घोड़थंबा हिंसा पर सियासत तेज, रघुवर के दौरे के बाद बाबूलाल भी जागे, सोशल मीडिया से निकलकर पहुंचे घटनास्थल
रांची : होली के दिन गिरिडीह के घोड़थंबा में हुई हिंसा पर प्रदेश में राजनीति गर्म है. बीजेपी का आरोप है कि घटना के बाद सरकार की कार्रवाई तुष्टिकरण की नीति से प्रभावित है, जबकि सत्ता पक्ष का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और भाजपा के लोग इस घटना पर राजनीतिक रोटी सेंकना चाहते हैं. इधर बीजेपी ...


रांची : होली के दिन गिरिडीह के घोड़थंबा में हुई हिंसा पर प्रदेश में राजनीति गर्म है. बीजेपी का आरोप है कि घटना के बाद सरकार की कार्रवाई तुष्टिकरण की नीति से प्रभावित है, जबकि सत्ता पक्ष का कहना है कि नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी और भाजपा के लोग इस घटना पर राजनीतिक रोटी सेंकना चाहते हैं. इधर बीजेपी में भी घोड़थंबा घटना के जरिये चेहरा चमकाने की होड़ शुरू हो गई है. घटना की गंभीरता को देखते हुए बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी घटनास्थल नहीं जाकर सोशल मीडिया पर मामले को उठाकर सरकार को घेरते रहे. लेकिन इसी बीच बीजेपी के साधारण कार्यकर्ता रघुवर दास घोड़थंबा पहुंच गये और लगे सरकार को प्रशासन पर चिल्लाने-धमकाने. तब बाबूलाल का भी माथा ठनका और सोमवार को वे भी लाव-लश्कर के साथ पहुंच गये घोड़थंबा. उन्होंने फिर से आरोप लगाये कि सरकार और पुलिस प्रशासन गलतबयानी कर रही है. उपद्रवियों पर कोई कार्रवाई नहीं हुई है. इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान चलाने वाले विकास शाह को पुलिस ने जिस क्रुरता के साथ पीटा है, वह चीख-चीख कर पुलिस की बर्बरता की गवाही दे रहा है. कहा कि मामले में दर्ज एफआईआर को देखने से ऐसा लगता है जैसे यह कोई शिकायतवाद नहीं, बल्कि हिंदुओं पर हुए हमले का एक पूर्व नियोजित खाका हो. आज अपने ही देश में हिंदुओं को अपना त्यौहार मनाने पर प्रताड़ित किया जा रहा है.
बाबूलाल मरांडी तो नेता प्रतिपक्ष, बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष और लोकल जनप्रतिनिधि की हैसियस से घोड़थंबा पहुंचे और सरकार को कटघरे में खड़ा किया, लेकिन रघुवर दास बिना किसी पद के इस मामले पर राजनीति चमकाने के लिए घोड़थंबा गये. उन्हें पार्टी की ओर से वहां जाने का कोई निर्देश भी नहीं था, लेकिन फिर भी पहुंच गये और वहां पुलिस प्रशासन पर अपनी भड़ास निकाली और फिर वापस चले गये. इससे संबंधित एक वीडियो भी उन्होंने सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, जिसमें वे कहते दिख रहे हैं कि सामाजिक सौहार्द का ठेका केवल हिंदू समाज ने नहीं लिया है. क्या अब हिंदू समाज को अपने त्योहारों पर जुलूस निकालने के लिए दूसरे समुदाय से अनुमति लेनी होगी? सड़क किसी की जागीर नहीं है. दूसरे समुदाय के पर्व में कोई हिंसा नहीं होती है, झारखंड में हिंदुओं के पर्व में हर बार हिंसा हो रही है. वोट बैंक के लिए शासन-प्रशासन बैलेंसिंग एक्ट बंद करे. जिन निर्दोष हिंदू लोगों को गिरफ्तार किया गया है, उन्हें तत्काल रिहा करें। नहीं तो बीजेपी चुप नहीं बैठेगी.
रघुवर दास का यह तेवर कई सालों बाद दिखा है. रघुवर के गर्म मिजाज के वीडियो उनके मुख्यमंत्रीत्व काल में कई बार दिख चुके हैं. कई साल से खामोश थे, लेकिन फिर पुराने तेवर में नजर आ रहे हैं. इस तेवर के कई मायने हो सकते हैं. दरअसल रघुवर दास के बीजेपी में शामिल हुए दो महीने हो चुके हैं, लेकिन पार्टी ने उन्हें अबतक कोई जिम्मेवारी नहीं दी है. बाबूलाल मरांडी को विधायक दल का नेता बना दिया गया है और जल्द ही उन्हें प्रदेश अध्यक्ष के पद के मुक्त किया जा सकता है. ऐसे में नया प्रदेश अध्यक्ष का पद पाने के लिए रघुवर दास एक्टिव हो गये हैं. जनता के साथ-साथ बीजेपी के केंद्रीय नेताओं का ध्यान अपनी ओर खींचने वे बाबूलाल मरांडी से पहले घोड़थंबा पहुंच गये.

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