बीजेपी के दबाव और आंदोलन से बची कई माताओं की सूनी गोद : आदित्य साहू
झारखंड में लगातार सामने आ रहे बाल अपहरण के मामलों के बीच भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद आदित्य साहू ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं.

Ranchi: झारखंड में लगातार सामने आ रहे बाल अपहरण के मामलों के बीच भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद आदित्य साहू ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं. उन्होंने कहा कि बीजेपी के निरंतर दबाव, जनआंदोलन और सक्रिय हस्तक्षेप के कारण ही राज्य के विभिन्न इलाकों से अपहृत बच्चों की बरामदगी संभव हो सकी है. अंश और अंशिका की बरामदगी के बाद 12 अन्य बच्चों तथा सिलदिरी–शंकरघाट के कन्हैया कुमार की सकुशल वापसी ने यह स्पष्ट कर दिया है कि यदि प्रशासन पर जनदबाव बनाया जाए तो परिणाम सामने आते हैं. उन्होंने कहा कि ये सभी बच्चे गरीब और किसान परिवारों से हैं, जिनके माता-पिता महीनों तक मानसिक पीड़ा और अनिश्चितता में जीते रहे. बीजेपी का संघर्ष कई परिवारों के लिए उम्मीद की किरण बनकर सामने आया है.
बीजेपी आंदोलन से मिली सफलता
आदित्य साहू ने कहा कि बीजेपी द्वारा लगातार किए गए आंदोलन और दबाव का ही परिणाम है कि अपहृत बच्चों की बरामदगी संभव हो पाई. उन्होंने कहा कि यदि बीजेपी इस मुद्दे को मजबूती से नहीं उठाती तो शायद कई मासूम आज भी अपने परिवारों से दूर होते. उन्होंने स्पष्ट किया कि अभी भी सैकड़ों बच्चे लापता हैं, जिन्हें खोजने के लिए इसी तरह का अभियान और प्रशासनिक सक्रियता जरूरी है. बीजेपी का यह आंदोलन किसी राजनीतिक लाभ के लिए नहीं, बल्कि मानवता और बच्चों के भविष्य की रक्षा के लिए है.
पुलिस की निष्क्रियता पर सवाल
प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि यदि राज्य पुलिस पहले से सतर्क और सक्रिय रहती तो इतने बड़े पैमाने पर बच्चों का अपहरण संभव ही नहीं होता. उन्होंने कहा कि महीनों तक सक्रिय अपहरण गिरोह यह दर्शाते हैं कि कानून-व्यवस्था में गंभीर चूक हुई है. हालांकि उन्होंने बच्चों की बरामदगी के लिए पुलिस की सराहना भी की, लेकिन साथ ही यह भी जोड़ा कि पुलिस का धर्म केवल कार्रवाई के बाद नहीं, बल्कि अपराध को रोकना भी है.
गरीब परिवारों की पीड़ा और संवेदनशीलता की जरूरत
आदित्य साहू ने कहा कि जिन परिवारों के बच्चे गायब हो जाते हैं, वे गहरे मानसिक तनाव, भय और असहायता में जीते हैं. अधिकांश परिवार गरीब और ग्रामीण पृष्ठभूमि से होते हैं, जो न तो अपनी बात मजबूती से रख पाते हैं और न ही लंबे संघर्ष का सामर्थ्य रखते हैं. उन्होंने राज्य पुलिस से अपील की कि गांवों के सीधे-साधे लोगों के साथ अधिक संवेदनशील और मानवीय दृष्टिकोण अपनाया जाए.
परिजनों को चिकित्सा और आर्थिक सहायता की मांग
उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि अपहृत बच्चों के माता-पिता की चिकित्सा जांच कराई जाए और उन्हें आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाए. साथ ही उन्होंने अपहरण गिरोहों से कड़ाई से पूछताछ और कठोर कानूनी कार्रवाई की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने प्रशासन से अपील की कि यह अभियान लगातार जारी रहे और जमशेदपुर से अपहृत व्यवसायी पुत्र कैरव गांधी तथा तिलैया से अपहृत बच्चे की भी शीघ्र बरामदगी सुनिश्चित की जाए.

specializes in local and regional stories, bringing simple, factual, and timely updates to readers.


Leave a comment