पेयजल योजनाओं में लापरवाही बर्दाश्त नहीं: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अधिकारियों को दिए सख्त निर्देश
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को झारखंड मंत्रालय में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की. बैठक में विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में संचालित योजनाओं की प्रगति और वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना की समीक्षा की गई.

Ranchi: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मंगलवार को झारखंड मंत्रालय में पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की. बैठक में विभाग द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में संचालित योजनाओं की प्रगति और वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्ययोजना की समीक्षा की गई. मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि जल जीवन मिशन के कार्यों में तेजी लाते हुए राज्य के प्रत्येक घर तक पाइपलाइन और नल के माध्यम से शुद्ध पेयजल पहुंचाने के लक्ष्य को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए. उन्होंने कहा कि पेयजल की उपलब्धता जनजीवन से जुड़ा अत्यंत महत्वपूर्ण विषय है और इस कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता स्वीकार्य नहीं होगी.
जल संकट वाले क्षेत्रों पर रखें विशेष नजर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के उन क्षेत्रों की पहचान की जाए जहां पेयजल संकट की संभावना है. ऐसे इलाकों में विशेष निगरानी रखते हुए त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि आम लोगों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े. उन्होंने जलापूर्ति योजनाओं के रख-रखाव और मरम्मत कार्यों को भी प्राथमिकता के आधार पर पूरा करने को कहा.
जल सहियाओं को दिया जाए तकनीकी प्रशिक्षण
बैठक में मुख्यमंत्री ने जल सहियाओं की भूमिका को और मजबूत बनाने पर जोर दिया. उन्होंने निर्देश दिया कि जल सहियाओं को समूहवार आईटीआई में प्लंबर का व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाए. साथ ही खराब चापाकलों की मरम्मत, सौर ऊर्जा आधारित जलापूर्ति योजनाओं के रख-रखाव और निगरानी की जिम्मेदारी भी उन्हें सौंपी जाए. उन्होंने बेहतर कार्य करने वाली जल सहियाओं को प्रोत्साहित और पुरस्कृत करने की भी बात कही.
रियल टाइम मॉनिटरिंग पर दिया जोर
मुख्यमंत्री ने बड़ी पेयजल योजनाओं की निगरानी के लिए ठेकेदारों का व्हाट्सएप ग्रुप बनाकर प्रतिदिन कार्य प्रगति की जानकारी साझा करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए. साथ ही योजनाओं के पूरा होने पर समय पर यूटिलाइजेशन सर्टिफिकेट प्राप्त करने और वित्तीय संतुलन बनाए रखने के लिए बैकअप प्लान तैयार करने को कहा. अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि जल जीवन मिशन के तहत दिसंबर 2028 तक राज्य के सभी ग्रामीण घरों में पाइपलाइन के माध्यम से शुद्ध पेयजल पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रत्येक आंगनबाड़ी केंद्र तक भी स्वच्छ पेयजल पहुंचाना सुनिश्चित किया जाए और इस दिशा में ठोस पहल की जाए.
जल संरक्षण और भू-जल स्तर बढ़ाने पर फोकस
मुख्यमंत्री ने जल संरक्षण, वर्षा जल संचयन और भू-जल स्तर बनाए रखने के लिए अल्पकालिक और दीर्घकालिक योजनाएं तैयार करने का निर्देश दिया. उन्होंने कहा कि अनुपयोगी हो चुके चापाकलों के बोरिंग का उपयोग रिचार्ज पीट के रूप में किया जाए ताकि वर्षा जल का संचयन कर भू-जल स्तर बढ़ाया जा सके. इसके साथ ही लोगों को सोक पीट निर्माण और जल संरक्षण के प्रति जागरूक करने के लिए व्यापक अभियान चलाने की बात कही.
स्वच्छ पेयजल और प्लास्टिक मुक्त गांव पर जोर
मुख्यमंत्री ने राज्य में जल गुणवत्ता की समस्या पर चिंता जताते हुए कहा कि प्रत्येक नागरिक को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराना सरकार की प्राथमिकता है. उन्होंने अधिकारियों को पाइपलाइन जलापूर्ति के साथ अन्य प्रभावी उपाय अपनाने के निर्देश दिए. साथ ही प्लास्टिक से होने वाले नुकसान के प्रति लोगों को जागरूक करने और प्लास्टिक मुक्त गांव बनाने वाले समुदायों को पुरस्कृत करने की भी बात कही.
बैठक में जल जीवन मिशन, हर घर जल, जल गुणवत्ता निगरानी, बहु ग्रामीण एवं एकल ग्रामीण जलापूर्ति योजनाएं, स्वच्छ भारत मिशन, व्यक्तिगत शौचालय, ओडीएफ प्लस गांव, ठोस एवं तरल कचरा प्रबंधन तथा गोबरधन योजना समेत कई महत्वपूर्ण योजनाओं की विस्तृत समीक्षा की गई. बैठक में पेयजल एवं स्वच्छता मंत्री योगेंद्र प्रसाद, मुख्य सचिव अविनाश कुमार, विकास आयुक्त अजय कुमार सिंह, विभागीय सचिव अबू इमरान समेत कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे.

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