झारखंड में सुप्रीम कोर्ट का बड़ा झटका: 15.5% आदिवासी अब SC/ST आरक्षण और सुरक्षा से वंचित हो सकते हैं
सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया कि हिंदू, सिख और बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म में धर्मांतरण करने वाले SC/ST लाभ खो देंगे. झारखंड में 13.5 लाख आदिवासी अब आरक्षण, सरकारी नौकरी, शिक्षा और कानूनी सुरक्षा से वंचित हो सकते हैं. इस फैसले का आदिवासी समाज और राजनीति पर गहरा असर पड़ने वाला है.


Ranchi: सुप्रीम कोर्ट ने आज एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए साफ कर दिया है कि हिंदू, सिख या बौद्ध धर्म के अलावा किसी अन्य धर्म में कन्वर्ट करने वाले व्यक्ति का अनुसूचित जाति (SC) दर्जा तुरंत समाप्त हो जाएगा. जस्टिस पी.के. मिश्रा और जस्टिस एन.वी. अंजारिया की पीठ ने 1950 के संविधान (अनुसूचित जाति) आदेश के क्लॉज-3 का हवाला देते हुए कहा कि केवल इन तीन धर्मों में ही SC दर्जा बचा रहता है. ईसाई, मुस्लिम या अन्य किसी भी धर्म में परिवर्तन के साथ आरक्षण, SC/ST एक्ट की कानूनी सुरक्षा, सरकारी नौकरी और शिक्षा के लाभ सब खत्म हो जाएंगे.
यह फैसला झारखंड जैसे आदिवासी बहुल राज्य के लिए सबसे ज्यादा असरदार साबित होने वाला है. Census 2011 के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार राज्य की कुल 86,45,042 अनुसूचित जनजाति (ST) आबादी में 15.5 प्रतिशत यानी 13,38,175 आदिवासी ईसाई धर्म में कन्वर्ट हो चुके हैं. इसके अलावा 18,107 मुस्लिम (0.21 प्रतिशत) भी दूसरे धर्म में शामिल हैं. कुल मिलाकर लगभग 13.56 लाख आदिवासी हिंदू, सिख या बौद्ध के अलावा अन्य धर्मों में हैं, जो अब इन लाभों से वंचित हो सकते हैं. हिंदू आदिवासी (37.5 प्रतिशत यानी 32.45 लाख) और बौद्ध-सिख वाले सुरक्षित रहेंगे, जबकि सरना समेत अन्य पारंपरिक tribal faiths (ORP में 46.42 प्रतिशत) पर भी नई बहस शुरू हो गई है.
झारखंड में कुल आबादी का 26.21 प्रतिशत हिस्सा आदिवासी है. संताल, मुंडा, ओरांव, हो जैसे प्रमुख समुदायों में मिशनरी गतिविधियों के कारण पिछले कई दशकों से कन्वर्शन की रफ्तार तेज रही है. 2024 की विभिन्न रिपोर्ट्स में भी संताल परगना जैसे इलाकों में ईसाई आबादी में भारी वृद्धि का जिक्र है, हालांकि राज्य स्तर पर ST-wise नया आधिकारिक धर्म डेटा अभी उपलब्ध नहीं है. 2011 के बाद की रिपोर्ट्स बताती हैं कि खूंटी (73.25 प्रतिशत), सिमडेगा (70.78 प्रतिशत), गुमला (68.94 प्रतिशत) जैसे जिलों में ईसाई बहुल इलाकों में राजनीतिक प्रभाव भी बढ़ा है.
सुप्रीम कोर्ट का फैसला और उसका आधार
कोर्ट ने आंध्र प्रदेश हाईकोर्ट के पुराने फैसले को बरकरार रखते हुए स्पष्ट किया कि धर्मांतरण सच्ची आस्था से होना चाहिए, न कि आरक्षण के लालच से. दोहरी पहचान रखना – बाहर ईसाई या मुस्लिम और कागजों पर SC/ST – अब संभव नहीं रहेगा. कोर्ट का कहना है कि यह संविधान के मूल उद्देश्य के खिलाफ है. अगर कोई व्यक्ति हिंदू, सिख या बौद्ध के बीच ही धर्म बदलता है तो दर्जा बरकरार रहेगा, लेकिन अन्य धर्मों में जाने पर तुरंत लाभ समाप्त हो जाएंगे.
झारखंड के आदिवासियों पर असर
Census 2011 के ST-14 टेबल के मुताबिक ईसाई आदिवासी मुख्य रूप से संताल, मुंडा और ओरांव समुदायों से हैं. 2022-2024 की रिपोर्ट्स में जिला स्तर पर ईसाई आबादी के आंकड़े बताते हैं कि कई इलाकों में कन्वर्शन जारी है. सरना अनुयायी (करीब 39.10 लाख) अभी भी “अन्य धर्म और विश्वास” की श्रेणी में गिने जाते हैं, इसलिए उनके ST प्रमाणपत्र और लाभ पर भी सवाल उठ सकते हैं. लाखों आदिवासी युवा जो नौकरी, शिक्षा या SC/ST एक्ट की सुरक्षा पर निर्भर हैं, अब अनिश्चितता में हैं.
सरना आंदोलन और आदिवासी पहचान का संकट
झारखंड में सरना को अलग धर्म कोड देने की मांग लंबे समय से चल रही है, लेकिन 2011 में इसे ORP में रखा गया. कई आदिवासी संगठन इस फैसले को tribal पहचान पर हमला मान रहे हैं. वे कहते हैं कि मिशनरी गतिविधियां सरना संस्कृति को तोड़ रही हैं और अब कोर्ट का फैसला इसे और मजबूत करेगा. कुछ संगठन कन्वर्टेड लोगों को ST सूची से बाहर करने की मांग कर रहे हैं, जबकि अन्य आरक्षण बचाने के लिए हिंदूकरण या सरना वापसी की बात कर रहे हैं.
राजनीतिक हलचल और आगे का रास्ता
झारखंड में आदिवासी वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं. 2024 विधानसभा चुनाव में ईसाई बहुल जिलों में JMM-INC गठबंधन को फायदा मिला था. अब इस फैसले से सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों में हलचल मच गई है. कुछ नेता इसे धर्मांतरण पर लगाम बताते हैं, तो कुछ आदिवासी अधिकारों पर हमला. राज्य सरकार पर दबाव है कि 2021 जनगणना के विलंबित आंकड़े जारी करे और ST-wise नया धर्म सर्वे कराए. विशेषज्ञों का मानना है कि झारखंड को अब नई नीति या कानून बनाना पड़ेगा, वरना लाखों युवा आरक्षण से हाथ धो बैठेंगे.
यह फैसला पूरे देश के लिए मिसाल बन सकता है, लेकिन झारखंड जैसे आदिवासी बहुल राज्य में इसका असर सबसे गहरा होगा. आदिवासी समाज अब इस मुद्दे पर चर्चा और संघर्ष की तैयारी में है.

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