ईरान से आर-पार की जंग में अमेरिका, खाड़ी में US आर्मी उतारा; क्या शुरू होगा जमीनी हमला?
United States और Iran के बीच तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. खाड़ी में अमेरिकी सेना की भारी तैनाती और 82nd Airborne व Marines की मूवमेंट से जमीनी हमले की आशंका तेज हो गई है. सीजफायर प्लान ठुकराने के बाद हालात और गंभीर हो गए हैं.


ईरान-इजरायल-अमेरिका की जंग 26वें दिन पहुंच चुकी है. अमेरिका ने खाड़ी में अपनी सैन्य तैनाती को और तेज कर दिया है. पेंटागन 82nd Airborne Division के 1,000 से 4,000 पैराट्रूपर्स को मिडिल ईस्ट भेजने की तैयारी में है. पहले से मौजूद 50,000 अमेरिकी सैनिकों के साथ दो एयरक्राफ्ट कैरियर, 200 लड़ाकू विमान और अब Marines की नई यूनिट्स भी रवाना हो चुकी हैं. ट्रंप प्रशासन एक तरफ ईरान को 15 सूत्रीय सीजफायर प्लान भेजकर बातचीत की पेशकश कर रहा है, तो दूसरी तरफ जमीनी ऑपरेशन के विकल्प खुले रखे जा रहे हैं. ईरान ने प्लान ठुकरा दिया है और होर्मुज स्ट्रेट पर माइंस बिछा दिए हैं. खार्ग आइलैंड पर भी ईरानी सेना ने ‘डेथ ट्रैप्स’ तैयार कर लिए हैं. जंग अब ऐसे मोड़ पर है जहां अमेरिका दबाव बढ़ा रहा है, लेकिन ईरान भी झुकने को तैयार नहीं.
US की भारी तैनाती: 82nd Airborne और Marines रवाना
अमेरिकी सेना ने 82nd Airborne Division के 1,000 से 4,000 सैनिकों को मिडिल ईस्ट भेजने का फैसला कर लिया है. ये एलीट पैराट्रूपर्स 18 घंटे के अंदर कहीं भी उतर सकते हैं. साथ ही USS Boxer Amphibious Ready Group के साथ 2,000-5,000 Marines और sailors भी खाड़ी पहुंच रहे हैं. CENTCOM के मुताबिक क्षेत्र में पहले से 50,000 अमेरिकी सैनिक तैनात हैं. नई तैनाती का मकसद होर्मुज स्ट्रेट को सुरक्षित करना और जरूरत पड़ी तो ईरानी तट पर ऑपरेशन चलाना है. Pentagon सूत्रों ने Reuters को बताया कि ये तैनाती सिर्फ दबाव नहीं, बल्कि ग्राउंड ऑप्शन को खुला रखने के लिए है.
ट्रंप का 15-पॉइंट प्लान: ईरान ने साफ इनकार कर दिया
ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान के जरिए ईरान को 15 सूत्रीय सीजफायर प्लान भेजा है. इसमें होर्मुज स्ट्रेट खोलना, न्यूक्लियर प्रोग्राम छोड़ना और प्रॉक्सी ग्रुप्स पर लगाम लगाना शामिल है. ट्रंप ने इसे ‘प्रोडक्टिव टॉक्स’ बताया और कहा कि ईरान डील चाहता है. लेकिन ईरान ने प्लान को ‘अनरिजनेबल’ बताते हुए ठुकरा दिया. तेहरान की मांग है – अमेरिकी सेना की पूर्ण वापसी, इजरायल पर लगाम और मुआवजा. ईरानी अधिकारी कह रहे हैं कि ट्रंप की बातें प्रोपगैंडा हैं. इस बीच अमेरिका ने ईरान को चेतावनी दी है कि अगर डील नहीं हुई तो ‘हिट हार्डर’ होगा.
होर्मुज स्ट्रेट और खार्ग आइलैंड: ईरान ने ‘डेथ ट्रैप’ तैयार किए
ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट में करीब 12 माइंस बिछा दिए हैं. Maham-3 और Maham-7 टाइप की ये माइंस शिप्स को टारगेट करने में सक्षम हैं. साथ ही खार्ग आइलैंड (ईरान के 90% तेल निर्यात का केंद्र) पर MANPADS, अतिरिक्त सैनिक और ट्रैप्स लगा दिए गए हैं. अमेरिका के लिए ये स्ट्रेट जीवन-रेखा है. CENTCOM ने पहले ही 44 ईरानी माइन-लेइंग वेसल्स नष्ट कर दिए हैं. अब चर्चा है कि Marines की amphibious क्षमता का इस्तेमाल खार्ग आइलैंड या स्ट्रेट को कंट्रोल करने के लिए हो सकता है. ईरान ने साफ कहा – कोई भी हमला भारी कीमत चुकाएगा.
जमीनी हमले की तैयारी? एक्सपर्ट्स की चेतावनी
82nd Airborne और Marines की तैनाती जमीनी ऑपरेशन की तैयारी का संकेत दे रही है. Reuters और CNN के सूत्रों ने बताया कि Pentagon ने ईरान के अंदर ग्राउंड फोर्स भेजने के प्लान तैयार कर लिए हैं. लेकिन जोखिम बहुत बड़ा है. ईरान की मिसाइल-ड्रोन क्षमता, हिजबुल्लाह-हूती जैसे प्रॉक्सी और क्षेत्रीय अस्थिरता अमेरिका के लिए बड़ी चुनौती हैं. कुछ एक्सपर्ट्स मानते हैं कि ये तैनाती सिर्फ दबाव बनाने के लिए है, जबकि दूसरे कह रहे हैं कि अगर होर्मुज नहीं खुला तो लिमिटेड ग्राउंड ऑपरेशन अनिवार्य हो जाएगा. ट्रंप ने अभी तक ‘बूट्स ऑन ग्राउंड’ को पूरी तरह खारिज नहीं किया.
जंग का 26वां दिन: हमले और जवाबी कार्रवाई जारी
अमेरिका-इजरायल ने ईरान के मिसाइल बेस, एयरबेस और इंडस्ट्रियल जोन पर सैकड़ों हमले किए हैं. IDF ने 600 से ज्यादा स्ट्राइक्स की बात कही है. ईरान ने जवाब में इजरायल और खाड़ी देशों पर मिसाइल-ड्रोन दागे. Bushehr न्यूक्लियर साइट के पास दूसरा हमला होने पर रूस ने इसे ‘न्यूक्लियर डिजास्टर’ की कोशिश बताया. दोनों तरफ हताहत बढ़ रहे हैं. अमेरिका के 290 सैनिक घायल हो चुके हैं. ईरान का दावा है कि उसने US F-18 जेट गिराया है, जिसे अमेरिका ने खारिज कर दिया.
ग्लोबल असर और आगे का सिनेरियो
तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं. शिपिंग रूट प्रभावित हो रहे हैं. भारत समेत कई देशों को ईरानी क्रूड पर निर्भरता का खतरा है. तीन बड़े सिनेरियो हैं – सीजफायर और डील, लिमिटेड ग्राउंड ऑपरेशन (होर्मुज/खार्ग) या पूर्ण जंग. ट्रंप ने 9 अप्रैल का अल्टीमेटम दिया था, लेकिन अब बातचीत पर जोर है. फिर भी तैनाती जारी है. दुनिया इस जंग को नजदीक से देख रही है. अमेरिका आर-पार की तैयारी में है, लेकिन ईरान भी अड़ा हुआ है. अगले कुछ दिन तय करेंगे कि बातचीत कामयाब होती है या जमीनी हमला शुरू हो जाता है.

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