लखनऊ में राष्ट्र प्रेरणा स्थल का पीएम मोदी ने किया उद्घाटन: कूड़े के ढेर से बना विरासत और विकास का प्रतीक
करीब 230 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इस भव्य स्थल के उद्घाटन समारोह को लेकर बड़े स्तर पर तैयारियां की गई थीं. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे.

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में बने राष्ट्र प्रेरणा स्थल का उद्घाटन किया. यह उद्घाटन पूर्व प्रधानमंत्री और भारत रत्न अटल बिहारी वाजपेयी की 101वीं जयंती के अवसर पर किया गया. इस दौरान प्रधानमंत्री ने राष्ट्र प्रेरणा स्थल में स्थापित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी, पंडित दीनदयाल उपाध्याय और अटल बिहारी वाजपेयी की प्रतिमाओं का अनावरण कर उन्हें पुष्प अर्पित किए.
करीब 230 करोड़ रुपये की लागत से तैयार किए गए इस भव्य स्थल के उद्घाटन समारोह को लेकर बड़े स्तर पर तैयारियां की गई थीं. कार्यक्रम में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी मौजूद रहे. सीएम योगी ने इसे विरासत और विकास का नया रूप बताते हुए कहा कि यह स्थल देश को दिशा देने वाले महापुरुषों के विचारों से नई पीढ़ी को प्रेरित करेगा.
राष्ट्र प्रेरणा स्थल की विशेषताएं
आईआईएम रोड स्थित राष्ट्र प्रेरणा स्थल में लगभग 98 हजार वर्ग फुट क्षेत्रफल में फैला एक आधुनिक म्यूजियम ब्लॉक बनाया गया है. म्यूजियम के दूसरे तल पर पांच कोर्ट यार्ड और पांच गैलरी हैं, जबकि वीवीआईपी ग्रीन रूम की भी व्यवस्था की गई है. पहले तल पर सुदर्शन चक्र और भारत माता की भव्य आकृतियां स्थापित की गई हैं.
कूड़े के ढेर से प्रेरणा स्थल तक का सफर
आज जहां राष्ट्र प्रेरणा स्थल खड़ा है, वह इलाका कभी घैला डंपिंग ग्राउंड के नाम से जाना जाता था. यहां कूड़े का विशाल ढेर था, दुर्गंध और गंदगी के कारण लोग इस इलाके में आने से कतराते थे. कचरे की वजह से गोमती नदी प्रदूषित हो रही थी और आसपास की उपजाऊ जमीन भी प्रभावित हो रही थी.
नगर निगम की बड़ी पहल
इस समस्या को खत्म करने का जिम्मा नगर निगम ने उठाया. करीब साढ़े छह लाख मीट्रिक टन कूड़े को हटाकर मोहान रोड स्थित शिवरी में शिफ्ट किया गया. यह प्रक्रिया बेहद चुनौतीपूर्ण रही, जिसमें लगभग छह साल का समय और करीब 13 करोड़ रुपये खर्च हुए.
जमीन को फिर से बनाया गया उपजाऊ
लिगेसी वेस्ट के कारण खराब हो चुकी जमीन को सुधारने का काम एक एजेंसी को सौंपा गया. करीब डेढ़ साल की मेहनत के बाद जमीन को दोबारा उपयोग योग्य बनाया गया. इसके बाद 65 एकड़ भूमि को लखनऊ विकास प्राधिकरण (LDA) को सौंपा गया.
तीन साल में बना भव्य स्मारक
एलडीए ने लगभग तीन साल में इस पूरे क्षेत्र को विकसित कर इसे आज के भव्य राष्ट्र प्रेरणा स्थल का रूप दिया. अब यह स्थल न केवल ऐतिहासिक और वैचारिक विरासत का प्रतीक है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण और शहरी विकास का भी एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया है.

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