14 दिन का जल सत्याग्रह तड़के खत्म! पुलिस ने हटाए आदिवासी किसान, अब गिरफ्तारी के दावे पर छिड़ा विवाद
“केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में चल रहे आदिवासी किसानों के जल सत्याग्रह पर पुलिस ने कार्रवाई की। प्रशासन और आंदोलनकारियों के दावे आमने-सामने हैं।”

मध्य प्रदेश के छतरपुर में केन-बेतवा लिंक परियोजना के विरोध में पिछले 14 दिनों से चल रहा आदिवासी किसानों का जल सत्याग्रह और भूख हड़ताल रविवार तड़के समाप्त हो गया. सुबह-सुबह भारी पुलिस बल आंदोलन स्थल पर पहुंचा और प्रदर्शनकारियों को वहां से हटा दिया. इसके बाद पूरे घटनाक्रम को लेकर नया विवाद शुरू हो गया है. एक ओर आंदोलनकारी पुलिस पर जबरन कार्रवाई और गिरफ्तारी के आरोप लगा रहे हैं, वहीं प्रशासन ने इन दावों को सिरे से खारिज कर दिया है. सुबह 5 बजे क्या हुआ? पुलिस और प्रदर्शनकारियों के दावे अलग-अलग छतरपुर के ग्राम कुपी में वरान नदी किनारे किसान अपनी अधिग्रहित जमीन के उचित मुआवजे और पुनर्वास की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे थे. आंदोलनकारियों का आरोप है कि रविवार सुबह करीब 5 बजे पुलिस ने बड़ी संख्या में पहुंचकर धरना खत्म कराया और कई लोगों को जबरन उठाकर ले गई. हालांकि एडिशनल एसपी आदित्य पटले ने इन आरोपों से इनकार करते हुए कहा कि किसी भी प्रदर्शनकारी को न तो गिरफ्तार किया गया और न ही हिरासत में लिया गया. उनके मुताबिक, प्रदर्शन में शामिल अधिकांश लोग पन्ना जिले के निवासी थे, इसलिए उन्हें सुरक्षित बसों के जरिए उनके गंतव्य के लिए रवाना किया गया. भूख हड़ताल पर बैठे नेता को अस्पताल भेजा गया प्रशासन के अनुसार, आंदोलन का नेतृत्व कर रहे किसान नेता अमित भटनागर पिछले 14 दिनों से लगातार भूख हड़ताल पर थे. उनकी बिगड़ती तबीयत को देखते हुए उन्हें चिकित्सकीय जांच के लिए जिला अस्पताल भेजा गया, ताकि ्वापलस्थ्य को कोई गंभीर खतरा न हो. अधिकारियों का कहना है कि जिस स्थान पर आंदोलन चल रहा था, वहां अंडरब्रिज का निर्माण कार्य जारी है. सुरक्षा कारणों और किसी संभावित दुर्घटना से बचने के लिए प्रदर्शनकारियों को वहां से हटाया गया. आंदोलनकारियों ने लगाए भ्रष्टाचार और साजिश के आरोप आंदोलन की ओर से दिव्या अहिरवार ने एक वीडियो जारी कर दावा किया कि अमित भटनागर रविवार को केन-बेतवा परियोजना में कथित 400 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार का खुलासा करने वाले थे. उनका आरोप है कि इससे पहले ही पुलिस ने कार्रवाई कर आंदोलन को खत्म कर दिया. दिव्या अहिरवार ने मुख्यमंत्री मोहन यादव और जिला प्रशासन पर भी गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि यदि अमित भटनागर या किसी भी आंदोलनकारी को कोई नुकसान पहुंचता है, तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी. फिलहाल मामले को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं. जहां प्रशासन कार्रवाई को सुरक्षा और स्वास्थ्य के मद्देनजर आवश्यक बता रहा है, वहीं आंदोलनकारी इसे अपने आंदोलन को दबाने की कोशिश बता रहे हैं.



