Why Red Flags in Khamenei Funeral: खामेनेई के अंतिम संस्कार में क्यों लहराए गए लाल झंडे? क्या ईरान फिर हथियार उठाने की तैयारी में है
खामेनेई के अंतिम संस्कार में हजारों लोगों के हाथों में लाल झंडे दिखाई दिए, जानिए इन झंडों का क्या मतलब है, इन्हें बदले का प्रतीक क्यों माना जा रहा है और क्या इससे अमेरिका-ईरान संबंधों पर असर पड़ सकता है.

ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में हजारों लोग शामिल हुए. इस दौरान एक चीज़ ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा - हजारों लोगों के हाथों में लहराते लाल झंडे. आमतौर पर शोक सभाओं में काले रंग का इस्तेमाल होता है, लेकिन इस समारोह में लाल झंडों की मौजूदगी ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं. आखिर इन झंडों का क्या मतलब है और क्या यह ईरान की आने वाली रणनीति का संकेत है? विशेषज्ञों का मानना है कि ये लाल झंडे केवल शोक का प्रतीक नहीं, बल्कि बदले की मांग और न्याय की पुकार का संदेश भी माने जा रहे हैं. ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या ईरान अब कूटनीति की जगह फिर से आक्रामक रुख अपना सकता है?
लाल झंडे क्यों बने चर्चा का विषय? जानिए क्या है इसका धार्मिक और राजनीतिक संदेश
तेहरान यूनिवर्सिटी के रिसर्च फेलो मोहम्मद इस्लामी के अनुसार, खामेनेई के समर्थक लाल झंडों के जरिए सरकार से उन लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, जिन्हें वे उनके नेता की मौत के लिए जिम्मेदार मानते हैं. समारोह के दौरान 'Death to America' जैसे नारे भी सुनाई दिए और कुछ प्रदर्शनकारियों ने 'Kill Trump' लिखे पोस्टर और झंडे भी लहराए. इससे साफ संकेत मिलता है कि खामेनेई की मौत के बाद देश में गुस्सा और प्रतिशोध की भावना काफी मजबूत हुई है. विशेषज्ञों के मुताबिक, ईरानी नेतृत्व अंतिम संस्कार के जरिए दुनिया को यह संदेश भी देना चाहता है कि खामेनेई की नीतियां उनके निधन के बाद भी जारी रहेंगी.
क्या अमेरिका-ईरान समझौते पर पड़ेगा असर? बढ़ सकती है क्षेत्रीय तनाव की आशंका
हाल ही में अमेरिका और ईरान के बीच समुद्री सुरक्षा और आर्थिक मुद्दों को लेकर एक समझौता ज्ञापन (MoU) हुआ था. लेकिन खामेनेई की मौत के बाद बने माहौल ने इस प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि नई ईरानी नेतृत्व पर बदले की भावना हावी रहती है, तो अमेरिका के साथ बातचीत की रफ्तार धीमी पड़ सकती है. साथ ही मध्य पूर्व में तनाव बढ़ने की आशंका भी बनी रह सकती है. हालांकि, भविष्य की दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि नई सरकार आंतरिक स्थिरता और विदेश नीति के बीच किस तरह संतुलन बनाती है. फिलहाल अंतिम संस्कार में दिखे लाल झंडों ने यह साफ कर दिया है कि देश के भीतर भावनाएं बेहद तीव्र हैं और आने वाले दिनों में ईरान की रणनीति पर पूरी दुनिया की नजर रहेगी.

