की संभावित भूमिका की जांच की जा रही है. जांच एजेंसियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे हो सकते हैं.
166 बांग्लादेशी नागरिकों की हुई पहचान
अहमदाबाद क्राइम ब्रांच के अनुसार, अब तक 166 लोगों की पहचान बांग्लादेशी नागरिकों के रूप में की जा चुकी है. इनमें 41 पुरुष, 95 महिलाएं और 30 बच्चे शामिल हैं. जांच एजेंसियों का कहना है कि ये लोग लंबे समय से शहर के अलग-अलग इलाकों में रह रहे थे. पहचान की प्रक्रिया के दौरान कई दस्तावेजों और स्थानीय रिकॉर्ड की जांच की गई. अधिकारियों का मानना है कि यह संख्या आगे बढ़ सकती है, क्योंकि अभी भी बड़ी संख्या में संदिग्धों की जांच और पूछताछ जारी है. मामले को राष्ट्रीय सुरक्षा और अवैध प्रवास से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दे के रूप में देखा जा रहा है. प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि कई बांग्लादेशी नागरिक मजदूरी और छोटे-मोटे काम करने के लिए अहमदाबाद पहुंचे थे. समय के साथ उन्होंने स्थानीय स्तर पर पहचान बनाई और शहर में स्थायी रूप से रहने लगे. जांच एजेंसियां यह पता लगाने का प्रयास कर रही हैं कि इन लोगों ने कब और किन माध्यमों से भारत में प्रवेश किया. अधिकारियों के अनुसार, कुछ लोग वर्षों से यहां रह रहे थे और स्थानीय गतिविधियों में शामिल थे. इसी कारण उनकी पहचान करना और वास्तविक नागरिकता का पता लगाना चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है.
फर्जी दस्तावेजों का नेटवर्क जांच के घेरे में
पूरे मामले में सबसे बड़ा सवाल फर्जी दस्तावेजों को लेकर उठ रहा है. क्राइम ब्रांच को कई संदिग्धों के पास से आधार कार्ड और अन्य भारतीय पहचान पत्र मिले हैं. जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इन दस्तावेजों को किसने तैयार किया और इनके पीछे कौन सा नेटवर्क काम कर रहा था. अधिकारियों का मानना है कि बिना किसी संगठित मदद के इतनी बड़ी संख्या में लोगों के लिए भारतीय पहचान पत्र हासिल करना संभव नहीं है. इसलिए दस्तावेज तैयार करने वाले गिरोह और उनके सहयोगियों की तलाश भी तेज कर दी गई है.
महिलाओं के नेटवर्क से जुड़े होने की आशंका
जांच के दौरान कुछ महिलाओं के स्पा सेंटर और देह व्यापार से जुड़े नेटवर्क में शामिल होने की आशंका भी सामने आई है. पुलिस इस पहलू की गंभीरता से जांच कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल सभी पहलुओं पर जांच जारी है और किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले पर्याप्त सबूत जुटाए जा रहे हैं. यदि इन गतिविधियों में संलिप्तता की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी. जांच एजेंसियां मानव तस्करी और अवैध गतिविधियों से जुड़े संभावित लिंक भी खंगाल रही हैं.
पश्चिम बंगाल और बांग्लादेश तक पहुंचता था पैसा
क्राइम ब्रांच की जांच में यह भी सामने आया है कि अहमदाबाद में कमाई गई रकम का एक हिस्सा शहर से बाहर भेजा जाता था. अधिकारियों के अनुसार, कुछ मामलों में पैसा पश्चिम बंगाल के जरिए और कुछ मामलों में सीधे बांग्लादेश तक पहुंचाया जाता था. इसके लिए मोबाइल ऐप्स और पारंपरिक आंगड़िया नेटवर्क का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है. अब जांच एजेंसियां इन वित्तीय लेन-देन की विस्तृत जांच कर रही हैं. उद्देश्य यह पता लगाना है कि धन किसके पास पहुंच रहा था और इसके पीछे कोई बड़ा संगठित नेटवर्क तो सक्रिय नहीं था. अभी तक करीब 300 संदिग्ध लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है. इनमें से 166 लोगों की पहचान बांग्लादेशी नागरिकों के रूप में हुई है, जबकि 130 से अधिक अन्य लोगों की पहचान और दस्तावेजों की जांच जारी है. अधिकारियों का मानना है कि पूछताछ आगे बढ़ने के साथ और भी महत्वपूर्ण जानकारियां सामने आ सकती हैं. फिलहाल क्राइम ब्रांच और अन्य एजेंसियां संयुक्त रूप से कार्रवाई कर रही हैं. जांच के अगले चरण में दस्तावेज तैयार करने वाले नेटवर्क, वित्तीय लेन-देन और अवैध प्रवास के पूरे तंत्र की पड़ताल की जाएगी.

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