झारखंड सरकार में सब ठीक नहीं? वित्त मंत्री ने लौटाई सुरक्षा, दिल्ली तक पहुंची नाराजगी, हेमंत सोरेन खामोश क्यों?
झारखंड के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर की अपनी ही सरकार से नाराजगी खुलकर सामने आ गई है. सुरक्षा कर्मियों को लौटाने, दिल्ली में खरगे से मुलाकात और सरकारी कार्यक्रमों से दूरी के बीच सवाल उठ रहे हैं कि क्या JMM-कांग्रेस गठबंधन में सब कुछ ठीक है?


झारखंड की सियासत इन दिनों अंदर ही अंदर उबलती हुई नजर आ रही है. बाहर से गठबंधन सरकार मजबूत दिख रही है, लेकिन भीतर से सब कुछ सामान्य नहीं है. इसकी सबसे बड़ी वजह बने हैं राज्य के वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर, जिन्होंने अपनी ही सरकार के खिलाफ खुला मोर्चा खोल दिया है. सुरक्षा कर्मियों को वापस भेजने से लेकर दिल्ली में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात तक, राधाकृष्ण किशोर लगातार अपनी नाराजगी जाहिर कर रहे हैं. सबसे दिलचस्प बात यह है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन इस पूरे घटनाक्रम पर लगभग पूरी तरह खामोश हैं.
एक गाड़ी से शुरू हुआ विवाद, सरकार तक पहुंच गई बात
बताया जा रहा है कि वित्त मंत्री ने अपनी सुरक्षा में तैनात जवानों के लिए एक अतिरिक्त वाहन की मांग की थी. उनका कहना था कि मौजूदा व्यवस्था में सुरक्षा कर्मियों को एक ही वाहन में ठूंसकर ले जाना पड़ता है. जब पुलिस मुख्यालय की ओर से इस मांग पर कोई कार्रवाई नहीं हुई, तो राधाकृष्ण किशोर ने नाराज होकर अपनी सुरक्षा में लगे जवानों को ही वापस भेज दिया. आमतौर पर ऐसे मामलों में सरकार या प्रशासन स्थिति संभालने की कोशिश करता है, लेकिन इस बार न मुख्यमंत्री की ओर से कोई प्रतिक्रिया आई और न ही डीजीपी की तरफ से.
दिल्ली पहुंचे, खरगे से मिले, लेकिन संदेश किसके लिए था?
रांची में बात नहीं बनी तो राधाकृष्ण किशोर दिल्ली पहुंच गए. वहां उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे से मुलाकात की. आधिकारिक तौर पर इसे झारखंड की राजनीतिक स्थिति पर चर्चा बताया गया, लेकिन राजनीतिक गलियारों में माना जा रहा है कि उन्होंने अपनी नाराजगी और उपेक्षा की शिकायत शीर्ष नेतृत्व तक पहुंचाई. हालांकि, बैठक के बाद कांग्रेस नेतृत्व की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई.
क्या वित्त मंत्री की लगातार हो रही है अनदेखी?
हाल के कई घटनाक्रम इस सवाल को और मजबूत करते हैं. दिल्ली में झारखंड सरकार के निवेश कार्यक्रम में मुख्यमंत्री और कई मंत्री मौजूद थे, लेकिन वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर को कथित तौर पर निमंत्रण तक नहीं मिला. खुद उन्होंने कहा कि उन्हें कार्यक्रम की जानकारी या बुलावा नहीं भेजा गया. इससे पहले क्षेत्रीय भाषाओं को लेकर उनकी सिफारिश भी सरकार ने नहीं मानी. वहीं कुछ मंत्रियों ने वित्त विभाग पर योजनाओं में देरी का आरोप भी लगाया. इससे यह धारणा और मजबूत हुई कि सरकार के भीतर उनकी भूमिका लगातार कमजोर पड़ रही है.
क्या कांग्रेस-JMM गठबंधन में सब कुछ सामान्य है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मामला सिर्फ एक मंत्री की नाराजगी तक सीमित नहीं है. राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार की हार, गठबंधन के भीतर बढ़ती खींचतान और अलग-अलग दलों के बीच बयानबाजी पहले ही सवाल खड़े कर चुकी है. इसी बीच जेडीयू विधायक सरयू राय ने बिना कांग्रेस और भाजपा के नई सरकार का फॉर्मूला भी सुझाया है. हालांकि इस पर कोई आधिकारिक पहल नहीं हुई है, लेकिन इससे राजनीतिक चर्चाओं को जरूर हवा मिली है. फिलहाल राधाकृष्ण किशोर सरकार में बने हुए हैं, लेकिन उनकी नाराजगी खुलकर सामने आ चुकी है. ऐसे में अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या कांग्रेस नेतृत्व इस मामले में हस्तक्षेप करेगा, या फिर वित्त मंत्री अपनी राह खुद तय करेंगे. झारखंड की राजनीति में आने वाले दिनों में यह विवाद गठबंधन की मजबूती की नई परीक्षा बन सकता है.

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