सास की मौत की खबर सुनकर बहू को सदमा लगा… और देखते ही देखते उसने भी तोड़ दिया दम
घटना झारखंड के देवघर जिले की है, जहां सोनरायठाड़ी प्रखंड अंतर्गत नकटी गांव में बुधवार रात मुंद्रिका देवी के निधन से भीतर तक आहत उनकी बहू उषा देवी को ब्रेन हेमरेज हुआ और आखिरकार उन्होंने भी दुनिया को अलविदा कह दिया.

सास की मौत हुई और जैसे ही यह खबर बहू ने सुनी उसने भी दम तोड़ दिया. घटना झारखंड के देवघर जिले की है, जहां सोनरायठाड़ी प्रखंड अंतर्गत नकटी गांव में बुधवार रात मुंद्रिका देवी के निधन से भीतर तक आहत उनकी बहू उषा देवी को ब्रेन हेमरेज हुआ और आखिरकार उन्होंने भी दुनिया को अलविदा कह दिया.
यह घटना सिर्फ एक समाचार नहीं है. यह उन रिश्तों की खामोश चीख है, जिनमें प्यार की जगह गलतफ़हमियों और दूरियों ने ले ली है. आज के दौर में जहां सास-बहू के झगड़े घर-घर की कहानी बन चुके हैं, वहीं देवघर की यह घटना किसी मिसाल से कम नहीं- एक ऐसी मिसाल, जो दिल दहला देती है और रिश्तों की असल हकीकत सामने लाती है. आज जब सास-बहू के झगड़ों को मज़ाक, मीम और मनोरंजन बना दिया गया है, देवघर की यह घटना बता गई कि रिश्ते टूटते नहीं. टूटा हुआ रिश्ता इंसानों को तोड़ देता है.
लोग कहते हैं सास-बहू की लड़ाई कभी खत्म नहीं होती. लेकिन इस घटना ने साबित कर दिया कि हर बहस के नीचे एक रिश्ता धड़कता है, हर तकरार के पीछे एक अपनापन छिपा होता है, और हर कठोर शब्द के पीछे कहीं न कहीं एक अनकही चिंता और प्यार का महीन धागा बंधा रहता है. तभी तो बहू को जैसे ही सास की मौत की खबर मिली, उसकी दुनिया पल भर में खाली हो गई. जिसके साथ उसने शायद दर्जनों बार बहस की होगी. कई बार रूठी, कभी नाराज़ हुई होगी. उसी की अचानक मौत ने उसे भीतर से ऐसा तोड़ा कि उसका दिल-दिमाग संभल नहीं पाया.
आज न मुंद्रिका देवी है, न उषा देवी. बस उनकी यादें बची हैं. मुंद्रिका देवी अपने पीछे बच्चों को छोड़ गईं. एक साथ दो-दो मौतों ने उन्हें तोड़ दिया है. पर जिंदगी है, आगे भी चलना है. हालात को संभालने लोग उनके घर पहुंच रहे हैं. पूर्व कृषि मंत्री बादल ने भी शोकाकुल परिवार से मिलकर उन्हें ढाढस बंधाया.
यह घटना हमें झकझोरती है कि रिश्ते केवल बाहर दिखने वाले टकराव नहीं होते. उनके भीतर कितनी भावनाएं, कितना अपनापन, कितनी मजबूरियां दबी होती हैं, जिन्हें हम समझ ही नहीं पाते. आज जब हम रिश्तों को तानों और अहंकार में तौलने लगे हैं, देवघर की यह घटना हमें याद दिलाती है कि जिसे हम रोज़मर्रा की लड़ाई समझते हैं, वह कई बार गहरे प्यार का ही एक दूसरा रूप होती है. यह घटना सिर्फ देवघर की नहीं, हर घर के लिए एक चेतावनी है. रिश्ते कल भी ज़रूरी थे, आज भी हैं, और कल भी रहेंगे. बस उन्हें टूटने से पहले संभालना सीखिए.

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