अब यात्रियों की सुरक्षा से समझौता नहीं, चेसिस बढ़ी बसें होंगी सड़क से बाहर
खादगढ़ा बस स्टैंड में परिवहन विभाग ने स्लीपर बसों पर बड़ी कार्रवाई शुरू कर दी है. नियमों की अनदेखी कर चलाई जा रही बसों को जांच के दायरे में लिया गया है. अब यात्रियों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं होगा—यह साफ संदेश विभाग ने दे दिया है.

Ranchi: रांची के खादगढ़ा बस स्टैंड पर यात्रियों की सुरक्षा को लेकर बड़ा एक्शन देखने को मिला है. जिला परिवहन विभाग ने स्लीपर बसों के खिलाफ विशेष जांच अभियान चलाकर साफ संदेश दे दिया कि नियमों से समझौता अब नहीं होगा. अभियान के दौरान 21 स्लीपर बसों की गहन जांच की गई, जिसमें कई बसें तय मानकों पर खरी नहीं उतरीं. जांच का मकसद सिर्फ कार्रवाई करना नहीं, बल्कि सड़क सुरक्षा को लेकर लापरवाही पर लगाम लगाना था. अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि स्लीपर बसों में किए गए गैरकानूनी बदलाव, अग्नि सुरक्षा में चूक और पंजीकरण से जुड़ी गड़बड़ियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. यात्रियों की जान से जुड़े मामलों में अब कागजी नहीं, ज़मीनी सख्ती लागू की जाएगी.
स्लीपर बसों की जांच में क्या-क्या सामने आया
विशेष अभियान के तहत खादगढ़ा बस स्टैंड पर खड़ी स्लीपर बसों का एक-एक कर निरीक्षण किया गया. कुल 21 बसों की जांच में कई बसों में नियमों का उल्लंघन पाया गया. कुछ बसों में चेसिस बढ़ाकर बॉडी बनाई गई थी, जो सीधे तौर पर अवैध मानी जाती है. इसके अलावा केबिन डिजाइन, बर्थ की बनावट और इमरजेंसी निकास जैसे अहम बिंदुओं पर भी खामियां मिलीं. जांच के बाद संबंधित बस संचालकों को नोटिस जारी किए गए और तय समय-सीमा के भीतर सुधार करने के निर्देश दिए गए. विभाग ने साफ कर दिया कि अगली बार ऐसी खामियां मिलने पर सीधी कार्रवाई होगी.
कैबिन पार्टिशन और बर्थ स्लाइडर पर सख्ती
निरीक्षण के दौरान सबसे ज्यादा आपत्ति चालक के केबिन में लगाए गए पार्टीशन दरवाजों को लेकर जताई गई. अधिकारियों ने निर्देश दिया कि स्लीपर बसों में ड्राइवर केबिन के अंदर लगाया गया पार्टीशन तुरंत हटाया जाए, क्योंकि यह आपात स्थिति में जोखिम बढ़ाता है. कुछ बसों में मौके पर ही इसे हटवाया गया. इसके साथ ही स्लीपर कोचों के बर्थ में लगे स्लाइडर को भी असुरक्षित बताते हुए तत्काल हटाने का आदेश दिया गया. विभाग का कहना है कि इन बदलावों से दुर्घटना या आग लगने की स्थिति में यात्रियों की जान को गंभीर खतरा हो सकता है.
अग्नि सुरक्षा और पंजीकरण नियमों में बड़ा बदलाव
परिवहन विभाग ने अग्नि सुरक्षा को लेकर भी सख्त रुख अपनाया है. सभी स्लीपर बसों में एक माह के भीतर एफडीएसएस यानी फायर डिटेक्शन एंड सप्रेशन सिस्टम लगाना अनिवार्य किया गया है. इसके अलावा हर बस में कम से कम 10 किलोग्राम क्षमता का कार्यशील फायर एक्सटिंग्विशर होना जरूरी होगा. पंजीकरण प्रक्रिया में भी बदलाव करते हुए स्पष्ट किया गया कि अब बसों का रजिस्ट्रेशन केवल फार्म-22/22ए और अप्रूव्ड टेस्ट एजेंसी की मंजूरी के आधार पर ही होगा. हर बस के साथ लेआउट ड्राइंग जमा करना भी अनिवार्य कर दिया गया है.
भविष्य में भी जारी रहेगा अभियान
खादगढ़ा बस स्टैंड पर वाहन मालिकों के साथ बैठक कर विभागीय निर्देशों की जानकारी दी गई. बस संचालकों ने तय समय में जरूरी सुधार करने का आश्वासन दिया है. परिवहन विभाग ने साफ किया कि यह अभियान सड़क सुरक्षा को प्राथमिकता देने की नीति का हिस्सा है और आगे भी ऐसे निरीक्षण लगातार होते रहेंगे. नियमों का पालन नहीं करने वाले बस ऑपरेटरों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी, ताकि यात्रियों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता न हो.

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