झारखंड में सरकारी योजनाओं के फंड पर नया नियम, अब काम के हिसाब से मिलेगी राशि
झारखंड सरकार ने वित्तीय प्रबंधन को मजबूत बनाने के लिए बड़ा फैसला लिया है. अब किसी भी सरकारी योजना के लिए एकमुश्त आवंटन नहीं किया जाएगा, बल्कि कार्य की प्रगति के अनुसार किस्तों में राशि जारी होगी. सरकार का मानना है कि इससे सरकारी खजाने पर दबाव कम होगा और योजनाओं के खर्च पर बेहतर निगरानी रखी जा सकेगी.

Ranchi: झारखंड सरकार की वित्तीय स्थिति को देखते हुए राज्य का वित्त विभाग अब योजनाओं के लिए एकमुश्त आवंटन (Lump Sum Allocation) जारी नहीं करेगा. विभाग ने सिद्धांततः फैसला लिया है कि अब योजनाओं के लिए पार्ट-वाइज (किस्तों में) आवंटन किया जाएगा. इस संबंध में जल्द ही आधिकारिक आदेश जारी होने की संभावना है. सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से सरकारी खजाने में पर्याप्त राशि उपलब्ध रहेगी और योजनाओं के अनुसार चरणबद्ध तरीके से भुगतान किया जा सकेगा.
किस तरह बदलेगी व्यवस्था?
वर्तमान व्यवस्था के तहत विधानसभा से बजट पारित होने के बाद वित्त विभाग की सहमति से संबंधित विभाग स्वीकृत्यादेश और आवंटन आदेश जारी करते हैं, जिसके बाद पूरी बजटीय राशि की निकासी संभव हो जाती है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद किसी भी योजना की पूरी राशि एक साथ जारी नहीं होगी. योजना की प्रगति के अनुसार चरणबद्ध तरीके से राशि जारी की जाएगी. वित्त विभाग का तर्क है कि अधिकांश योजनाओं को पूरा होने में समय लगता है, इसलिए कार्य की प्रगति के अनुसार भुगतान करना अधिक व्यावहारिक होगा.
15वें वित्त आयोग से करीब 2700 करोड़ रुपये का नुकसान
राज्य सरकार को 15वें वित्त आयोग की अनुशंसित राशि का पूरा लाभ नहीं मिल सका, जिससे झारखंड को लगभग 2700 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. जानकारी के अनुसार ग्रामीण विकास विभाग को तीन वित्तीय वर्षों में करीब 4100 करोड़ रुपये मिलने थे. पहले वर्ष में लगभग 1370 करोड़ रुपये मिले, लेकिन अंतिम दो वर्षों की लगभग 2800 करोड़ रुपये की राशि में से करीब 2000 करोड़ रुपये ही प्राप्त हो सके. बताया जा रहा है कि राज्य वित्त आयोग (State Finance Commission) का गठन समय पर नहीं होने और उपयोगिता प्रमाण पत्र (Utilization Certificate) जमा नहीं किए जाने के कारण केंद्र सरकार ने करीब 2800 करोड़ रुपये की राशि रोक दी थी. 31 मार्च 2026 को 15वें वित्त आयोग का कार्यकाल समाप्त होने के बाद राज्य लगभग 800 करोड़ रुपये की अतिरिक्त राशि से भी वंचित रह गया.
नगर विकास विभाग को भी हुआ नुकसान
नगर विकास विभाग को भी तीन वर्षों में लगभग 2100 करोड़ रुपये मिलने थे, लेकिन नगर निकाय चुनाव समय पर नहीं होने के कारण केंद्र सरकार ने अनुदान रोक दिया. फरवरी 2026 में नगर निकाय चुनाव संपन्न होने के बाद केंद्र सरकार ने दो किश्तों में 118 करोड़ रुपये और 178 करोड़ रुपये जारी किए. हालांकि राज्य सरकार द्वारा शेष राशि जारी करने का आग्रह किए जाने के बावजूद केंद्र ने स्पष्ट कर दिया कि 15वें वित्त आयोग का कार्यकाल समाप्त होने के कारण अब बाकी राशि जारी नहीं की जा सकती.
पीएल खातों में अब भी पड़े हैं 18 हजार करोड़ रुपये
सूत्रों के अनुसार नई सरकार के गठन के समय विभिन्न विभागों के पीएल (पर्सनल लेजर) खातों में लगभग 22 हजार करोड़ रुपये जमा थे. वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर के निर्देश के बाद विभागों ने करीब 3500 करोड़ रुपये वित्त विभाग को वापस किए, लेकिन अब भी 18 हजार करोड़ रुपये से अधिक की राशि विभिन्न विभागों के पीएल खातों में पड़ी हुई है. पूर्व वित्त सचिव अमित खरे के कार्यकाल में पीएल खातों में राशि रखने की अवधि दो वर्ष निर्धारित थी, जिसे वर्तमान सरकार ने बढ़ाकर चार वर्ष कर दिया है. इसके बावजूद चार वर्ष से अधिक समय से जमा बड़ी राशि अब तक वित्त विभाग को वापस नहीं की गई है.
स्पर्श पोर्टल से होगी भुगतान की निगरानी
केंद्र सरकार ने वित्तीय प्रबंधन को अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनाने के लिए स्पर्श (SPARSH) पोर्टल विकसित किया है. झारखंड सहित सभी राज्यों के कोषागारों को इस पोर्टल से जोड़ा जा रहा है. नई व्यवस्था के तहत केंद्र से मिलने वाली राशि के भुगतान से पहले राज्य सरकार को अपने ट्रेजरी के माध्यम से स्वीकृति देनी होगी. इसके बाद स्पर्श पोर्टल के जरिए केंद्र की अनुमति मिलने पर आरबीआई में राज्य सरकार के खाते से भुगतान किया जाएगा. इस प्रणाली के माध्यम से केंद्र सरकार एक क्लिक में यह देख सकेगी कि किस लाभार्थी को कितनी राशि, किस योजना और किस मद में भुगतान किया गया है.
प्रदर्शन आधारित होगी केंद्रीय सहायता
सरकारी अधिकारियों के अनुसार भविष्य में राज्यों को मिलने वाली केंद्रीय सहायता धीरे-धीरे परफॉर्मेंस बेस्ड होती जाएगी. यानी जो राज्य वित्तीय प्रबंधन और योजनाओं के क्रियान्वयन में बेहतर प्रदर्शन करेंगे, उन्हें केंद्र से अधिक वित्तीय सहायता मिलने की संभावना रहेगी. साथ ही, नई व्यवस्था लागू होने के बाद उपयोगिता प्रमाण पत्र (यूसी) आधारित प्रक्रिया की आवश्यकता भी धीरे-धीरे कम हो सकती है.

specializes in local and regional stories, bringing simple, factual, and timely updates to readers.





Leave a comment