कुसुंभा में दरिंदगी से भड़का जनाक्रोश, विष्णुगढ़ से हजारीबाग तक बंद, सड़कों पर हैवानियत के खिलाफ प्रदर्शन
झारखंड के हजारीबाग जिले के कुसुंभा गांव में 12 वर्षीय बच्ची के साथ हुई दरिंदगी और हत्या के बाद जनाक्रोश फूट पड़ा है. आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से लोगों ने बंद का आह्वान किया और सड़कों पर उतरकर विरोध प्रदर्शन किया. SIT जांच जारी है, लेकिन मामला अब राजनीतिक मुद्दा बनता जा रहा है.

Hazaribag: विष्णुगढ़ प्रखंड के कुसुंभा गांव में 12 वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ हुई दरिंदगी और हत्या ने पूरे जिले में उबाल पैदा कर दिया है. घटना 24 मार्च को रामनवमी/नवरात्रि के दौरान मंगला जुलूस देखने गई बच्ची के लापता होने के बाद सामने आई. 25 मार्च को उसका क्षत-विक्षत शव बरामद हुआ, जिसमें दुष्कर्म और बेरहमी के स्पष्ट संकेत मिले. घटना के छह दिन बीतने के बावजूद आरोपियों की गिरफ्तारी न होने से जनता में गुस्सा फूट पड़ा. बीजेपी ने 24 घंटे के अल्टीमेटम के बाद आज हजारीबाग बंद का आह्वान किया. सांसद मनीष जायसवाल, बरही विधायक मनोज यादव समेत कई नेता और स्थानीय लोग सड़कों पर उतरे. बाजार बंद रहे, सड़कें जाम हुईं और दोषियों को फांसी देने की मांग जोरों पर रही. जिला प्रशासन पर पुलिस नाकामी के आरोप लगे हैं, जबकि पुलिस ने SIT गठित कर जांच तेज कर दी है. राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी स्वतः संज्ञान लिया है.
24 मार्च को कुसुंभा गांव में हुई बर्बर घटना
कुसुंभा गांव में 24 मार्च की शाम बच्ची अपनी मां के साथ मंगला जुलूस देखने गई थी. जुलूस के दौरान वह लापता हो गई. अगले दिन 25 मार्च को गांव के पास एक सुनसान जगह पर उसका शव मिला. शव की हालत बेहद दयनीय थी – चेहरा पत्थर से कुचला हुआ और निजी अंगों में बांस की डंडी डाली गई थी. पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में दुष्कर्म की पुष्टि होने की आशंका जताई गई है. परिवार और स्थानीय लोगों का आरोप है कि यह सामूहिक बलात्कार के बाद हत्या का मामला है. घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया. पीड़ित परिवार न्याय की गुहार लगा रहा है.
बीजेपी का बंद आह्वान और राजनीतिक विरोध
बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष एवं राज्यसभा सांसद आदित्य साहू, हजारीबाग सांसद मनीष जायसवाल, सदर विधायक प्रदीप प्रसाद, बरही विधायक मनोज यादव समेत दर्जनों बीजेपी नेताओं ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की और घटनास्थल का निरीक्षण किया. उन्होंने 24 घंटे में आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर 30 मार्च को हजारीबाग बंद का ऐलान किया था. बंद का व्यापक असर दिखा – विष्णुगढ़, झुमरा समेत कई बाजार पूरी तरह बंद रहे. सात माइल मोड़ पर सड़क जाम कर आंदोलनकारियों ने नारेबाजी की. तख्तियों पर लिखा था – “बलात्कारियों को फांसी दो”, “हेमंत सरकार होश में आओ”, “संपूर्ण बंद”. महिलाओं ने खासकर जोरदार विरोध जताया. कांग्रेस ने भी अलग से प्रदर्शन का ऐलान किया, जिसमें काला बिल्ला लगाकर पुलिस प्रशासन का पुतला दहन और CBI जांच की मांग की गई.
SIT जांच की स्थिति
झारखंड डीजीपी तदाशा मिश्रा ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तीन सदस्यीय SIT गठित कर दी है. SIT को एक सप्ताह में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया गया है. पुलिस सीसीटीवी फुटेज, गवाहों के बयान और CDR डिटेल्स की जांच कर रही है. फिलहाल कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है, जिससे लोगों में आक्रोश बढ़ रहा है. राष्ट्रीय महिला आयोग ने स्वतः संज्ञान लेते हुए डीजीपी को त्वरित, निष्पक्ष और बाल-सुलभ जांच के निर्देश दिए हैं. परिवार को 50 लाख रुपये मुआवजे की मांग भी की जा रही है. प्रशासन ने शांति बनाए रखने की अपील की है, लेकिन बंद के दौरान यातायात प्रभावित रहा.
सरकार पर बढ़ा दबाव
यह घटना झारखंड में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर बड़े सवाल खड़े कर रही है. बीजेपी नेताओं ने कहा कि राज्य में अपराधी बेखौफ हो गए हैं और महिलाएं-बच्चियां असुरक्षित हैं. दोषियों को फांसी से कम सजा मंजूर नहीं. कांग्रेस समेत अन्य दलों ने भी त्वरित कार्रवाई और SIT जांच की मांग की है. स्थानीय लोग कह रहे हैं कि जब तक आरोपियों को सख्त सजा नहीं मिलती, आंदोलन जारी रहेगा. इस मामले ने पूरे राज्य की राजनीति को गरमा दिया है और सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है.

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