Ranchi: झारखंड बीजेपी के संगठनात्मक चुनाव ने इस बार कई राजनीतिक सवाल खड़े कर दिए हैं. प्रदेश अध्यक्ष के एकमात्र पद और राष्ट्रीय परिषद के 21 सदस्यों के लिए 21 ही नामांकन—यह तस्वीर सामान्य नहीं मानी जा रही. रांची में हुए नामांकन के दिन साफ हो गया कि पार्टी के भीतर किसी तरह का खुला टकराव नहीं है, लेकिन यह एकजुटता अपने आप बनी या फिर रणनीतिक रूप से तैयार की गई—यही सबसे बड़ा सवाल है. प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए केवल प्रो. आदित्य प्रसाद साहु का नामांकन सामने आया, वहीं राष्ट्रीय परिषद के लिए भी तय संख्या में ही पर्चे दाखिल हुए. बीजेपी इसे “सलेक्शन थ्रू इलेक्शन” बता रही है, लेकिन राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह संगठन की नियंत्रित और संतुलित रणनीति का हिस्सा है. विधानसभा चुनाव के बाद पार्टी अब खुली प्रतिस्पर्धा से ज्यादा संदेश और स्थिरता पर फोकस करती दिख रही है.
सिंगल नॉमिनेशन के पीछे क्या है पार्टी की सोच?
झारखंड प्रदेश बीजेपी के चुनाव अधिकारी और केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम ने साफ कहा कि चुनाव की प्रक्रिया पूरी तरह खुली थी और कोई भी नामांकन कर सकता था. उनके मुताबिक, नामांकन और स्क्रूटनी के बाद केंद्रीय नेतृत्व की सहमति से 14 जनवरी को परिणाम घोषित किए जाएंगे. लेकिन सियासी तौर पर देखा जाए तो सिंगल नॉमिनेशन अपने आप में एक मजबूत संकेत है—पार्टी नेतृत्व यह दिखाना चाहता है कि संगठन में मतभेद नहीं, बल्कि सर्वसम्मति है. प्रदेश अध्यक्ष पद के लिए आदित्य प्रसाद साहु के अलावा किसी और का मैदान में न उतरना बताता है कि नेतृत्व पहले ही तय दिशा में आगे बढ़ चुका था. इससे यह संदेश भी जाता है कि पार्टी भीतरी खींचतान से बचते हुए आगामी चुनावी लड़ाइयों पर ध्यान केंद्रित करना चाहती है.
राष्ट्रीय परिषद की सूची और राजनीतिक संतुलन
राष्ट्रीय परिषद के लिए चुने गए 21 नाम केवल संगठनात्मक औपचारिकता नहीं हैं, बल्कि यह झारखंड की सियासत का पूरा सामाजिक और क्षेत्रीय खाका पेश करते हैं. इस सूची में कड़िया मुंडा, अर्जुन मुंडा, चंपाई सोरेन, रघुवर दास, अन्नपूर्णा देवी और गीता कोड़ा जैसे दिग्गज शामिल हैं. आदिवासी, ओबीसी और वैश्य समुदाय के नेताओं का संतुलन साफ दिखता है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीजेपी ने सिंगल नॉमिनेशन के जरिए यह संकेत दिया है कि अब संगठन में स्थिरता, अनुशासन और चुनावी तैयारी प्राथमिकता है. खुले मुकाबले से बचकर पार्टी नेतृत्व ने यह भी स्पष्ट किया है कि फैसले भले चुनाव के जरिए हों, लेकिन दिशा केंद्रीय रणनीति से तय होती है.
ये 21 नेता बनेंगे राष्ट्रीय परिषद सदस्य
कड़िया मुंडा, अर्जुन मुंडा, समीर उरांव, यदुनाथ पांडेय, चंपाई सोरेन, संजय सेठ, रघुवर दास, दिनेशानंद गोस्वामी, मधु कोड़ा, पशुपति नाथ सिंह, रवींद्र राय, अमर कुमार बाउरी, नीलकंठ सिंह मुंडा, भानू प्रताप शाही, जीतु चरण राम, अभयकांत प्रसाद, प्रदीप वर्मा, अनंत ओझा, दीपक प्रकाश, अन्नपूर्णा देवी और गीता कोड़ा.


