Ranchi: झारखंड कैबिनेट ने राज्य कर्मचारियों और उनके परिवारों के लिए एक अहम फैसला लिया है. सरकार ने राज्य कर्मचारी स्वास्थ्य बीमा योजना से जुड़े कई नियमों में बदलाव और नई व्यवस्थाओं को मंजूरी दी है, जिससे इलाज कराना अब पहले से ज्यादा आसान होगा. इस फैसले से सेवानिवृत्त कर्मचारी, कार्यरत कर्मचारी और उनके आश्रित सीधे तौर पर लाभान्वित होंगे. खास तौर पर गंभीर बीमारियों और महंगे इलाज को ध्यान में रखते हुए यह कदम उठाया गया है. नए फैसले के अनुसार, सरकारी कर्मचारियों को इलाज के दौरान जो अतिरिक्त खर्च आता है, उसका भुगतान राज्य सरकार करेगी. यह राशि झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी के फंड से दी जाएगी. अस्पताल में भर्ती होने से लेकर इलाज पूरा होने तक की प्रक्रिया को सरल बनाने पर जोर दिया गया है. सरकार का कहना है कि इलाज के दौरान पैसे की चिंता न हो, इसलिए यह व्यवस्था की गई है. इससे कर्मचारियों को समय पर इलाज मिल सकेगा.
गंभीर बीमारियों में विशेष सुविधा
कैंसर, हार्ट, किडनी, न्यूरो और दूसरी गंभीर बीमारियों के इलाज के लिए अलग व्यवस्था की गई है. ऐसे मामलों में ओपीडी, जांच, भर्ती और सर्जरी तक की सुविधा तय नियमों के अनुसार दी जाएगी. इलाज का खर्च तय दरों पर सरकार वहन करेगी. अगर इलाज राज्य से बाहर किसी बड़े अस्पताल में कराना जरूरी होगा, तो वहां भी तय नियमों के अनुसार भुगतान किया जाएगा. जरूरत पड़ने पर पहले इलाज और बाद में भुगतान की सुविधा भी मिलेगी.
बड़े अस्पतालों में इलाज की मंजूरी
कुछ चुनिंदा बड़े और प्रतिष्ठित अस्पतालों में इलाज की अनुमति दी गई है, जहां आमतौर पर महंगा इलाज होता है. इन अस्पतालों में इलाज होने पर सरकार तय दरों के अनुसार खर्च का भुगतान करेगी. इससे मरीजों को बेहतर इलाज के लिए भटकना नहीं पड़ेगा. सरकार जरूरत के अनुसार इस सूची में बदलाव भी कर सकती है, ताकि समय के साथ नई जरूरतों को शामिल किया जा सके.
सेमी प्राइवेट और प्राइवेट वार्ड की सुविधा
योजना के तहत सेमी प्राइवेट वार्ड में इलाज की सुविधा दी जाएगी. अगर किसी आपात स्थिति में प्राइवेट वार्ड लेना पड़े, तो उसका खर्च भी तय सीमा तक मान्य होगा. हालांकि सामान्य हालात में तय नियमों का पालन करना होगा. आपातकाल या दुर्घटना की स्थिति में मरीज को पहले इलाज मिलेगा, कागजी प्रक्रिया बाद में पूरी की जाएगी. इलाज के लिए बाहर जाने पर कर्मचारी और उनके एक सहायक को यात्रा भत्ता दिया जाएगा. यह भत्ता सरकारी नियमों के अनुसार होगा. इलाज के दौरान ठहरने से जुड़ा खर्च भी तय सीमा तक मान्य किया गया है. इससे दूर के शहरों या दूसरे राज्यों में इलाज कराने वाले कर्मचारियों को राहत मिलेगी.
बीमा कंपनी और टीपीए की भूमिका
अगर किसी कारण से बीमा कंपनी सेवा नहीं दे पाती है, तो इलाज की व्यवस्था टीपीए के माध्यम से की जाएगी. इस स्थिति में भी इलाज में कोई रुकावट नहीं आएगी. सरकार ने यह साफ किया है कि मरीज को किसी भी हाल में परेशानी नहीं होनी चाहिए. पूरी व्यवस्था की निगरानी झारखंड स्टेट आरोग्य सोसाइटी करेगी.

