कोलकाता गैंगरेप : लॉ कॉलेज का गार्ड अरेस्ट, मुख्य आरोपी मनोजीत की TMC नेताओं के साथ तस्वीर वायरल, महिला आयोग ने पुलिस पर उठाये सवाल
Kolkata : कोलकाता गैंगरेप मामले में अबतक चार गिरफ्तारी हो चुकी है. पुलिस ने लॉ कॉलेज के गार्ड को अरेस्ट किया है. इससे पहले 26 जून को दो और 27 जून को एक आरोपी की गिरफ्तारी हुई थी. उधर गैंगरेप के मामले को लेकर बीजेपी ममता सरकार पर हमले पर हमले कर रही है. बता दें कि साउथ कोलकाता लॉ कॉलेज में 25 जून की ...


Kolkata :
कोलकाता गैंगरेप मामले में अबतक चार गिरफ्तारी हो चुकी है. पुलिस ने लॉ कॉलेज के गार्ड को अरेस्ट किया है. इससे पहले 26 जून को दो और 27 जून को एक आरोपी की गिरफ्तारी हुई थी. उधर गैंगरेप के मामले को लेकर बीजेपी ममता सरकार पर हमले पर हमले कर रही है. बता दें कि साउथ कोलकाता लॉ कॉलेज में 25 जून की रात एक युवती के साथ गैंगरेप का मामला सामने आया था. पीड़िता के बयान और शुरुआती जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने पहले तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया. इनमें एक पूर्व छात्र नेता है, जबकि दो मौजूदा छात्र हैं. बीजेपी का आरोप है कि गैंगरेप का मुख्य आरोपी मनोजीत मिश्रा का टीएमसी के कनेक्शन है. बीजेपी ने अभिषेक बनर्जी समेत टीएमसी के सीनियर लीडर्स के साथ मनोजीत मिश्रा की तस्वीरें सोशल मीडिया पर पोस्ट कर टीएमसी को घेरा है.
पीड़िता का लोकेशन नहीं मिल रहा
उधर राष्ट्रीय महिला आयोग ने इस मामले को लेकर कोलकाता पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े किए हैं. आयोग की सदस्य अर्चना मजूमदार ने कहा कि आयोग पीड़िता की लोकेशन और उसका पता जानना चाहता है, लेकिन पुलिस कोई जानकारी दी नहीं दे रही. उन्होंने आरोप लगाया कि पीड़िता को कलकत्ता नेशनल मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल ले जाया गया था, लेकिन वहां मेडिकल जांच नहीं कराई गई. उन्हें कहा गया कि पीड़िता को कोलकाता मेडिकल कॉलेज ले जाया जाएगा, लेकिन वह भी नहीं हुआ. अब कहा जा रहा है कि आज पीड़िता को एनआरएस मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल ले जाया जाएगा, लेकिन वह भी संदिग्ध है. मजूमदार ने कहा कि ऐसा लग रहा है कि जानबूझकर मेडिकल जांच में देरी की जा रही है. डर है कि कहीं इस मामले में भी वैसा ही न हो जैसा आरजी कर केस में हुआ था.
टीएमसी का नरम रूख
उधर टीएमसी विधायक मदन मित्रा ने कहा कि कानून सबके लिए समान है. अगर किसी ने गलत किया है तो कानून अपना काम करेगा. हम किसी अपराधी को बचाना नहीं चाहते, लेकिन यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि कोई निर्दोष व्यक्ति सज़ा न पाए. मित्रा ने कहा कि मीडिया ट्रायल से बचना चाहिए और दोष सिद्ध होने से पहले किसी को अपराधी कहना उचित नहीं. मित्रा ने कहा कि आरजी कर मेडिकल कॉलेज केस में भी पहले कोलकाता पुलिस पर सवाल उठाए गए थे, फिर सीबीआई जांच कराई गई जिसमें पुलिस की कार्रवाई को सही ठहराया गया.

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