ममता बनर्जी को एक और झटका! राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने दिया इस्तीफा, TMC में बढ़ी सियासी हलचल
तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक बार फिर बड़ा राजनीतिक झटका लगा है. पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी की करीबी मानी जाने वाली राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उनके इस्तीफे के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं.

तृणमूल कांग्रेस (TMC) को एक बार फिर बड़ा राजनीतिक झटका लगा है. पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी की करीबी मानी जाने वाली राज्यसभा सांसद सुष्मिता देव ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. उनके इस्तीफे के बाद पश्चिम बंगाल की राजनीति में नई चर्चाएं शुरू हो गई हैं. हालांकि, अभी तक उनके इस्तीफे के पीछे की आधिकारिक वजह सामने नहीं आई है, लेकिन इसे पार्टी के भीतर बढ़ते असंतोष से जोड़कर देखा जा रहा है. सुष्मिता देव लंबे समय से टीएमसी का प्रमुख चेहरा रही हैं और राष्ट्रीय स्तर पर पार्टी की ओर से सक्रिय भूमिका निभाती रही हैं. ऐसे में उनका इस्तीफा पार्टी नेतृत्व के लिए चिंता का विषय माना जा रहा है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस घटनाक्रम का असर आने वाले दिनों में पार्टी की रणनीति और संगठनात्मक स्थिति पर पड़ सकता है.
चुनावी झटकों के बाद बढ़ा असंतोष, नेताओं का लगातार पलायन
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में सत्ता गंवाने के बाद से तृणमूल कांग्रेस के भीतर असंतोष की खबरें लगातार सामने आ रही हैं. पिछले कुछ समय में कई नेताओं ने पार्टी नेतृत्व से दूरी बनाई है और संगठन छोड़ने का फैसला किया है. स्थानीय स्तर से लेकर राष्ट्रीय राजनीति तक टीएमसी को कई झटके लग चुके हैं. पार्टी के भीतर चल रही खींचतान अब खुलकर सामने आने लगी है, जिससे संगठन की एकजुटता पर सवाल उठ रहे हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि लगातार हो रहे इस्तीफों ने पार्टी की स्थिति को कमजोर किया है. सुष्मिता देव का इस्तीफा भी इसी कड़ी का हिस्सा माना जा रहा है. इससे पहले भी कई वरिष्ठ नेता पार्टी छोड़ चुके हैं, जिससे ममता बनर्जी के सामने संगठन को एकजुट बनाए रखने की चुनौती और बढ़ गई है.
बिखराव की चर्चाओं के बीच सांसदों में भी बढ़ी नाराजगी
टीएमसी में बढ़ते असंतोष को लेकर विपक्ष लगातार पार्टी पर निशाना साध रहा है. राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि पार्टी के कई सांसद भी नेतृत्व की कार्यशैली से नाराज हैं. बागी नेताओं का दावा है कि लोकसभा में पार्टी के कई सांसद अलग गुट बनाने की तैयारी में हैं. हालांकि इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन लगातार सामने आ रही खबरों ने टीएमसी के भीतर की स्थिति को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं. पार्टी नेतृत्व फिलहाल स्थिति को संभालने की कोशिश में जुटा है. राजनीतिक पर्यवेक्षकों का मानना है कि यदि असंतोष का यह दौर जारी रहा तो आने वाले समय में पार्टी को और चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. सुष्मिता देव का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब संगठन पहले से ही कई मोर्चों पर दबाव झेल रहा है.
NDA में जाने की अटकलें, बागी नेताओं के दावों से बढ़ी चर्चा
टीएमसी के भीतर जारी उठापटक के बीच कुछ बागी नेताओं ने दावा किया है कि पार्टी के कई सांसद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का समर्थन करने के पक्ष में हैं. इससे पहले पार्टी की वरिष्ठ नेता रहीं काकोली घोष दस्तीदार ने भी सांसदों के एक बड़े समूह के अलग होने की संभावना जताई थी. बागी गुट का दावा है कि कई सांसद संसद में अलग पहचान और व्यवस्था की मांग कर चुके हैं. हालांकि, इन दावों को लेकर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है. राजनीतिक हलकों में यह चर्चा जरूर तेज हो गई है कि आने वाले दिनों में टीएमसी के भीतर और बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं. फिलहाल पार्टी नेतृत्व की ओर से स्थिति पर कोई विस्तृत प्रतिक्रिया नहीं दी गई है, लेकिन सियासी घटनाक्रम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं.


