झारखंड के किन दो पूर्व मुख्यमंत्रियों को गवर्नर बनाकर बाहर भेजने की है तैयारी... पढ़ें पूरी खबर
झामुमो का इशारा बाबूलाल मरांडी और अर्जुन मुंडा की तरफ तो नहीं?


रांची: बीजेपी में पूर्व मुख्यमंत्रियों की भरमार है. अब लग रहा है कि एक–दो और पूर्व मुख्यमंत्रियों को गवर्नर बनाकर राज्य निकाला दिया जाएगा. पूर्व मुख्यमंत्री चंपाई सोरेन के बीजेपी में जाने की खबरों के बीच झामुमो ने यह बयान देकर सियासी गरमी बढ़ा दी है. झामुमो ने अपने बयान से इशारों में यह बताने की कोशिश की है कि बीजेपी में अब एक और पूर्व मुख्यमंत्री यानी चंपाई सोरेन के शामिल होने के बाद एक-दो और पूर्व मुख्यमंत्री को रघुवर दास की तरह किसी प्रदेश का राज्यपाल बनाया जा सकता है. झामुमो ने साफ तो नहीं कहा, लेकिन उसका इशारा बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी और पूर्व केंद्रीय मंत्री सह झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रहे अर्जुन मुंडा की ओर है.
संभावनाओं में कितना दम
बीजेपी के अंदर की वर्तमान स्थितियों को देखकर यह लग रहा है कि झामुमो ने जो संभावना जताई है, उसमें दम तो है. इसे समझने के लिए हमें 10 साल पीछे जाना होगा. 2014 में बीजेपी ने विधानसभा चुनाव जीता और रघुवर दास (वर्तमान में ओडिशा के गवर्नर) को राज्य का मुख्यमंत्री बनाया गया. 2014 से 19 तक सरकार और बीजेपी दोनों सीएम हाउस से ही चली. बीजेपी को मजबूत करने, दूसरे दलों से नेताओं और विधायकों को तोड़कर बीजेपी में लाने की रणनीति बीजेपी ऑफिस से नहीं, बल्कि सीएम हाउस से बनी. यह रणनीति बहुत कारगर साबित भी हुई, लेकिन 2019 के विधानसभा चुनाव में रघुवर की रणनीति नहीं चली. ऊपर से जमशेदपुर समेत कोल्हान में बीजेपी में कलह शुरू हो गया. इसके बाद स्थितियां ऐसी बनी कि केंद्रीय नेतृत्व में रघुवर दास को राज्यपाल बनाकर ओडिशा भेज दिया.
बाबूलाल ने केंद्रीय नेतृत्व को किया निराश
इसके बाद बीजेपी ने 2024 के चुनावों में आदिवासी मतदाताओं को पार्टी की ओर आकर्षित करने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी को प्रदेश का नेतृत्व दिया. बीजेपी में दोबारा लौटकर आए बाबूलाल मरांडी की खूब ब्रांडिंग की गई. बाबूलाल यात्रा निकालकर राज्य की सभी 81 विधानसभा सीटों में पहुंचे और सभा की. आदिवासी वोटरों को पार्टी की तरफ खींचने के लिए कई तरह के कार्यक्रम चलाए गए, लेकिन इसका फायदा बीजेपी को नहीं मिला. 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी राज्य की आदिवासी सुरक्षित सभी पांच सीटें हार गई. चुनाव के बाद हुई पार्टी की समीक्षा बैठकों में भी हंगामे हुए. इन सभी वजहों से केंद्रीय नेतृत्व झारखंड में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर चिंतित है. केंद्रीय नेतृत्व के सामने यह सवाल खड़ा है कि क्या विधानसभा चुनाव में बाबूलाल मरांडी झारखंड की 28 आदिवासी सुरक्षित सीटों में आधे भी दिला पाएंगे.
अर्जुन मुंडा नहीं दिखा रहे सक्रियता
2019 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने अर्जुन मुंडा पर भरोसा दिखाते हुए उन्हें खूंटी से लोकसभा का टिकट दिया. मात्र 1400 वोटों से चुनाव जीतकर वे सांसद बने. बीजेपी ने उन्हें फिर भी सम्मान दिया और केंद्रीय मंत्री बनाया. 2024 में अर्जुन मुंडा के नहीं चाहते हुए भी उन्हें खूंटी सीट से चुनाव लड़ाया गया और वे चुनाव हार गए. अर्जुन मुंडा झारखंड की राजनीति में भी काफी सक्रिय नहीं दिख रहे हैं. अंदरखाने खबर है कि केंद्रीय नेतृत्व उनसे खुश नहीं हैं. अब अगर चंपाई सोरेन बीजेपी में आते हैं, तो काफी उम्मीद है कि अर्जुन मुंडा को किसी दूसरे प्रदेश का राज्यपाल बनाकर भेजा जा सकता है. दरअसल, अर्जुन मुंडा और चंपाई सोरेन दोनों कोल्हान प्रमंडल से आते हैं. अगर दोनों ही नेता कोल्हान में एक्टिव होते हैं, तो वहां इनमें और उनके समर्थकों में टकराव की स्थिति पैदा होती रहेगी, जिससे पार्टी को नुकसान हो सकता है. ऐसे में बीजेपी किसी एक को दूसरे राज्य भेजने का विकल्प चुनेगी.

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