महाकुंभ 2025: आस्था और आधुनिकीकरण का संगम, 66 करोड़ श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी
प्रयागराज: 45 दिनों तक चले महाकुंभ 2025 का भव्य समापन बुधवार को महाशिवरात्रि के अवसर पर हुआ. इस ऐतिहासिक आयोजन में लगभग 66.30 करोड़ श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में पुण्य की डुबकी लगाई. महाशिवरात्रि के अंतिम स्नान पर्व पर 1.53 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम तट पर स्नान कर अपनी आस्था प्रकट की. स्वच...


प्रयागराज:
45 दिनों तक चले महाकुंभ 2025 का भव्य समापन बुधवार को महाशिवरात्रि के अवसर पर हुआ. इस ऐतिहासिक आयोजन में लगभग 66.30 करोड़ श्रद्धालुओं ने गंगा और संगम में पुण्य की डुबकी लगाई. महाशिवरात्रि के अंतिम स्नान पर्व पर 1.53 करोड़ से अधिक श्रद्धालुओं ने संगम तट पर स्नान कर अपनी आस्था प्रकट की.
स्वच्छता और सुरक्षा पर विशेष ध्यान
महाकुंभ के दौरान स्वच्छता बनाए रखने के लिए 15,000 सफाईकर्मियों ने चौबीसों घंटे काम किया. साथ ही, मेले की सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक तकनीकों जैसे एआई कैमरे और एंटी-ड्रोन सिस्टम का उपयोग किया गया. हालांकि मौनी अमावस्या की घटना और आग लगने की घटना ने आयोजन की छवि को प्रभावित किया, मौनी अमावस्या में 30 लोगों की जान भी चली गई. इसके बावजूद श्रद्धालुओं की संख्या में कोई कमी नहीं आई.
महाकुंभ में हस्तियों की मौजूदगी
इस भव्य मेले में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ-साथ फिल्मी सितारे, खिलाड़ी और उद्योगपति भी शामिल हुए. भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक, उद्योगपति मुकेश अंबानी और गौतम अडाणी, एप्पल के संस्थापक स्टीव जॉब्स की पत्नी लॉरेन पॉवेल, और ब्रिटेन के रॉक बैंड कोल्डप्ले के क्रिस मार्टिन भी इस आयोजन में पहुंचे. सोशल मीडिया पर प्रसिद्ध हर्षा रिछारिया, मोनालिसा भोसले और ‘आईआईटी बाबा’ अभय सिंह ने भी मेले में सुर्खियां बटोरीं.
विवादों के घेरे में महाकुंभ
महाकुंभ के दौरान कुछ विवाद भी सामने आए, जिनमें फिल्म अभिनेत्री ममता कुलकर्णी का महामंडलेश्वर बनना प्रमुख रहा. इसके अलावा, गंगा जल की शुद्धता को लेकर भी सवाल उठे, जिनका सरकार और वैज्ञानिकों ने खंडन किया.
योगी आदित्यनाथ की कड़ी निगरानी
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने आयोजन की सफलता के लिए 45 दिनों में 10 बार महाकुंभ नगर का दौरा किया और व्यवस्थाओं का जायजा लिया. उन्होंने लखनऊ और गोरखपुर से भी नियंत्रण कक्ष के माध्यम से मेले पर नजर रखी.
श्रद्धालुओं की संख्या को लेकर राजनीतिक बयानबाजी
श्रद्धालुओं की संख्या को लेकर विपक्षी दलों ने सवाल उठाए, लेकिन सरकार ने 1,800 एआई कैमरों, 3,000 से अधिक अन्य कैमरों, ड्रोन और 60,000 कर्मचारियों के माध्यम से इसे प्रमाणित किया. पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भगदड़ की घटना को लेकर सरकार पर निशाना साधा, जिसे भारतीय जनता पार्टी ने सख्ती से खारिज किया.
अग्निशमन और सुरक्षा प्रबंधन
अग्निशमन विभाग ने आग की घटनाओं को रोकने में अहम भूमिका निभाई. मेले के दौरान 37,000 पुलिसकर्मी, 14,000 होमगार्ड, 3 जल पुलिस थाने, 18 जल पुलिस कंट्रोल रूम और 50 वॉच टावर स्थापित किए गए, जिससे सुरक्षा चाक-चौबंद रही.
महाकुंभ 2025 केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं था, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक विरासत और आधुनिक तकनीकों के साझेदारी का भी प्रतीक बना. जहां एक ओर करोड़ों श्रद्धालुओं ने मोक्ष प्राप्ति की कामना के साथ गंगा में स्नान किया, वहीं दूसरी ओर अत्याधुनिक तकनीकों का उपयोग कर सुरक्षा और व्यवस्था को सुनिश्चित किया गया. महाकुंभ 2025 भले ही समाप्त हो गया हो, लेकिन श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास इसे स्थायी बना देता है.

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