मुंबई की राजनीति एक बार फिर संख्या से ज़्यादा रणनीति की कहानी बनती दिख रही है. बीएमसी चुनाव में महायुति को मिली जीत के बावजूद सत्ता का समीकरण अभी पूरी तरह स्थिर नहीं माना जा रहा. बहुमत के बेहद नज़दीक पहुंचने के बाद भी अंदरखाने चल रही हलचल ने सियासी तापमान बढ़ा दिया है. खास तौर पर शिवसेना शिंदे गुट के भीतर असहजता के संकेत साफ दिख रहे हैं. मेयर चुनाव से पहले पार्षदों को एकजुट रखने की कोशिशें तेज हो गई हैं और इसी कड़ी में पांच सितारा होटल, बंद कमरे की बैठकें और रणनीतिक गणनाएं चर्चा का विषय बनी हुई हैं. दूसरी ओर विपक्ष भी मौके की तलाश में है. आठ पार्षदों का आंकड़ा अचानक इतना अहम हो गया है कि पूरी बीएमसी की दिशा उसी पर टिकी नजर आ रही है. सवाल यह है कि क्या यह बहुमत टिकाऊ है या फिर मुंबई एक बार फिर राजनीतिक “खेला” देखने जा रही है. पूरे मामले को 10 प्वाइंट्स में समझिये.
1. बीएमसी में जीत के बाद भी क्यों बढ़ी बेचैनी?
महायुति ने चुनाव में बढ़त जरूर हासिल की है, लेकिन यह बढ़त बेहद सीमित है. ऐसे में किसी भी तरह की टूट या असहमति सत्ता का गणित पलट सकती है. यही वजह है कि जीत के बाद भी राहत के बजाय सतर्कता का माहौल बना हुआ है.
2. होटल पॉलिटिक्स की वापसी क्यों चर्चा में?
पार्षदों को पांच सितारा होटल में ठहराने का फैसला संकेत देता है कि नेतृत्व किसी भी तरह की राजनीतिक सेंधमारी को रोकना चाहता है. यह कदम दिखाता है कि अंदरूनी भरोसे को लेकर चिंता अब भी बरकरार है.
3. ‘8’ का आंकड़ा कैसे बना सत्ता की चाबी?
बीएमसी में बहुमत और विपक्ष के बीच सिर्फ आठ सीटों का अंतर है. यही अंतर सत्ता को स्थिर भी रख सकता है और अस्थिर भी कर सकता है. इसलिए यह संख्या फिलहाल राजनीति का सबसे अहम फैक्टर बन चुकी है.
4. विपक्ष की एकजुटता कितना बदल सकती है खेल?
अगर विपक्षी दल साझा रणनीति बनाते हैं तो वे बहुमत के बेहद करीब पहुंच सकते हैं. यही संभावना सत्तापक्ष को अतिरिक्त सतर्क रहने के लिए मजबूर कर रही है.
5. AIMIM की भूमिका क्यों अहम हो गई है?
AIMIM के आठ पार्षद इस पूरे समीकरण में निर्णायक बनकर उभरे हैं. पार्टी की बैठकों और रणनीतिक संकेतों पर सभी दलों की नजर बनी हुई है.
6. शिंदे गुट के भीतर असुरक्षा के संकेत
जीत के बावजूद शिंदे गुट में यह डर बना हुआ है कि कहीं अंदरूनी असंतोष बाहर न आ जाए. पार्षदों को एक साथ रखना इसी चिंता का परिणाम माना जा रहा है.
7. मेयर पद को लेकर बढ़ती खींचतान
मेयर पद सिर्फ एक संवैधानिक पद नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रतिष्ठा का सवाल है. शिंदे गुट इसे अपने पास बनाए रखने के लिए हर संभव दबाव बना रहा है.
8. बीजेपी के साथ बातचीत में बढ़त की कोशिश
पार्षदों को नियंत्रित रखकर शिंदे गुट अपनी सौदेबाजी की ताकत मजबूत करना चाहता है. इससे गठबंधन के भीतर उनकी भूमिका और प्रभाव दोनों बढ़ सकते हैं.
9. मुंबई में फिर से ‘रिसॉर्ट राजनीति’?
जो रणनीतियां पहले विधायक और सांसदों तक सीमित थीं, वही अब नगर निगम तक पहुंचती दिख रही हैं. यह बदलाव शहरी राजनीति की नई तस्वीर पेश करता है.
10. आगे की राजनीति किस ओर जाएगी?
आने वाले दिन तय करेंगे कि यह बहुमत स्थायी साबित होता है या फिर संख्या का छोटा सा फेरबदल पूरी बीएमसी की दिशा बदल देता है.


