MMDR Act पर बाबूलाल मरांडी का JMM-कांग्रेस पर निशाना, बोले- जनता को गुमराह कर रहा गठबंधन
MMDR एक्ट में संशोधन को लेकर झारखंड में सियासत तेज हो गई है. भाजपा नेता बाबूलाल मरांडी ने JMM-कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि राज्य सरकारें अब केंद्र की अनुमति के बिना खनिजों पर अतिरिक्त सेस नहीं लगा सकेंगी.

Ranchi: झारखंड में MMDR एक्ट में संशोधन को लेकर सियासी घमासान तेज हो गया है. भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सोमवार को प्रेस वार्ता कर झारखंड सरकार और इंडिया गठबंधन के नेताओं पर जमकर निशाना साधा. उन्होंने आरोप लगाया कि JMM और कांग्रेस संसद में संशोधन विधेयक पर सार्थक चर्चा करने के बजाय हंगामा करते रहे और अब राज्य में इसे राजनीतिक मुद्दा बनाया जा रहा है. मरांडी ने कहा कि संशोधन के तहत राज्य सरकारें केंद्र की अनुमति के बिना खनिजों पर अतिरिक्त टैक्स या सेस नहीं लगा सकेंगी. उन्होंने झारखंड में लगाए गए अतिरिक्त सेस को उद्योगों और कारोबारियों पर बढ़ते बोझ का कारण बताया. साथ ही उन्होंने JPSC-JSSC छात्र आंदोलन को लेकर भी राज्य सरकार पर गंभीर आरोप लगाए.
MMDR संशोधन को लेकर बाबूलाल मरांडी ने विपक्ष पर साधा निशाना
भाजपा प्रदेश कार्यालय के उपाध्याय सभागार में आयोजित प्रेस वार्ता में बाबूलाल मरांडी ने कहा कि 13 अगस्त को संसद में MMDR संशोधन विधेयक पारित हुआ है. उन्होंने आरोप लगाया कि कांग्रेस, JMM और इंडिया गठबंधन के सांसदों ने विधेयक पर गंभीर चर्चा करने के बजाय सदन में हंगामा किया. मरांडी के मुताबिक, अगर विपक्षी सांसद चर्चा में हिस्सा लेते तो संशोधन के प्रावधानों को बेहतर तरीके से समझ सकते थे. उन्होंने कहा कि यह कानून सिर्फ झारखंड के लिए नहीं, बल्कि पूरे देश के लिए लागू होगा. ओडिशा, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, राजस्थान और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में खनिज संसाधन मौजूद हैं. ऐसे में केवल झारखंड को लेकर इसका विरोध करना उचित नहीं है. उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देकर जनता को भ्रमित करने की कोशिश कर रहा है.
केंद्र की अनुमति के बिना अतिरिक्त सेस लगाने पर रोक
बाबूलाल मरांडी ने कहा कि MMDR एक्ट में सीमित संशोधन किया गया है और इसके तहत राज्यों द्वारा खनिजों पर लगाए जाने वाले अतिरिक्त टैक्स या सेस को लेकर केंद्र की अनुमति का प्रावधान किया गया है. उन्होंने दावा किया कि झारखंड सरकार ने खनिजों पर अतिरिक्त सेस लगाकर कारोबारियों और उद्योगों की लागत बढ़ा दी थी. मरांडी के अनुसार, लौह अयस्क पर पहले 100 रुपये प्रति टन सेस लगाया गया, जिसे बाद में बढ़ाकर 400 और फिर 600 रुपये प्रति टन किया गया. इसी तरह कोयले पर 100 रुपये प्रति टन सेस को बढ़ाकर 250 और फिर 450 रुपये प्रति टन तक किया गया. भाजपा नेता ने कहा कि इससे झारखंड से खनिज खरीदने वाले उद्योगों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ा और राज्य के खनिज दूसरे राज्यों की तुलना में महंगे हो गए. उनके मुताबिक, संशोधन का उद्देश्य इसी तरह के अतिरिक्त वित्तीय बोझ को नियंत्रित करना है.
राज्यों की खनिज आय बढ़ने का बाबूलाल ने दिया आंकड़ा
प्रेस वार्ता के दौरान बाबूलाल मरांडी ने खनिज राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी को लेकर भी आंकड़े पेश किए. उन्होंने कहा कि वर्ष 2014-15 से पहले खनिज राजस्व में राज्यों की हिस्सेदारी करीब 60.24 प्रतिशत थी, जबकि केंद्र को 39.76 प्रतिशत हिस्सा मिलता था. उनके मुताबिक, अब राज्यों की हिस्सेदारी बढ़कर 88.53 प्रतिशत हो गई है और केंद्र की हिस्सेदारी 11.47 प्रतिशत है. मरांडी ने कहा कि वर्ष 2014-15 में राज्यों को खनिज और रॉयल्टी से करीब 25,206 करोड़ रुपये प्राप्त हुए थे, जबकि 2025-26 में यह राशि बढ़कर करीब 1.14 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गई. प्रेस वार्ता में पेश किए गए एक अन्य आंकड़े में उन्होंने राशि 1,45,490 करोड़ रुपये बताई. उन्होंने कहा कि इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि केंद्र सरकार राज्यों के खनिज राजस्व को कम नहीं कर रही है, बल्कि उनकी आय बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है.
झारखंड की खनन व्यवस्था पर भी उठाए सवाल
बाबूलाल मरांडी ने झारखंड की खनन व्यवस्था और खदानों की नीलामी को लेकर भी राज्य सरकार पर सवाल उठाए. उन्होंने ओडिशा का उदाहरण देते हुए कहा कि वहां पिछले छह वर्षों में 35 नई खदानें शुरू हुई हैं और इससे राज्य को करीब 87 हजार करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ. इसके विपरीत उन्होंने दावा किया कि झारखंड में पिछले छह वर्षों में नीलाम की गई चार खदानों में अब तक किसी में भी उत्पादन शुरू नहीं हुआ है. भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि राज्य में अवैध खनन भी बड़े पैमाने पर हो रहा है. उनके अनुसार, अवैध तरीके से निकाला गया कोयला और लौह अयस्क कई फैक्ट्रियों तक पहुंच रहा है, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान हो रहा है. उन्होंने राज्य सरकार से खनन व्यवस्था में पारदर्शिता और प्रभावी कार्रवाई की मांग की.
JPSC-JSSC छात्र आंदोलन को लेकर सरकार पर निशाना
बाबूलाल मरांडी ने प्रेस वार्ता में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहे छात्र आंदोलन का भी मुद्दा उठाया. उन्होंने कहा कि युवा पिछले कई दिनों से धरना और भूख हड़ताल कर रहे हैं और भर्ती परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों की जांच की मांग कर रहे हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार छात्रों के इन सवालों का जवाब देने के बजाय MMDR संशोधन को मुद्दा बनाकर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है. मरांडी ने JSSC मामले को लेकर लगाए जा रहे गंभीर आरोपों का भी जिक्र किया और कहा कि सरकार को पूरे मामले में स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए. उन्होंने कहा कि युवाओं के बीच परीक्षा व्यवस्था और भर्ती प्रक्रिया को लेकर जो सवाल उठ रहे हैं, उनका जवाब सरकार को देना चाहिए.
132 करोड़ रुपये के बकाये पर सरकार से मांगा हिसाब
बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार की ओर से बताए जा रहे 132 करोड़ रुपये के बकाये को लेकर भी सवाल उठाया. उन्होंने सरकार को चुनौती देते हुए कहा कि इस राशि का पूरा हिसाब जनता के सामने रखा जाना चाहिए. सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि बकाया किस वर्ष का है और यह पैसा किस काम के लिए था. उन्होंने कहा कि इस मामले में पारदर्शिता के लिए सरकार को अखबारों में विज्ञापन जारी कर पूरी जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए. मरांडी के मुताबिक, इससे जनता के सामने वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी. उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि वह वास्तविक समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए राजनीतिक मुद्दों को आगे कर रही है. प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा प्रदेश प्रवक्ता मृत्युंजय शर्मा समेत पार्टी के अन्य नेता भी मौजूद रहे.

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