'मैं बेगुनाह हूं...' शोएब अख्तर का दावा पड़ा फीका, डोप टेस्ट रिपोर्ट ने खोल दी पूरी कहानी
'मैं बेगुनाह हूं'... शोएब अख्तर ने ऐसा दावा किया था, लेकिन डोप टेस्ट रिपोर्ट और जांच समिति के निष्कर्षों ने उनकी दलील नहीं मानी, जानिए पाकिस्तान क्रिकेट के सबसे बड़े डोपिंग विवाद की पूरी कहानी.


पाकिस्तान क्रिकेट एक बार फिर पुराने विवादों की वजह से सुर्खियों में है. इस बार चर्चा में हैं पूर्व तेज गेंदबाज शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ, जिनसे जुड़ा एक पुराना डोपिंग विवाद फिर चर्चा में आ गया है. भारत के गृह मंत्रालय के पूर्व अंडर सेक्रेटरी आरवीएस मणि ने दावा किया है कि पाकिस्तान टीम के कुछ खिलाड़ी भारत दौरे के दौरान ड्रग्स लेकर आते थे. उनके इस बयान के बाद क्रिकेट जगत में नई बहस छिड़ गई है.
डोप टेस्ट में फेल हुए शोएब और आसिफ, टीम में मच गया था हड़कंप
साल 2006 में पाकिस्तान क्रिकेट टीम पहले ही कई विवादों से घिरी हुई थी. तभी चैंपियंस ट्रॉफी से ठीक पहले टीम के दो स्टार तेज गेंदबाज शोएब अख्तर और मोहम्मद आसिफ डोप टेस्ट में पॉजिटिव पाए गए. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड (PCB) ने खिलाड़ियों के सैंपल वर्ल्ड एंटी-डोपिंग एजेंसी (WADA) से मान्यता प्राप्त लैब में भेजे थे, जहां दोनों के सैंपल में नंद्रोलोन (प्रतिबंधित एनाबोलिक स्टेरॉयड) मिलने की पुष्टि हुई. इसके बाद दोनों खिलाड़ियों को तुरंत टीम से बाहर कर पहली उपलब्ध फ्लाइट से पाकिस्तान वापस भेज दिया गया. PCB ने बाद में दोनों को निलंबित भी कर दिया.
'मैं बेगुनाह हूं...' लेकिन सबूत नहीं दे पाए शोएब
डोपिंग विवाद सामने आने के बाद शोएब अख्तर लगातार खुद को निर्दोष बताते रहे. उन्होंने कहा कि उन्होंने कोई परफॉर्मेंस बढ़ाने वाली दवा जानबूझकर नहीं ली और दावा किया कि चोट से उबरने के लिए एक हकीम की दी हुई हर्बल दवा और हाई-प्रोटीन डाइट ले रहे थे. उन्होंने अपनी ऑनलाइन डायरी में लिखा कि उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया, जो उन्हें नहीं करना चाहिए था और वे पूरी तरह बेगुनाह हैं. हालांकि जांच के दौरान वे इस दावे के समर्थन में कोई ठोस सबूत पेश नहीं कर सके. जांच समिति ने यह भी कहा कि खिलाड़ियों को अपना पक्ष रखने का पूरा मौका दिया गया, लेकिन वे अपनी बेगुनाही साबित नहीं कर पाए.
दोबारा टेस्ट का मौका भी ठुकराया, फिर लगा बैन
जांच समिति ने दोनों खिलाड़ियों को दोबारा टेस्ट कराने का विकल्प भी दिया था, लेकिन उन्होंने यह प्रस्ताव स्वीकार नहीं किया. इसके बाद 1 नवंबर 2006 को PCB के डोपिंग ट्रिब्यूनल ने फैसला सुनाते हुए शोएब अख्तर पर दो साल और मोहम्मद आसिफ पर एक साल का प्रतिबंध लगा दिया. यह पूरा डोपिंग अभियान तत्कालीन पाकिस्तान कोच बॉब वूल्मर की पहल पर शुरू हुआ था. बाद में आरवीएस मणि ने अपने हालिया बयान में यह भी दावा किया कि वूल्मर पाकिस्तान टीम में ड्रग्स से जुड़े मुद्दों को लेकर सख्त रुख रखते थे. हालांकि वूल्मर की 2007 में हुई मौत को लेकर कई तरह की अटकलें लगती रही हैं, लेकिन उसकी परिस्थितियों को लेकर अलग-अलग रिपोर्टें और जांच सामने आई हैं. यह मामला आज भी पाकिस्तान क्रिकेट के सबसे चर्चित और विवादित अध्यायों में गिना जाता है.

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