झारखंड बीजेपी को दो सप्ताह में चुनना होगा विधायक दल का नेता, सुप्रीम कोर्ट ने दिया निर्देश
झारखंड का सूचना आयोग 2020 से ही डिफंक्ट है. दरअसल सूचना आयुक्तों की नियुक्ति के लिए नेता प्रतिपक्ष का होना जरूरी है. 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद बीजेपी ने बाबूलाल मरांडी को विधायक दल के नेता चुना था, लेकिन दलबदल कानून के तहत उनपर स्पीकर के कोर्ट में मामला चल रहा था इसलिए 4 साल से अधिक समय तक उन्हें नेता प्रतिपक्ष का दर्जा नहीं मिला. वहीं 2024 के विधानसभा चुनाव के बाद अबतक बीजेपी ने विधायक दल के नेता का चयन नहीं किया है.


रांचीः
झारखंड में बीजेपी को अपने विधायक दल के नेता का चयन जल्द करना पड़ेगा. विधानसभा चुनाव खत्म होने के एक महीने से अधिक समय बीतने के बाद भी बीजेपी ने विधायक दल का नेता नहीं चुना है, लेकिन अब सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी को अपने विधायकों का नेता चुनने का निर्देश दिया है. दरअसल मुख्य सूचना आयुक्त और सूचना आयुक्तों की नियुक्ति राज्य में लंबे समय से लंबित है. सूचना आयुक्त की नियुक्ति के लिए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष का होना जरूरी है. सूचना आयुक्तों की नियुक्ति को लेकर एक याचिका सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई थी. इसी की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने बीजेपी को निर्देश दिया है कि वो जल्द विपक्ष के नेता का नाम तय करे, ताकी सूचना आयुक्तों का चयन किया जा सके.
विधानसभा चुनाव के बाद से खाली है पद
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि झारखंड विधानसभा में विपक्ष के नेता की अनुपस्थिति के कारण चयन समिति की बैठक आयोजित नहीं हो पा रही है. यह बैठक इन महत्वपूर्ण नियुक्तियों को अंतिम रूप देने के लिए जरूरी है. नेता प्रतिपक्ष चयन समिति के महत्वपूर्ण सदस्य होतें है, लेकिन झारखंड विधानसभा चुनाव के बाद से यह पद खाली है. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने बीजेपी को निर्देश दिया कि वह झारखंड विधानसभा में अपने निर्वाचित सदस्यों में से एक को विपक्ष का नेता नामित करे. यह नामांकन दो सप्ताह के भीतर पूरा किया जाना चाहिए.
चीफ सेक्रेटरी को हलफनामा दाखिल करने का आदेश
सुप्रीम कोर्ट ने कहा “चयन समिति तीसरे सप्ताह से चयन प्रक्रिया शुरू करेगी और इसे छह सप्ताह के भीतर पूरा करने का प्रयास करेगी. चयन समिति से सिफारिशें प्राप्त होने के एक सप्ताह के भीतर नियुक्तियां की जाएंगी.” कोर्ट ने मुख्य सचिव को इस निर्देश के अनुपालन की पुष्टि करने वाला हलफनामा दाखिल करने का भी आदेश दिया.
2020 से डिफंक्ट है राज्य सूचना आयोग
मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने कहा कि झारखंड का सूचना आयोग 2020 से डिफंक्ट है. मुख्य सूचना आयुक्त समेत कई पद खाली होने के कारण आरटीआई से संबंधित हजारों मामले लंबित हैं. इसपर झारखंड सरकार के वकील ने तर्क दिया कि चयन समिति में कोरम की कमी के कारण नियुक्तियां विलंबित हुई हैं. वहीं राज्य के पूरक हलफनामे में बताया गया कि इन पदों के लिए जून 2024 में विज्ञापन जारी किया गया था. लेकिन, विपक्ष का नेता नहीं होने के कारण प्रक्रिया बाधित हो गई.

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