Jamshedpur: सोमवार को जमशेदपुर ओलचिकी लिपि के शताब्दी समारोह के अवसर पर एक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक क्षण का साक्षी बना, जब राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंच से संथाली गीत गाकर पूरे माहौल को भावनाओं और गौरव से भर दिया. राष्ट्रपति के गीत के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन मंच पर मौजूद रहे और आंखें मूंदकर गीत का आनंद लेते नजर आए. कार्यक्रम में उपस्थित हजारों लोग भी मंत्रमुग्ध होकर इस पल के साक्षी बने.
दीप प्रज्ज्वलन से हुआ समारोह का शुभारंभ
समारोह की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुई. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने ‘जोहार’ कहकर संथाली भाषा में अपना संबोधन आरंभ किया. उन्होंने कहा कि भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी पहचान, अस्तित्व और स्वाभिमान की प्रतीक होती है.
मातृभाषा संरक्षण का संदेश
राष्ट्रपति ने युवाओं से आह्वान किया कि वे आधुनिक समय में अन्य भाषाएं जरूर सीखें, लेकिन अपनी मातृभाषा को कभी न छोड़ें. उन्होंने ओलचिकी लिपि के संरक्षण और प्रचार में लगे कार्यकर्ताओं तथा अखिल भारतीय संथाली राइटर्स एसोसिएशन की सराहना करते हुए कहा कि वे पंडित रघुनाथ मुर्मू के सपनों को साकार कर रहे हैं.
संथाली में संविधान का उल्लेख
अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के 100वें जन्मोत्सव पर ओलचिकी लिपि में प्रकाशित भारत के संविधान के अनुवाद का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि कानूनों की जानकारी के अभाव में समाज के कई निर्दोष लोग जेलों में रहे, लेकिन अब संथाली भाषा में संविधान उपलब्ध होने से लोग अपने अधिकारों को बेहतर ढंग से समझ सकेंगे.
मुख्यमंत्री ने बताया ऐतिहासिक उपलब्धि
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने संथाली भाषा में सभा को संबोधित करते हुए पंडित रघुनाथ मुर्मू को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने कहा कि ओलचिकी लिपि का आविष्कार समाज की एकता और सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है. मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति की जीवन यात्रा को आज की बेटियों के लिए प्रेरणास्रोत बताया. मुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि वर्ष 2003 में 92वें संविधान संशोधन के तहत संथाली भाषा को संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया, जो जनजातीय अस्मिता के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित हुआ.
राज्यपाल का स्वागत भाषण
समारोह में राज्यपाल ने स्वागत भाषण देते हुए झारग्राम सांसद कालीपाड़ा सोरेन, अखिल भारतीय संथाली राइटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष लक्ष्मण किस्कू और जाहेरथान कमेटी के अध्यक्ष सीआर मांझी का अभिनंदन किया. उन्होंने कहा कि यह आयोजन केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जनजातीय समाज की भाषा, संस्कृति और पहचान का जीवंत उत्सव है.

