खाड़ी में तनाव के बीच भारत को राहत, 80 हजार टन तेल लेकर ‘जग लाडकी’ सुरक्षित पहुंचा
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बीच 80,886 टन कच्चा तेल लेकर ‘जग लाडकी’ मुंद्रा पोर्ट पहुंच गया है, लेकिन संकट अभी खत्म नहीं हुआ. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में अब भी 24 भारतीय जहाज और सैकड़ों नाविक फंसे हैं, जिससे भारत की तेल सप्लाई पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है.

मिडिल ईस्ट में जारी सैन्य तनाव के बीच भारत के लिए आंशिक राहत की खबर सामने आई है. भारतीय ध्वज वाला कच्चे तेल का टैंकर ‘जग लाडकी’ सुरक्षित रूप से मुंद्रा पोर्ट पहुंच गया है. इस जहाज में करीब 80,886 मीट्रिक टन कच्चा तेल लदा था, जो भारत की ऊर्जा आपूर्ति के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. हालांकि इस राहत के बावजूद स्थिति पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और फारस की खाड़ी में अब भी कई भारतीय जहाज फंसे हुए हैं. अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते टकराव ने इस रणनीतिक समुद्री मार्ग को बेहद संवेदनशील बना दिया है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति, शिपिंग रूट और भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर सीधा असर पड़ रहा है.
एक हफ्ते में चार जहाज लौटे, लेकिन संकट बरकरार
पिछले एक सप्ताह में ‘जग लाडकी’ समेत चार भारतीय टैंकर सुरक्षित देश पहुंचने में सफल रहे हैं. इससे पहले ‘शिवालिक’, ‘नंदा देवी’ और ‘जग प्रकाश’ भी भारतीय बंदरगाहों तक पहुंचे थे. इन जहाजों की वापसी यह दिखाती है कि जोखिम के बावजूद सीमित स्तर पर शिपिंग मूवमेंट जारी है. हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह राहत अस्थायी है, क्योंकि समुद्री मार्ग पूरी तरह सुरक्षित नहीं हुआ है और हर यात्रा अब जोखिम और रणनीतिक मंजूरी पर निर्भर हो गई है.
24 भारतीय जहाज अब भी फंसे
मौजूदा हालात में फारस की खाड़ी क्षेत्र में अब भी 24 भारतीय ध्वज वाले जहाज फंसे हुए हैं. इनमें से अधिकांश स्ट्रेट ऑफ होर्मुज के पश्चिमी हिस्से में मौजूद हैं. इन जहाजों पर 600 से अधिक भारतीय नाविक सवार हैं. इनमें एलपीजी, एलएनजी, कच्चे तेल, केमिकल और कंटेनर जहाज शामिल हैं. कुछ जहाज बंदरगाहों पर रुके हैं, जबकि कई को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं मिल रही है. यह स्थिति भारत के लिए न केवल आर्थिक बल्कि मानवीय चिंता का विषय भी बन गई है.
होर्मुज पर कड़ा नियंत्रण
स्ट्रेट ऑफ होर्मुज इस समय वैश्विक तनाव का केंद्र बन गया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की सख्त जांच की जा रही है. ईरान अब केवल उन्हीं जहाजों को गुजरने दे रहा है जिनका अमेरिका या उसके सहयोगियों से कोई संबंध नहीं है. जहाज के मालिकाना हक, कार्गो और संचालन की गहन जांच के बाद ही अनुमति दी जा रही है. इस वजह से बड़ी संख्या में टैंकर इस क्षेत्र में फंसे हुए हैं, जिससे वैश्विक सप्लाई चेन पर असर साफ दिख रहा है.
भारत के लिए बढ़ा खतरा: तेल सप्लाई और कीमतों पर असर
इस संकट का सीधा असर भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर पड़ सकता है, क्योंकि देश अपनी बड़ी तेल जरूरतें मिडिल ईस्ट से पूरी करता है. जहाजों की देरी और जोखिम के कारण बीमा लागत और ट्रांसपोर्ट खर्च बढ़ रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर यह स्थिति लंबी चली, तो तेल की कीमतों में तेजी और सप्लाई में बाधा आ सकती है. ऐसे में भारत को वैकल्पिक स्रोतों और मार्गों पर भी विचार करना पड़ सकता है.

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