जगन्नाथपुर मंदिर न्यास विवाद पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पुरानी समिति भंग; 11 सदस्यीय नई कमेटी संभालेगी व्यवस्था
जगन्नाथपुर मंदिर न्यास विवाद में झारखंड हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. पुरानी समिति भंग कर 11 सदस्यीय नई समिति गठित करने का निर्देश दिया गया है. अगली सुनवाई 7 सितंबर को होगी.


Ranchi: रांची के ऐतिहासिक जगन्नाथपुर मंदिर के प्रबंधन को लेकर लंबे समय से चल रहे विवाद पर झारखंड हाईकोर्ट ने बुधवार को अहम आदेश दिया है. अदालत ने झारखंड राज्य हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड की ओर से पहले गठित न्यास समिति को भंग करते हुए मंदिर के संचालन और प्रबंधन के लिए 11 सदस्यीय नई समिति गठित करने का निर्देश दिया. नई समिति की अध्यक्षता राज्य के महाधिवक्ता रोहितशंकर राय करेंगे. इसमें धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष जयशंकर पाठक और रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री समेत हाईकोर्ट के चार अधिवक्ता और स्व. एनई नाथ के तीन वंशज शामिल होंगे. अदालत के आदेश से मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था को नया ढांचा मिला है. मामले की अगली सुनवाई 7 सितंबर 2026 को होगी.
पुरानी समिति हटाई गई
जगन्नाथपुर मंदिर न्यास समिति को लेकर चल रही कानूनी खींचतान के बीच हाईकोर्ट ने नई व्यवस्था का रास्ता साफ कर दिया है. अदालत ने पहले से गठित समिति को भंग कर मंदिर के प्रबंधन के लिए 11 सदस्यीय समिति बनाने का निर्देश दिया है. नई समिति में प्रशासन, न्यायिक क्षेत्र और मंदिर से जुड़े पारंपरिक पक्ष का प्रतिनिधित्व रखा गया है. महाधिवक्ता रोहितशंकर राय को अध्यक्ष बनाया गया है. उनके अलावा झारखंड राज्य हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड के अध्यक्ष जयशंकर पाठक और रांची के उपायुक्त मंजूनाथ भजंत्री भी समिति का हिस्सा होंगे. हाईकोर्ट के चार अधिवक्ताओं और स्व. एनई नाथ के तीन वंशजों को भी इसमें शामिल किया गया है. इस संरचना का उद्देश्य मंदिर के प्रशासन और संचालन को लेकर लंबे समय से बने विवाद के बीच एक व्यवस्थित व्यवस्था तैयार करना है.
मंदिर के संचालन की संशोधित योजना भी कोर्ट में रखी गई
सुनवाई के दौरान झारखंड राज्य हिंदू धार्मिक न्यास बोर्ड ने मंदिर के प्रबंधन और दैनिक संचालन को लेकर संशोधित योजना अदालत के सामने रखी. बोर्ड की ओर से अधिवक्ता भरत कुमार ने पक्ष रखा. अदालत ने संशोधित योजना को रिकॉर्ड पर लेते हुए मामले की अगली सुनवाई के लिए 7 सितंबर की तारीख तय की है. इसका मतलब है कि नई समिति के गठन के बावजूद मंदिर की प्रशासनिक व्यवस्था से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर न्यायिक निगरानी बनी रहेगी. मंदिर की पूजा व्यवस्था, रखरखाव, प्रशासनिक कामकाज और वित्तीय प्रबंधन जैसे मुद्दों को लेकर आगे की दिशा इस मामले में होने वाली अगली सुनवाई से भी तय हो सकती है.
22 जुलाई को कोर्ट ने खर्च और व्यवस्था को लेकर दिए थे निर्देश
इस मामले में 22 जुलाई की सुनवाई भी महत्वपूर्ण रही थी. उस दौरान अदालत ने मंदिर की नियमित व्यवस्था को बनाए रखने के लिए रांची के उपायुक्त को आवश्यक कदम उठाने का निर्देश दिया था. अदालत ने मंदिर समिति के फंड से हर महीने 30 हजार रुपये नियमित संचालन के लिए उपलब्ध कराने की बात कही थी. साथ ही समिति को अपने साप्ताहिक खर्च का विवरण रांची के उपायुक्त के समक्ष रखने का निर्देश दिया गया था. इन निर्देशों के पीछे मकसद मंदिर में पूजा-पाठ, साफ-सफाई, रखरखाव और दूसरी जरूरी गतिविधियों को बिना व्यवधान जारी रखना था. इस तरह कोर्ट की निगरानी केवल समिति के गठन तक सीमित नहीं रही, बल्कि मंदिर के रोजमर्रा के संचालन और खर्च पर भी बनी हुई है.
7 सितंबर को फिर होगी सुनवाई, नई व्यवस्था पर रहेगी नजर
बुधवार के आदेश के बाद जगन्नाथपुर मंदिर के प्रशासनिक ढांचे में बड़ा बदलाव हो गया है. हालांकि, यह मामला अभी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. अगली सुनवाई में मंदिर के संचालन और प्रबंधन को लेकर बोर्ड की संशोधित योजना पर आगे चर्चा होगी. नई समिति के गठन के साथ अब चुनौती यह होगी कि मंदिर की व्यवस्थाएं सुचारू रूप से चलें और प्रबंधन से जुड़े विवादों का स्थायी समाधान निकले. अदालत ने जिस तरह प्रशासनिक अधिकारियों, अधिवक्ताओं और मंदिर से जुड़े पारंपरिक पक्ष को समिति में जगह दी है, उससे व्यवस्था में अलग-अलग पक्षों की भागीदारी सुनिश्चित करने की कोशिश दिखाई देती है. अब 7 सितंबर की सुनवाई पर नजर रहेगी, जहां अदालत मंदिर की संशोधित प्रबंधन योजना और आगे की प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर अगला रुख स्पष्ट कर सकती है.

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