8 हजार रुपये रिश्वत मामले में गिरफ्तार बीपीओ अनिल खलखो को नहीं मिली राहत, कोर्ट ने खारिज की जमानत याचिका
सिमडेगा के केरसई प्रखंड के बीपीओ अनिल खलखो को रिश्वत मामले में अदालत से राहत नहीं मिली. विजिलेंस की विशेष अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी. ACB ने उन्हें 8 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था. मामले की जांच फिलहाल जारी है.

झारखंड में भ्रष्टाचार से जुड़े मामलों पर कार्रवाई लगातार जारी है. इसी क्रम में रिश्वत लेने के आरोप में गिरफ्तार किए गए सिमडेगा जिले के केरसई प्रखंड के तत्कालीन बीपीओ अनिल खलखो को अदालत से भी राहत नहीं मिली है. विजिलेंस की विशेष अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज कर दी है. अनिल खलखो को भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने शिकायत के आधार पर कथित रूप से 8 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार किया था. मामला विद्यालय की मध्याह्न भोजन योजना से संबंधित राशि के उपयोग और प्रतिवेदन जमा करने की प्रक्रिया से जुड़ा बताया गया है. जांच एजेंसी का आरोप है कि सरकारी कार्य पूरा करने के बदले रिश्वत की मांग की गई थी. फिलहाल आरोपी न्यायिक हिरासत में हैं और मामले की कानूनी प्रक्रिया जारी है. इस फैसले के बाद भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त कार्रवाई का संदेश भी माना जा रहा है.
रिश्वत मामले में जमानत याचिका हुई खारिज
जानकारी के अनुसार, विजिलेंस की विशेष अदालत ने बीपीओ अनिल खलखो की ओर से दायर जमानत याचिका पर सुनवाई के बाद उसे अस्वीकार कर दिया. अदालत ने उपलब्ध तथ्यों और जांच की स्थिति को देखते हुए फिलहाल जमानत देने से इनकार किया. आरोपी की गिरफ्तारी के बाद से मामले की जांच जारी है.
मध्याह्न भोजन योजना से जुड़ा है मामला
बताया गया कि यह मामला विद्यालयों में संचालित मध्याह्न भोजन योजना के तहत अंडा और फलाहार मद की राशि के उपयोग से संबंधित है. वित्तीय वर्ष 2025-26 में उपलब्ध राशि का अधिकांश हिस्सा खर्च किया जा चुका था, जबकि शेष राशि का उपयोग और उसका प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाना बाकी था. इसी प्रक्रिया के दौरान रिश्वत मांगने का आरोप सामने आया.
शिकायत के बाद ACB ने की कार्रवाई
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि सरकारी प्रक्रिया पूरी करने के लिए पहले 15 हजार रुपये की मांग की गई थी. बाद में बातचीत के दौरान कथित रूप से यह राशि 8 हजार रुपये पर तय हुई. शिकायतकर्ता ने रिश्वत देने के बजाय मामले की सूचना भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) को दी. प्रारंभिक सत्यापन के बाद एसीबी ने योजना बनाकर कार्रवाई की और आरोपी को कथित रूप से रिश्वत लेते हुए गिरफ्तार कर लिया.
24 जून को हुई थी गिरफ्तारी
एसीबी की टीम ने 24 जून को विशेष अभियान चलाकर आरोपी को रंगे हाथ पकड़ने का दावा किया था. गिरफ्तारी के बाद आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए उन्हें न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. जांच एजेंसी मामले से जुड़े दस्तावेजों और अन्य साक्ष्यों की भी जांच कर रही है, ताकि आरोपों की पुष्टि की जा सके.
मामले की जांच और कानूनी प्रक्रिया जारी
फिलहाल इस मामले की जांच जारी है और संबंधित एजेंसियां सभी पहलुओं की पड़ताल कर रही हैं. अदालत द्वारा जमानत याचिका खारिज किए जाने के बाद आरोपी न्यायिक हिरासत में ही रहेंगे. जांच पूरी होने और अदालत में सुनवाई के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मामले में आगे क्या कानूनी कार्रवाई होती है. वहीं, इस तरह की कार्रवाई को सरकारी कार्यों में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.

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