मोहन भागवत का बड़ा बयान: भारत को तोड़ना चाहती हैं बुरी ताकतें, बोले- रिजीम चेंज से नहीं बदलेंगे हालात
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में विजयादशमी उत्सव के दौरान कहा कि केवल सत्ता या शासन बदलने से समस्याओं का समाधान नहीं होता, बल्कि स्थायी बदलाव के लिए सामाजिक जागरूकता, चरित्र निर्माण और लोगों की जिम्मेदारी निभाना जरूरी है.

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रमुख मोहन भागवत ने नागपुर में विजयादशमी उत्सव के दौरान भारत की एकता, सामाजिक बदलाव और दुनिया में हो रही सत्ता परिवर्तन की कोशिशों पर अपनी बात रखी. संघ के शताब्दी वर्ष के समापन समारोह में उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ ताकतें भारत, हिंदू समाज और संघ को कमजोर करने की कोशिश कर रही हैं. भागवत ने कहा कि केवल सत्ता या शासन व्यवस्था बदलने से समस्याओं का समाधान नहीं हो सकता. इसके लिए समाज के भीतर बदलाव और लोगों की जिम्मेदारी निभाना जरूरी है. उन्होंने फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल की घटनाओं का जिक्र करते हुए रिजीम चेंज की राजनीति पर सवाल उठाए. संघ प्रमुख ने भारत की भाषाई, धार्मिक और सांस्कृतिक विविधता को उसकी ताकत बताते हुए भावनात्मक एकता बनाए रखने पर जोर दिया. अपने संबोधन में उन्होंने चरित्र निर्माण, अच्छे विचारों और सामाजिक जिम्मेदारी को स्थायी बदलाव का आधार बताया.
भारत को कमजोर करने की कोशिशों के पीछे बाहरी ताकतें: भागवत
मोहन भागवत ने अपने संबोधन में दावा किया कि भारत की बढ़ती ताकत कुछ अंतरराष्ट्रीय शक्तियों को रास नहीं आ रही है. उनके मुताबिक, देश की प्रगति को रोकने के लिए भारत, हिंदू समाज और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को कमजोर करने की कोशिशें हो रही हैं. उन्होंने कहा कि कुछ महत्वाकांक्षी नेता भी अपने राजनीतिक हितों के कारण ऐसी ताकतों के साथ खड़े हो जाते हैं. भागवत ने पश्चिमी देशों से उठने वाली अस्थिरता की लहर का जिक्र करते हुए कहा कि भारत को भी इसका निशाना बनाया जा रहा है. उन्होंने यह भरोसा जताया कि भारत अपनी मजबूत सामाजिक शक्ति और सामूहिक प्रयासों के दम पर ऐसी कोशिशों का मुकाबला कर सकता है. हालांकि, बाहरी हस्तक्षेप और देश को कमजोर करने से जुड़े ये आरोप उनके अपने दावे हैं.
रिजीम चेंज पर फ्रांस, बांग्लादेश और नेपाल का दिया उदाहरण
संघ प्रमुख ने अपने भाषण में फ्रांस, अल्बानिया, बांग्लादेश और नेपाल में हुए घटनाक्रमों का उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि कुछ लोगों को लगता है कि सत्ता बदलने से देश की परिस्थितियां बदल जाएंगी, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है. उनके मुताबिक, शासन परिवर्तन की मांग के पीछे सक्रिय समूह कई बार अपने हितों और प्रभाव को बनाए रखना चाहते हैं. भागवत ने कहा कि भारत में भी इस तरह की कोशिशें की जा रही हैं, लेकिन देश में रिजीम चेंज नहीं होगा. उनके बयान को देश में जारी राजनीतिक विरोध और चुनाव आयोग से जुड़े विवादों के संदर्भ में भी देखा जा रहा है. हालिया प्रदर्शनों में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग भी उठी है. हालांकि, भागवत ने अपने संबोधन में किसी एक नेता का नाम लेकर आरोप नहीं लगाया.
आंदोलन का मकसद समाधान हो, समाज में विभाजन नहीं
मोहन भागवत ने आंदोलन और विरोध प्रदर्शन की भूमिका पर भी अपनी राय रखी. उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में समस्याओं के समाधान के लिए आंदोलन होना स्वाभाविक है, लेकिन उनका उद्देश्य समाज में तनाव पैदा करना या लोगों को बांटना नहीं होना चाहिए. यदि आंदोलनों के पीछे राजनीतिक स्वार्थ हावी हो जाएं, तो वे समस्या का समाधान करने के बजाय राजनीतिक साधन बन सकते हैं. उन्होंने समाज के लोगों से अपनी जिम्मेदारी समझने और सामूहिक रूप से समस्याओं का हल निकालने की अपील की. भागवत के मुताबिक, केवल सरकार या सत्ता बदलने से हर समस्या दूर नहीं होती. स्थायी बदलाव के लिए समाज की सोच, व्यवहार और कार्यशैली में भी परिवर्तन जरूरी है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सामाजिक जागरूकता और रचनात्मक प्रयास ही देश को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभा सकते हैं.
विविधता और भावनात्मक एकता को बताया भारत की असली ताकत
अपने संबोधन में RSS प्रमुख ने भारत की विविधता को देश की पहचान बताते हुए कहा कि अलग-अलग भाषाओं, धर्मों, जातियों, खानपान और परंपराओं के बावजूद भारतीय समाज एक राष्ट्र के रूप में जुड़ा रहा है. उन्होंने कहा कि जब समाज भावनात्मक एकता को भूलता है, तब उसकी कमजोरी बढ़ती है. संविधान की प्रस्तावना में लिखे 'हम भारत के लोग' का उल्लेख करते हुए उन्होंने साझा राष्ट्रीय पहचान की अहमियत बताई. भागवत ने अच्छे विचारों, अनुशासन और चरित्र निर्माण पर भी जोर दिया. उन्होंने विचारों को कर्म और चरित्र को भविष्य से जोड़ते हुए लोगों से अपने आचरण में सकारात्मक बदलाव लाने की अपील की. RSS की स्थापना वर्ष 1925 में डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार ने नागपुर में की थी. शताब्दी वर्ष के कार्यक्रम में पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी समेत कई प्रमुख हस्तियां शामिल हुईं.



