झालमुड़ी के बाद माछ-भात की एंट्री, फूड फाइट से बदला पश्चिम बंगाल में चुनावी नैरेटिव!
बंगाल चुनाव में फूड फाइट ने नया राजनीतिक नैरेटिव बना दिया है. पीएम मोदी की झालमुड़ी फोटो के बाद चंपाई सोरेन की माछ-भात खाते तस्वीर वायरल हो गई, जिससे चुनावी माहौल और गरमा गया है.

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव अब सिर्फ भाषणों और रैलियों की लड़ाई नहीं रह गया है, बल्कि यह सांस्कृतिक प्रतीकों और विजुअल नैरेटिव की जंग भी बन चुका है. पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की झारग्राम में झालमुड़ी खाते तस्वीर ने पूरे देश का ध्यान खींचा, और अब झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन की माछ-भात खाते तस्वीर सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है. चंपाई सोरेन ने माछ-भात का आनंद लेते हुए तस्वीर पोस्ट कर ममता बनर्जी के ‘मीट-मछली-अंडा बंद’ वाले आरोप का सीधा जवाब दे दिया. बंगाल की राजनीति में भोजन हमेशा से पहचान और संस्कृति का अहम हिस्सा रहा है. ऐसे में इन तस्वीरों को सिर्फ सामान्य फोटो नहीं, बल्कि चुनावी संदेश के तौर पर देखा जा रहा है. सवाल यह है कि क्या यह सिर्फ एक सहज पल है, या फिर वोटरों से भावनात्मक जुड़ाव बनाने की सोची-समझी रणनीति? 23 और 29 अप्रैल को मतदान होने वाले इन चुनावों में यह ‘फूड फाइट’ नैरेटिव की जंग को और तेज कर रही है.
मोदी का झालमुड़ी कनेक्ट
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झारग्राम में रैली के बीच अचानक रुककर स्थानीय ठेले से झालमुड़ी मंगवाई और उसे चखते हुए लोगों से बातचीत की. उन्होंने प्याज खाने की पुष्टि करते हुए मजाक भी किया कि ‘दिमाग नहीं खाते’. इस तस्वीर ने तुरंत वायरल होकर पूरे देश का ध्यान खींचा. भाजपा इसे बंगाली संस्कृति से जुड़ाव का संदेश बता रही है, जबकि टीएमसी ने आरोप लगाया कि मोदी का यह ‘अनप्लान्ड स्टॉप’ विपक्षी नेताओं के कार्यक्रम में बाधा बना.
चंपाई सोरेन का माछ-भात जवाब
झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन ने कल शाम एक्स पर माछ-भात खाते अपनी तस्वीर शेयर की. कैप्शन में लिखा- ‘पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार के बीच माछ-भात का आनंद’. इसे ममता बनर्जी के उस बयान का सीधा जवाब माना जा रहा है जिसमें उन्होंने दावा किया था कि भाजपा सत्ता में आई तो बंगाल में मछली-मांस-अंडा प्रतिबंधित कर देगी. सोशल मीडिया पर यह पोस्ट तेजी से वायरल हुई और यूजर्स ने इसे टीएमसी की राजनीति पर तीखा कटाक्ष बताया.
सांस्कृतिक जुड़ाव या चुनावी चाल?
बंगाल चुनाव में ‘झालमुड़ी’ और ‘माछ-भात’ जैसे पकवान अब सिर्फ खाने की चीज नहीं रहे. एक तरफ मोदी का स्नैक ब्रेक तो दूसरी तरफ चंपाई सोरेन का राइस-फिश मॉमेंट – दोनों ही बंगाली पहचान को छूने की कोशिश हैं. झारखंड के मौजूदा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन भी प्रचार के लिए बंगाल पहुंचे थे, लेकिन मोदी के कार्यक्रम के कारण उनका जहरग्राम का हेलीकॉप्टर लैंडिंग नहीं हो पाया. कुल मिलाकर यह रणनीति दिखाती है कि विपक्षी आरोपों को खारिज करने और जनता के दिल में जगह बनाने के लिए भोजन सबसे सरल लेकिन सबसे प्रभावी हथियार बन गया है. 4 मई को नतीजे बताएंगे कि यह दांव कितना कारगर साबित हुआ.

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