मिडिल ईस्ट जंग का असर भारत के किचन तक: LPG संकट से देश में हाहाकार, झारखंड में एजेंसियों पर लंबी कतारें, होटलों पर संकट
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और होर्मुज स्ट्रेट में सप्लाई बाधित होने का असर अब भारत के LPG बाजार पर दिखने लगा है. देश के कई शहरों में कमर्शियल गैस की कमी से होटल और रेस्टोरेंट प्रभावित हैं, वहीं झारखंड के रांची और धनबाद में गैस एजेंसियों पर लंबी कतारें लग रही हैं.

Ranchi/New Delhi: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव और समुद्री आपूर्ति मार्गों पर बढ़ी भू-राजनीतिक अनिश्चितता का असर अब भारत के किचन तक पहुंच गया है. एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित होने से कई शहरों में होटलों और रेस्टोरेंट के किचन बंद होने की नौबत आ गई है, जबकि घरेलू उपभोक्ताओं को भी लंबी कतारों में खड़ा होना पड़ रहा है. इस संकट का असर झारखंड में भी साफ दिखाई देने लगा है, जहां रांची और धनबाद जैसे शहरों में गैस एजेंसियों के बाहर भीड़ बढ़ गई है और प्रशासन को आपूर्ति व्यवस्था को नियंत्रित करने के लिए नए नियम लागू करने पड़े हैं. राज्य में घरेलू गैस की उपलब्धता बनाए रखने के लिए कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की सप्लाई पर अस्थायी रोक जैसी स्थिति बन गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस संकट की जड़ पश्चिम एशिया में जारी युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य से प्रभावित ऊर्जा आपूर्ति है, जहां से भारत के लिए बड़ी मात्रा में एलपीजी आयात होती है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय तनाव का सीधा असर अब देश के घरेलू बाजार और झारखंड जैसे राज्यों की रोजमर्रा की जिंदगी पर पड़ता दिखाई दे रहा है.
मिडिल ईस्ट तनाव और होर्मुज स्ट्रेट बना संकट की जड़
एलपीजी संकट की मुख्य वजह पश्चिम एशिया में बढ़ा भू-राजनीतिक तनाव माना जा रहा है. ईरान से जुड़े युद्ध और क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई है. यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा आपूर्ति मार्गों में से एक है. भारत अपनी कुल एलपीजी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत आयात करता है और इसमें से करीब 85 से 90 प्रतिशत आयात इसी मार्ग से होकर आता है. ऐसे में सप्लाई चेन में आई बाधा का असर सीधे देश के गैस बाजार पर पड़ा है. विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में हर साल करीब 31 मिलियन टन एलपीजी की खपत होती है, जिसमें अधिकांश हिस्सा घरेलू उपयोग के लिए होता है, जबकि बाकी हिस्सा होटल, रेस्टोरेंट और अन्य व्यवसायिक गतिविधियों में इस्तेमाल होता है.
बड़े शहरों में होटल और रेस्टोरेंट संकट में
देश के कई बड़े शहरों में कमर्शियल एलपीजी की कमी सबसे ज्यादा महसूस की जा रही है. मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और अन्य महानगरों में कई रेस्टोरेंट और होटल गैस की कमी से जूझ रहे हैं. कुछ जगहों पर होटलों ने अपने मेन्यू को सीमित कर दिया है, जबकि कई रेस्टोरेंट ने अस्थायी रूप से किचन बंद करने का फैसला किया है. होटल संगठनों का कहना है कि यदि सप्लाई जल्द सामान्य नहीं हुई तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है. कई होटल संचालक अब गैस की कमी से निपटने के लिए वैकल्पिक व्यवस्था जैसे इंडक्शन स्टोव या पारंपरिक चूल्हों का सहारा लेने लगे हैं. इससे लागत भी बढ़ रही है और संचालन में भी कठिनाई आ रही है.
झारखंड में भी बढ़ी चिंता, एजेंसियों पर लंबी कतारें
इस अंतरराष्ट्रीय संकट की आहट झारखंड में भी महसूस की जा रही है. राजधानी रांची और धनबाद में गैस एजेंसियों के बाहर उपभोक्ताओं की लंबी कतारें देखी जा रही हैं. कई उपभोक्ता सुबह से ही सिलेंडर लेने के लिए एजेंसियों के बाहर इंतजार करते नजर आए. आपूर्ति में देरी और बढ़ती मांग के कारण लोगों में चिंता का माहौल भी बन गया है. कई जगहों पर गैस की होम डिलीवरी प्रभावित होने के कारण लोगों को खुद एजेंसियों या गोदामों तक जाकर सिलेंडर लेना पड़ रहा है. इससे भीड़ और अव्यवस्था की स्थिति बन रही है.
25 दिन बाद मिलेगी दूसरी बुकिंग
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए जिला प्रशासन ने कुछ नए नियम लागू किए हैं. रांची और धनबाद में अब घरेलू गैस सिलेंडर की दूसरी बुकिंग के लिए कम से कम 25 दिनों का अंतराल तय किया गया है. इस फैसले का उद्देश्य पैनिक बुकिंग और जमाखोरी को रोकना बताया जा रहा है. साथ ही गैस कंपनियों को निर्देश दिया गया है कि बुकिंग के बाद दो से तीन दिनों के भीतर सिलेंडर की डिलीवरी सुनिश्चित की जाए. छोटे उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए 2 किलो और 5 किलो वाले छोटे सिलेंडर बिना प्री-बुकिंग के उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी की गई है.
कमर्शियल गैस की कमी से होटल कारोबार प्रभावित
कमर्शियल एलपीजी की कमी का सबसे ज्यादा असर होटल, ढाबा और छोटे खानपान व्यवसायों पर पड़ रहा है. कई होटल संचालकों का कहना है कि एजेंसियों की ओर से मांग के अनुसार गैस की आपूर्ति नहीं हो पा रही है. कुछ छोटे होटल और ठेला संचालक मजबूरी में घरेलू सिलेंडर का उपयोग कर रहे हैं, जिससे घरेलू आपूर्ति पर भी दबाव बढ़ने की आशंका है. उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि यदि कमर्शियल गैस की नियमित आपूर्ति जल्द बहाल नहीं हुई, तो इससे छोटे व्यवसायों को भारी आर्थिक नुकसान हो सकता है. वहीं अधिकारियों का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और जल्द ही आपूर्ति व्यवस्था सामान्य होने की उम्मीद है.

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