रांची विधानसभा : भाजपा में दावेदारों की लंबी फेहरिस्त, झामुमो से सीट छीनने को बेचैन है कांग्रेस
रांची विधानसभा सीट इस बार भी हॉट सीट होगा. राजनीतिक दलों के नेताओं ने इस सीट पर अपनी दावेदारी पेश करनी शुरू कर दी है.


रांची :
झारखंड में विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सुगबुगाहट तेज हो गई है. राजनीतिक दल 81 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने और जीतने की रणनीति बना रहे हैं. वहीं कई दल सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तैयार करने में जुटे हैं. प्रदेश की राजधानी रांची विधानसभा सीट इस बार भी हॉट सीट होगा. राजनीतिक दलों के नेताओं ने इस सीट पर अपनी दावेदारी पेश करनी शुरू कर दी है. भाजपा का इस सीट से चुनाव लड़ना कन्फर्म है. इसलिए रांची विधानसभा सीट पर सबसे अधिक दावेदार भाजपा से हैं. उधर कांग्रेस और झामुमो ने भी यहां दावेदारी पेश कर दी है. रांची विधानसभा सीट से पिछले कई चुनाव कांग्रेस लड़ती रही है, लेकिन पिछले 2 चुनाव (2019 और 2014) में यहां से झामुमो ने अपना कैंडिडेट उतारा था, हालांकि झामुमो को दोनों बार भाजपा के हाथों शिकस्त मिली थी. झामुमो इस बार भी यहां अपना कैंडिडेट देना चाहता है, जबकि कांग्रेस का कहना है कि रांची से भाजपा को सिर्फ कांग्रेस ही हरा सकती है.
झामुमो से दो नाम चर्चा में
2024 के लोकसभा चुनाव में रांची विधानसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी संजय सेठ को 111678 वोट मिले थे, जबकि कांग्रेस को 80854 वोट मिले हैं. इस वजह से कांग्रेस विधानसभा चुनाव में दावेदारी पेश कर रही है. अगर यह सीट झामुमो के खाते में गया तो इस बार कोई नया चेहरा सामने आएगा. राज्यसभा सांसद और रांची विधानसभा सीट से दो बार चुनाव लड़ चुकीं महुआ माजी के बेटे और झामुमो महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य के नाम की चर्चा है.
इस बार मुश्किल है सीपी सिंह की राह
रांची विधानसभा सीट पर 1996 से वर्तमान विधायक सीपी सिंह का कब्जा है. लगातार 6 बार चुनाव जीतकर उन्होंने रिकॉर्ड बनाया है, लेकिन पिछली बार महुआ माजी ने उन्हें कड़ी चुनौती दी थी. करीब तीन फीसदी वोट से ही सीपी सिंह चुनाव जीत पाये थे. इस बार उनकी राह आसान नहीं है. चर्चा है कि भाजपा इस बार उनकी जगह दूसरे नेता को मौका देगी. इस सीट से भाजपा के कई दावेदार हैं. इनमें पार्टी के प्रदेश सह मीडिया प्रभारी योगेंद्र प्रताप सिंह, पूर्व डिप्टी मेयर संजीव विजयवर्गीय, कार्यसमिति सद्स्य रमेश सिंह, कृपाशंकर सिंह, सत्यनारायण सिंह, संदीप सिन्हा के नाम शामिल हैं. इन लोगों ने अपनी तैयारी भी शुरू कर दी है.
मुस्लिम, एसटी, बंगाली, पिछड़े वोटर्स के वोट होते हैं निर्णायक
रांची विधानसभा सीट पर मुस्लिम, एसटी, बंगाली और पिछड़े वोटर्स के वोट निर्णायक होते हैं. 2011 की जनगणना के मुताबिक रांची विधानसभा सीट में एसटी वोटर्स की संख्या करीब 13.23 फीसदी है, मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 24.2 फीसदी है. 7% राजपूत वोटर्स, 4.1% प्रसाद, 3.6% कुमार, 3.1% राम, 2.3% साहू, 2.2% शर्मा, 2% वर्मा, 1.9% चौधरी, 1.9% साव, 1.8% महतो वोटर्स हैं
2019 में घटे वोट प्रतिशत से भाजपा चिंतित
पिछले तीन विधानसभा चुनावों के वोट प्रतिशत की बात करें तो 2019 में भाजपा का वोट प्रतिशत कम हुआ है. 2019 में रांची सीट पर भाजपा को 46.8% वोट मिले थे, जबकि झामुमो को 43.3 फीसदी वोट प्राप्त हुए थे. इससे पहले 2014 में भाजपा को 64.39% वोट मिले थे, जबकि जबकि झामुमो को सिर्फ 24.81% मत हासिल हुए थे. 2009 में भाजपा को 56.87% वोट मिले थे, वहीं कांग्रेस को सिर्फ 35.57% वोट प्राप्त हुए थे. 2019 में वोटों का प्रतिशत घटने के कारण भाजपा इस बार थोड़ा चिंतित जरूर है.
रांची विधानसभा सीट से कब कौन जीते
वर्ष पार्टी विधायक
1952 कांग्रेस रामरतन राम
1957 निर्दलीय लाल चिंतामणी शाहदेव
1977 जनता पार्टी ननी गोपाल मित्रा
1980 कांग्रेस ज्ञान रंजन
1985 जयप्रकाश गुप्ता
1990 भाजपा गुलशन लाल आजमानी
1995 भाजपा यशवंत सिन्हा
1996 भाजपा सीपी सिंह
2000 भाजपा सीपी सिंह
2005 भाजपा सीपी सिंह
2009 भाजपा सीपी सिंह
2014 भाजपा सीपी सिंह
2019 भाजपा सीपी सिंह

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