दक्षिण एशिया में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों की कड़ी में एक और दर्दनाक अध्याय जुड़ गया है. Pakistan के Sindh प्रांत में 25 वर्षीय हिंदू किसान और सामाजिक कार्यकर्ता कैलाश कोहली की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई. इस घटना ने न सिर्फ स्थानीय हिंदू समुदाय को झकझोर दिया है, बल्कि पूरे इलाके में तनाव का माहौल पैदा कर दिया है.
झोपड़ी बनाने का विवाद बना हत्या की वजह
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, यह वारदात एक प्रभावशाली जमींदार की जमीन पर झोपड़ी बनाए जाने को लेकर हुए विवाद के बाद हुई. आरोप है कि रसूखदार जमींदार सरफराज निजामानी ने अपने साथियों के साथ मिलकर कैलाश कोहली पर बेहद नजदीक से गोलियां चलाईं. दो गोलियां उनकी छाती में लगीं और मौके पर ही उनकी मौत हो गई.
बदीन जिले में फैला तनाव
यह घटना Badin जिले के तल्हार तालुका स्थित एक ग्रामीण क्षेत्र में हुई. हत्या की खबर फैलते ही इलाके में गुस्सा भड़क उठा. स्थानीय हिंदू समुदाय में भय और आक्रोश दोनों देखने को मिले. लोगों का कहना है कि वे पहले ही असुरक्षा के माहौल में जी रहे थे और यह घटना उसी डर की भयावह पुष्टि है.
सड़कों पर उतरे लोग, हाईवे जाम
हत्या के बाद सैकड़ों लोग सड़कों पर उतर आए. प्रदर्शनकारियों ने बदीन–हैदराबाद नेशनल हाईवे और बदीन–थारकोल रोड को जाम कर दिया. घंटों तक यातायात ठप रहा. लोगों ने साफ कहा कि जब तक दोषियों की गिरफ्तारी नहीं होती, आंदोलन जारी रहेगा.
शव रखकर किया गया विरोध
घटना के बाद पीड़ित परिवार और स्थानीय लोगों ने कैलाश कोहली का शव सार्वजनिक स्थान पर रखकर धरना दिया. पुलिस अधिकारियों ने प्रदर्शनकारियों को 24 घंटे में गिरफ्तारी का आश्वासन दिया, लेकिन कई दिन बीतने के बावजूद मुख्य आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी. इससे लोगों का गुस्सा और भड़क गया.
कौन थे कैलाश कोहली
कैलाश कोहली सिर्फ एक किसान नहीं थे. वे इलाके में सामाजिक मुद्दों को उठाने और हिंदू अल्पसंख्यकों के अधिकारों की आवाज बनने के लिए जाने जाते थे. स्थानीय लोग बताते हैं कि वे जबरन जमीन कब्जाने, भेदभाव और धमकियों के खिलाफ लगातार आवाज उठाते रहे थे. इस हत्या के बाद सोशल मीडिया पर भी गुस्सा फूट पड़ा. #JusticeForKailashKolhi जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे. मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने इसे अल्पसंख्यक समुदाय के खिलाफ सुनियोजित हिंसा बताया और सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग की.
मानवाधिकार संगठनों की तीखी प्रतिक्रिया
पाकिस्तान के अल्पसंख्यक अधिकार संगठनों ने इस हत्या को “निर्मम और सोची-समझी वारदात” करार दिया. उनका कहना है कि यह सिर्फ एक व्यक्ति की हत्या नहीं, बल्कि पूरे समुदाय को डराने की कोशिश है. प्रदर्शन में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे तक शामिल हुए, जो इस आक्रोश की गहराई को दर्शाता है.
सिंध सरकार का बयान
सिंध सरकार की ओर से कहा गया है कि पीड़ित परिवार के संपर्क में प्रशासन है और पुलिस को सख्त निर्देश दिए गए हैं. मामले को सिंध मानवाधिकार आयोग के संज्ञान में भी लिया गया है और पुलिस कार्रवाई पर रिपोर्ट तलब की गई है. हालांकि, जमीन पर अब तक ठोस कार्रवाई न होने से लोगों का भरोसा डगमगाया है.
डर और असुरक्षा का गहराता साया
स्थानीय हिंदू समुदाय का कहना है कि वे वर्षों से अपहरण, जबरन धर्मांतरण और धमकियों जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं. कैलाश कोहली की हत्या ने उनके भीतर बैठा डर और गहरा कर दिया है. उनका कहना है कि यह लड़ाई सिर्फ एक हत्या के खिलाफ नहीं, बल्कि उस व्यवस्था के खिलाफ है जहां ताकतवरों को संरक्षण मिलता है.
बड़ा सवाल अब भी कायम
बांग्लादेश से लेकर पाकिस्तान तक की घटनाएं यह संकेत देती हैं कि भारत के बाहर हिंदू अल्पसंख्यक लगातार हिंसा और भेदभाव का सामना कर रहे हैं. कैलाश कोहली की हत्या एक बार फिर यह सवाल खड़ा करती है—क्या क्षेत्रीय सरकारें अपने सबसे कमजोर नागरिकों की सुरक्षा करने में नाकाम साबित हो रही हैं?

