IAS विनय चौबे और गजेंद्र सिंह की बढ़ सकती है मुश्किल, छत्तीसगढ़ ACB ने झारखंड सरकार से मुकदमा चलाने की मांगी अनुमति
रांची : झारखंड के आईएएस और वर्तमान पंचायती राज सचिव विनय कुमार चौबे और गजेंद्र सिंह की मुश्किलें बढ़ सकती है. कथित शराब घोटाला मामले में छत्तीसगढ़ एसीबी की आर्थिक अपराध शाखा ने इन दोनों अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी है. छत्तीसगढ़ एसीबी ने जिस मामले में झारखंड सरकार से मुकदमा चलाने की अन...


रांची :
झारखंड के आईएएस और वर्तमान पंचायती राज सचिव विनय कुमार चौबे और गजेंद्र सिंह की मुश्किलें बढ़ सकती है. कथित शराब घोटाला मामले में छत्तीसगढ़ एसीबी की आर्थिक अपराध शाखा ने इन दोनों अधिकारियों पर मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी है. छत्तीसगढ़ एसीबी ने जिस मामले में झारखंड सरकार से मुकदमा चलाने की अनुमति मांगी है, उसमें छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पिछले साल नवंबर में पीड़क कार्रवाई पर रोक लगा रखा है. गौरतलब है कि रायपुर के आर्थिक अपराध शाखा ने शराब घोटाले को लेकर मामला दर्ज किया था. जिसमें छत्तीसगढ़ के अधिकारियों के अलावा झारखंड के तत्कालीन उत्पाद सचिव विनय चौबे समेत कई अधिकारियों को भी आरोपी बनाया गया था.
29 अक्टूबर को चौबे समेत 17 ठिकानों पर हुई थी ईडी की रेड
इससे पहले एसीबी के केस को टेकओवर करते हुए ईडी ने 29 अक्टूबर 2024 को शराब घोटाला मामले में रांची में विनय चौबे समेत 17 ठिकानों पर छापेमारी की थी. प्रवर्तन निदेशालय आईएएस विनय चौबे, उत्पाद विभाग के संयुक्त सचिव गजेंद्र सिंह समेत अन्य के करीबी रिश्तेदारों और संबंधित अधिकारियों के चार्टर्ड अकाउंटेंट के ठिकानों पर छापेमारी की थी.
इन अफसरों और कंपनियों पर दर्ज हुआ था FIR
शराब घोटाला मामले में एफआईआर रांची के अरगोड़ा थाना क्षेत्र के रहने वाले विकास सिंह के आवेदन पर हुई थी. आवेदन में कहा गया था कि शराब घोटाले की पूरी साजिश रायपुर में ही रची गई थी और आबकारी नीति में फेरबदल कराया गया. रायपुर में दर्ज प्राथमिकी में वाणिज्य एवं उद्योग विभाग छत्तीसगढ़ के तत्कालीन संयुक्त सचिव अनिल टुटेजा, छत्तीसगढ़ राज्य मार्केटिंग कॉरपोरेशन लिमिटेड के तत्कालीन प्रबंध निदेशक अरुणपति त्रिपाठी, रायपुर के बैरन बाजार निवासी अनवर ढेबर, भिलाई निवासी अरविंद सिंह, मेसर्स सुमित फैसेलिटीज के संचालक, प्रिज्म होलोग्राफी और सिक्योरिटी प्राइवेट लिमिटेड नोएडा के विधु गुप्ता, झारखंड उत्पाद एवं मध्य निषेध विभाग के तत्कालीन सचिव विनय कुमार चौबे, झारखंड राज्य बेवरेजेस कॉरपोरेशन लिमिटेड के तत्कालीन प्रबंध निदेशक, संयुक्त सचिव गजेंद्र सिंह तथा अन्य अधिकारी के अलावा मैनपॉवर सप्लाई करने वाली तथा शराब सप्लाई करने वाली एजेंसियों का नाम शामिल था.
सिंडिकेट का कारनामा
विकास सिंह का आरोप था कि अनिल टुटेजा, अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी व उनके सिंडिकेट ने झारखंड के अधिकारियों के साथ मिलकर साजिश पूर्वक झारखंड की आबकारी नीति में फेर बदलकर वहां देसी व विदेशी शराब का ठेका सिंडिकेट के लोगों को दिलवाकर धोखाधड़ी की है और झारखंड सरकार को करोड़ों की क्षति पहुंचाई है. इस सिंडिकेट ने झारखंड में बेहिसाब नकली होलोग्राम लगी देसी शराब की बिक्री कर तथा विदेशी शराब की सप्लाई का काम दिलवाकर उन कंपनियों से करोड़ों रुपये का अवैध कमीशन प्राप्त किया है. अनिल टुटेजा और उनके सिंडिकेट ने झारखंड में अवैध शराब व्यवसाय के इरादे से जनवरी 2022 में अनवर ढेबर और अरुणपति त्रिपाठी ने झारखंड के तत्कालीन आबकारी सचिव व अन्य वरिष्ठ अधिकारियों से डील की. उनके साथ मिलकर ठेकेदारी प्रथा के स्थान पर छत्तीसगढ़ राज्य विपणन निगम लिमिटेड के माध्यम से झारखंड में देसी-विदेशी शराब की बिक्री का प्लान तैयार किया. रायपुर में बैठक हुई. इसके बाद झारखंड में 31 मार्च 2022 को नई उत्पाद नीति लागू हुई. इसके लिए अरुणपति त्रिपाठी ने झारखंड सरकार से 1.25 करोड़ रुपये भी प्राप्त किया. करीब दो वर्षों तक झारखंड उत्पाद नीति में छतीसगढ़ की एजेंसियां कार्यरत रहीं. नकली होलोग्राम, अवैध शराब की सप्लाई कर राज्य सरकार को करोड़ों के राजस्व की क्षति पहुंचाई गई.
नकली होलोग्राम के पीछे की कहानी
आरोप है कि नकली होलोग्राम पर लगातार शराब बेची गई है. प्रिज्म होलोग्राम एंड फिल्म सिक्योरिटी लिमिटेड को शराब की बोतलों में होलोग्राम छापने का काम मिला था. इसी तरह मेसर्स सुमित फैसिलिटीज लिमिटेड को मैन पावर सप्लाई की जिम्मेदारी मिली थी. तीनों ही एजेंसी छत्तीसगढ़ शराब घोटाले में भी आरोपी हैं.

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