JPSC-JSSC आंदोलन में छात्रों का सियासी फॉर्मूला: समर्थन लेंगे, लेकिन नेताओं को मंच नहीं देंगे; नई जगह पर टेंट की अनुमति अटकी
रांची में JPSC-JSSC अभ्यर्थियों का आंदोलन नए चरण में पहुंच गया है. छात्रों ने स्पष्ट किया है कि वे राजनीतिक दलों का समर्थन तो स्वीकार करेंगे, लेकिन आंदोलन के मंच और नेतृत्व पर किसी नेता को जगह नहीं देंगे.

Ranchi: झारखंड में JPSC और JSSC भर्ती परीक्षाओं को लेकर चल रहा अभ्यर्थियों का आंदोलन अब एक नए दौर में पहुंच गया है. परीक्षा में कथित अनियमितताओं के खिलाफ शुरू हुआ यह प्रदर्शन अब अपने नेतृत्व और स्वरूप को लेकर भी चर्चा में है. शुक्रवार को धरना स्थल पर राजनीतिक हस्तक्षेप को लेकर हुए विवाद के बाद छात्रों ने साफ कर दिया कि आंदोलन की कमान किसी राजनीतिक दल या नेता के हाथ में नहीं होगी. अभ्यर्थियों ने पुराना धरना स्थल छोड़कर जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम के दूसरे गेट के पास नया स्थान चुना, लेकिन प्रशासन ने वहां टेंट लगाने की अनुमति नहीं दी है. ऐसे में छात्र फिलहाल खुले में धरना जारी रखे हुए हैं. दूसरी ओर JLKM समेत कुछ राजनीतिक संगठन आंदोलन के समर्थन में सक्रिय हैं, लेकिन छात्र मंच साझा करने से दूरी बनाए रखना चाहते हैं.
राजनीतिक समर्थन से ज्यादा आंदोलन की पहचान बचाने पर छात्रों का जोर
JPSC-JSSC अभ्यर्थियों का कहना है कि यह आंदोलन पूरी तरह छात्रों का है और इसे किसी राजनीतिक दल के आंदोलन के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. शुक्रवार को धरना स्थल पर उस समय विवाद हुआ, जब कुछ नेताओं ने मंच से अपनी बात रखने की कोशिश की. इसके बाद प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट कर दिया कि नैतिक समर्थन का स्वागत है, लेकिन आंदोलन के मंच और फैसलों पर छात्रों का ही अधिकार रहेगा. छात्रों की यह रणनीति इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि झारखंड में छात्र आंदोलनों में अक्सर राजनीतिक संगठनों की भूमिका चर्चा में रही है.
JLKM का समर्थन, लेकिन मंच साझा करने से छात्रों का इनकार
झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) इस मुद्दे पर अभ्यर्थियों के समर्थन में सामने आया है. संगठन ने पहले मोरहाबादी स्थित गांधी प्रतिमा के सामने उपवास धरना शुरू किया था, बाद में इसे जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम के पास स्थानांतरित किया गया. हालांकि JLKM सहित अन्य राजनीतिक समूह आंदोलन को समर्थन देना चाहते हैं, लेकिन अभ्यर्थी अपनी लड़ाई को छात्र आंदोलन के रूप में ही बनाए रखना चाहते हैं. यही वजह है कि उन्होंने किसी भी राजनीतिक चेहरे को मंच पर जगह देने से परहेज किया है.
नया धरना स्थल चुना, लेकिन प्रशासन की अनुमति ने बढ़ाई परेशानी
विवाद के बाद अधिकांश अभ्यर्थियों ने पुराने धरना स्थल से हटकर जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम के दूसरे गेट के पास बैठने का फैसला किया. लेकिन नई जगह पर टेंट लगाने के लिए प्रशासन की अनुमति नहीं मिल सकी. प्रशासन का कहना है कि बिना अनुमति के वहां स्थायी व्यवस्था नहीं की जा सकती. अनुमति नहीं मिलने के कारण छात्र फिलहाल जमीन पर दरी बिछाकर धरना दे रहे हैं और तेज धूप के बीच आंदोलन जारी रखे हुए हैं.
आंदोलन के भीतर दिखने लगा बंटवारे का असर
धरना स्थल बदलने के बाद आंदोलन में एक तरह का विभाजन भी दिखाई दे रहा है. जहां अधिकांश अभ्यर्थी नई जगह पर जुटे हैं, वहीं पुराने स्थल पर भी कुछ लोग मौजूद हैं. प्रदर्शनकारी छात्रों का दावा है कि पुराने स्थान पर मौजूद कुछ लोग राजनीतिक संगठनों से जुड़े हैं. हालांकि आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए सभी अभ्यर्थियों के बीच तालमेल बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी.
आगे की चुनौती: मांगों पर फोकस और एकजुटता बनाए रखना
JPSC-JSSC आंदोलन अब दो मोर्चों पर चल रहा है. एक तरफ छात्रों को भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और कथित गड़बड़ियों पर कार्रवाई की मांग को लेकर सरकार का ध्यान आकर्षित करना है, वहीं दूसरी तरफ आंदोलन की स्वतंत्र पहचान बनाए रखने की चुनौती है. छात्रों की रणनीति साफ है कि वे किसी राजनीतिक दल के नेतृत्व में नहीं जाना चाहते. लेकिन लंबे समय तक आंदोलन जारी रखने के लिए संगठन, संसाधन और सभी अभ्यर्थियों के बीच एकजुटता सबसे अहम भूमिका निभाएगी.

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